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अम्बिकापुर@ सुपरमैन की एक और दबिश…किराए के मकान में चल रही थी ‘महुआ शराब फैक्ट्री’

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8 भट्ठियां एक साथ चढ़ी मिलीं,480 किलो महुआ लाहन और 70 लीटर शराब जब्त,इंजेक्शन से लेकर एमपी की शराब तक लगातार कार्रवाई, फिर भी बड़े नेटवर्क पर सवाल बरकरार
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,13 अगस्त 2026 (घटती-घटना)।
स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले अंबिकापुर में अवैध शराब के खिलाफ आबकारी विभाग की कार्रवाई ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। संभागीय आबकारी उड़नदस्ता ने पटपरिया स्थित संकटमोचन मंदिर के पास एक किराए के मकान में दबिश देकर कथित रूप से चल रही महुआ शराब की फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया। मौके से 8 चढ़ी हुई भट्ठियां, 70 लीटर महुआ शराब और 480 किलो महुआ लाहन बरामद किया गया। मामले में अर्जुन कुजुर को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया। कार्रवाई सहायक जिला आबकारी अधिकारी सुपरमैन रंजीत गुप्ता के नेतृत्व में हुई। मुखबिर की सूचना पर टीम किराए के मकान तक पहुंची तो एक कमरे में आठ भट्ठियों पर शराब बनाने का काम चल रहा था, जबकि दूसरे कमरे में 24 प्लास्टिक डिब्बों में महुआ लाहन रखा मिला। टीम ने शराब जब्त की और लाहन मौके पर नष्ट कराया। शराब बनाने के उपकरण और बर्तन भी जब्त किए गए। विभाग के अनुसार आरोपी के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 34(1)(क)(च), 34(2) और 59(क) के तहत कार्रवाई की गई है।
व्यंग्य में कहें तो ‘विलेन’ बदल रहे हैं, फिल्म वही है : हर कार्रवाई के बाद एक नया आरोपी सामने आता है। एक आरोपी जेल जाता है, पूछताछ में दूसरे का नाम आता है और फिर अगली दबिश में दूसरा आरोपी भी जेल पहुंच जाता है। यह कार्रवाई की सफलता है या नेटवर्क की गहराई का संकेत—यह जांच का विषय है।
क्योंकि अगर एक किराए के मकान में एक साथ आठ भट्ठियां चल रही थीं,तो सवाल केवल अर्जुन कुजुर तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि कच्चा माल कहां से आया,तैयार शराब की बिक्री कहां होती थी,ग्राहक कौन थे और इस कथित कारोबार से जुड़े अन्य लोग कौन हैं।
’90 प्रतिशत विक्रेता जेल में’ दावे के बाद भी नए मामले : नशीले इंजेक्शन के मामले में विभाग पहले ही दावा कर चुका है कि अंबिकापुर के लगभग 90 प्रतिशत विक्रेता जेल भेजे जा चुके हैं। इसके बावजूद बाद में बलरामपुर से कथित सप्लायर पकड़ में आया। इसी तरह अवैध शराब के खिलाफ लगातार कार्रवाई के बावजूद शहर और आसपास के इलाकों से महुआ शराब की भट्टियां और बड़ी मात्रा में लाहन बरामद होना बताता है कि समस्या केवल एक-दो आरोपियों की नहीं हो सकती। यही वह बिंदु है जहां ‘सुपरमैन’ की असली परीक्षा शुरू होती है।
अब सवाल गिरफ्तारी से आगे का है…
लगातार कार्रवाई से आबकारी विभाग की सक्रियता जरूर सामने आ रही है। लेकिन कार्रवाई की अगली मंजिल केवल गिरफ्तारी और जब्ती तक सीमित न रहकर पूरे नेटवर्क तक पहुंचना जरूरी है।
कौन कच्चा माल उपलब्ध कराता है?
कौन शराब की बिक्री करवाता है?
कौन परिवहन करता है?
कहां-कहां इसकी सप्लाई होती है?

और क्या इन मामलों के पीछे कोई बड़ा संगठित नेटवर्क भी है?
इन सवालों के जवाब सामने आने बाकी हैं। फिलहाल सुपरमैन रंजीत गुप्ता की टीम की एक और बड़ी कार्रवाई की चर्चा है। आठ भट्ठियां बंद हुई हैं, 480 किलो लाहन नष्ट हुआ है और 70 लीटर शराब जब्त हुई है। लेकिन अगर ऑपरेशन क्लीन को वास्तव में सफल बनाना है तो अगली सुर्खी केवल ‘एक और आरोपी गिरफ्तार’ की नहीं, बल्कि ‘अवैध शराब के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश’ की होनी चाहिए। कार्रवाई में आबकारी उपनिरीक्षक टीआर केहरी,मुख्य आरक्षक अशोक सोनी, नगर सैनिक रणविजय सिंह,रोहित सोनी तथा आबकारी स्टाफ नीरज चौहान की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
सुपरमैन की ‘स्पीड’ फिर चर्चा में…
सुपरमैन रंजीत गुप्ता की अगुवाई वाला उड़नदस्ता पिछले कुछ समय से लगातार कार्रवाई कर रहा है। कभी नशीले इंजेक्शन की खेप, कभी कथित सप्लायर, कभी हजारों कैप्सूल और अब एक ही मकान में आठ भट्ठियां—कार्रवाइयों की फेहरिस्त लगातार लंबी होती जा रही है। यही वजह है कि विभागीय हलकों में रंजीत गुप्ता को मजाकिया अंदाज में ‘सुपरमैन’ कहने की चर्चा भी तेज है। मुखबिर से सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचना, बरामदगी करना और आरोपियों को जेल भेजना—कार्रवाई की यह गति निश्चित रूप से ध्यान खींचती है। लेकिन कहानी का दूसरा पहलू भी है।
इंजेक्शन से शराब तक…हर बार एक नई कड़ी
पिछली कार्रवाइयों को जोड़कर देखें तो ऑपरेशन क्लीन की कहानी केवल आज की आठ भट्ठियों तक सीमित नहीं है। वाहिद अंसारी की गिरफ्तारी के बाद मोशीम अंसारी तक कार्रवाई पहुंची। साहिल तिर्की के बाद नितीश गुप्ता गिरफ्तार हुआ। सीतापुर में सजाद अली के बाद महबूब खान तक टीम पहुंची। ब्रह्मपारा में आशा पांडेय के बाद राजेश मंदिलवार उर्फ बुटन गिरफ्तार हुआ। इसके बाद अंबिकापुर के अविनाश पैकरा से पूछताछ के आधार पर बलरामपुर के अमर विश्वकर्मा उर्फ बिट्टू तक टीम पहुंची। वहीं गंगापुर में विजय गिरी के घर से 200 किलो महुआ लाहन और 15 लीटर महुआ शराब बरामद हुई थी। कुछ दिन पहले नुनेरा गांव में 18 पेटियों में 900 पाव यानी 162 लीटर मध्यप्रदेश की गोवा व्हिस्की बरामद कर दो आरोपियों को जेल भेजा गया। और अब पटपरिया में आठ भट्ठियों से 70 लीटर शराब और 480 किलो लाहन।
यानी ऑपरेशन क्लीन की फाइल में अब इंजेक्शन, कैप्सूल, महुआ शराब और दूसरे राज्य की शराब—सबकी अलग-अलग कहानियां दर्ज होती जा रही हैं।


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