नई दिल्ली,29 जून 2026 । केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में सोमवार को हरियाणा और राजस्थान सरकारों के बीच यमुना जल परियोजना के निर्माण एवं कार्यान्वयन को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। समझौते के तहत जुलाई से अक्टूबर के बीच पश्चिमी यमुना नहर से लगभग 580 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) पानी तीन भूमिगत पाइपलाइनों के माध्यम से राजस्थान तक पहुंचाया जाएगा। 3.6 मीटर से अधिक व्यास वाली इन पाइपलाइनों के जरिए राजस्थान और हरियाणा दोनों राज्यों को पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। समझौते के अवसर पर अमित शाह ने कहा कि इससे हरियाणा और राजस्थान के लोगों की लगभग तीन दशक पुरानी पेयजल संबंधी समस्या के समाधान का मार्ग प्रशस्त हुआ है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘संवाद से समाधान’ और ‘सहकारी संघवाद’ के मंत्र का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि यदि राज्य सहयोग की भावना से कार्य करें तो वर्षों पुराने विवाद भी आसानी से सुलझाए जा सकते हैं। इस अवसर पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल तथा केंद्र और दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अमित शाह ने कहा कि समझौते में वित्तीय दायित्व, लागत साझेदारी, जल आवंटन, जल छोड़ने की प्रक्रिया, रखरखाव, निगरानी व्यवस्था, पारदर्शिता तथा विवाद निपटान की वैज्ञानिक और व्यापक व्यवस्था शामिल की गई है। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्रीय जल आयोग द्वारा तैयार यह ढांचा आने वाले कई दशकों तक विवाद-मुक्त व्यवस्था के रूप में काम करेगा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में इस लंबे समय से लंबित मुद्दे का समाधान कुछ ही दिनों में निकाल लिया गया। इस परियोजना से राजस्थान के सीकर, चूरू और झुंझुनूं जिलों तथा हरियाणा के भिवानी और फतेहाबाद क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित होगी। गृह मंत्री ने कहा कि अब तक बेकार बह जाने वाला वर्षा जल लोगों की प्यास बुझाने के साथ-साथ बड़े तालाबों में संग्रहित कर भूजल स्तर को भी रिचार्ज करेगा। उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों राज्यों के लिए ‘विन-विन’ स्थिति का उदाहरण है। यमुना जल परियोजना का उद्देश्य 1994 के उच्च यमुना बेसिन की सतही जल साझेदारी संबंधी समझौते के तहत राजस्थान को आवंटित जल हिस्से को पश्चिमी यमुना नहर से भूमिगत पाइपलाइन प्रणाली के जरिए राज्य तक पहुंचाना है, जिससे शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में लाखों लोगों को विश्वसनीय पेयजल उपलब्ध हो सके और सामाजिक-आर्थिक विकास को गति मिले।
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