सोशल मीडिया पर उठे कई सवाल,लोगों ने कहा…दुकान का उपयोग दूसरे व्यवसाय के लिए हो…
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,14 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। शहर के स्टेडियम के समीप स्थित शिव मंदिर के पीछे नगर निगम द्वारा निर्मित व्यावसायिक परिसर में संचालित मांसाहारी दुकान को लेकर विवाद गहरा गया है। मंदिर की दीवार से सटकर मांसाहार का क्रय-विक्रय होने पर भाजपा नेता धनंजय मिश्रा ने इसे धार्मिक आस्था पर आघात बताते हुए नगर निगम से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। वहीं इस मुद्दे पर सोशल मीडिया में भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं,जहां लोगों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली,दुकान के आवंटन और आसपास की अन्य गतिविधियों पर भी सवाल उठाए हैं। धनंजय मिश्रा ने कहा कि किसी भी पवित्र पूजा स्थल के ठीक पीछे मांसाहार की दुकान संचालित होना श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। उनका कहना है कि दुकानों के आवंटन के समय अधिकारियों को धार्मिक स्थलों की गरिमा और सामाजिक संवेदनशीलता का ध्यान रखना चाहिए था।
उन्होंने नगर निगम से इस व्यवस्था में तत्काल सुधार करते हुए संबंधित दुकान को वहां से हटाने की मांग की। इस मुद्दे पर वरिष्ठ पत्रकार आलोक शुक्ला ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मामले ने स्थानीय भाजपा नेताओं की निष्कि्रयता को भी उजागर किया है। वहीं अधिवक्ता अरविंद सिंह ने सुझाव दिया कि दुकान को हटाने के बजाय उसमें किसी अन्य प्रकार का व्यवसाय संचालित कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नगर निगम के महापौर और आयुक्त को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए तथा मंदिर के समीप मांसाहारी गतिविधियां बंद कराने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए। सोशल मीडिया पर रानू राज पाण्डेय ने सवाल उठाया कि संबंधित दुकान किसके नाम आवंटित है, उसे किराए पर किसने दिया और यदि प्रदेश तथा नगर निगम में सत्ता पक्ष की सरकार है तो ऐसी स्थिति उत्पन्न कैसे हुई। उन्होंने पूरे आवंटन की जांच की मांग भी की। वहीं विनाल गुप्ता ने टिप्पणी करते हुए कहा कि मंदिर परिसर के आसपास केवल मांसाहारी दुकान ही नहीं,बल्कि सिगरेट की दुकान और अन्य गतिविधियां भी संचालित होती हैं, जिन पर भी प्रशासन को ध्यान देना चाहिए। उनका कहना था कि यदि धार्मिक स्थल की गरिमा बनाए रखना उद्देश्य है तो पूरे क्षेत्र का समग्र मूल्यांकन होना चाहिए।
नगर निगम से कार्रवाई की मांग…
मामले के तूल पकड़ने के बाद अब लोगों की नजर नगर निगम पर है। नागरिकों का कहना है कि यदि दुकान का आवंटन नियमों के अनुरूप भी हुआ है,तब भी धार्मिक स्थल की संवेदनशीलता को देखते हुए उसका वैकल्पिक उपयोग सुनिश्चित किया जा सकता है। वहीं कई लोगों ने निगम से आवंटन प्रक्रिया सार्वजनिक करने और भविष्य में धार्मिक स्थलों के आसपास इस प्रकार की गतिविधियों से बचने के लिए स्पष्ट नीति बनाने की मांग की है। यह मामला अब केवल एक दुकान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि धार्मिक आस्था, प्रशासनिक संवेदनशीलता और नगर नियोजन जैसे मुद्दों पर भी बहस का विषय बन गया है। नगर निगम की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
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