- मुख्यमंत्री के आश्वासन के बावजूद सरकार का निर्णय नहीं,न्याय की आस में परिजन
- 13 दिन बाद भी अधूरा न्याय,सीबीआई जांच की मांग पर अड़ा पीडि़त परिवार,तेरहवीं संपन्न,लेकिन सरकार के फैसले का अब भी इंतजार
- तेरहवीं भी हुई पूरी,लेकिन सीबीआई जांच पर फैसला अब भी बाकी
- मुख्यमंत्री के आश्वासन के बावजूद सरकार का निर्णय नहीं, न्याय की आस में परिजन
- 13 दिन बाद भी अधूरा न्याय, सीबीआई जांच की मांग पर अड़ा पीड़ित परिवार, तेरहवीं संपन्न, लेकिन सरकार के फैसले का अब भी इंतजार
- श्राद्ध कर्म पूरे, न्याय की लड़ाई जारी नौगई हत्याकांड में सीबीआई जांच की मांग पर अब तक सरकार मौन
- चिता की आग बुझी, लेकिन न्याय की उम्मीद अब भी जल रही है, नौगई तिहरे हत्याकांड में तेरहवीं के बाद भी सीबीआई जांच पर निर्णय कब?
- तेरह दिन बीते… तेरहवीं भी हुई, पर न्याय की पहली सीढ़ी अब भी दूर
- सीबीआई जांच की मांग पर सरकार के फैसले का इंतजार, पीड़ित परिवार की उम्मीद बरकरार
- परिजनों की मांग बरकरार; फास्ट ट्रैक कोर्ट, गवाहों की सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की भी उठी मांग


-रवि सिंह-
कोरिया/सोनहत,29 जून 2026 (घटती-घटना)। सोनहत थाना क्षेत्र के ग्राम नौगई में 16 और 17 जून की दरमियानी रात हुए जघन्य तिहरे हत्याकांड को आज 13 दिन पूरे हो चुके हैं,इन तेरह दिनों में गांव ने तीन अर्थियां उठते देखीं, परिवार ने अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार किया, दशगात्र और अब तेरहवीं संस्कार की रस्म भी पूरी हो गई,लेकिन समय बीतने के साथ जिस चीज का इंतजार सबसे ज्यादा बढ़ता जा रहा है,वह है न्याय,शोक की सभी धार्मिक और सामाजिक परंपराएं पूरी हो चुकी हैं, पर पीडि़त परिवार की सबसे बड़ी मांग—सीबीआई जांच—पर अब तक राज्य सरकार की ओर से कोई स्पष्ट निर्णय सामने नहीं आया है,घटना के बाद से लेकर आज तक पीडि़त परिवार का रुख नहीं बदला है,परिवार लगातार यही कह रहा है कि यदि इस पूरे प्रकरण की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी,विशेषकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई),से कराई जाएगी,तभी घटना के पीछे की वास्तविक सच्चाई सामने आ सकेगी और जनता का विश्वास भी कायम रहेगा।
नौगई तिहरे हत्याकांड के 13 दिन बीत चुके हैं, अंतिम संस्कार से लेकर तेरहवीं तक की सभी सामाजिक और धार्मिक रस्में पूरी हो गईं, लेकिन न्याय की प्रक्रिया अभी भी अधूरी प्रतीत होती है। पीडि़त परिवार आज भी उसी मांग पर कायम है,जिससे उसने पहले दिन अपनी बात शुरू की थी—सीबीआई जांच, इसके साथ ही फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई, गवाहों की सुरक्षा,निष्पक्ष विवेचना और दोषियों को शीघ्र कठोर सजा दिलाने की मांग भी लगातार दोहराई जा रही है,अब सबकी निगाहें राज्य सरकार पर हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए आश्वासन के बाद सरकार सीबीआई जांच की मांग पर क्या निर्णय लेती है। क्योंकि तेरह दिन बाद भी पीडि़त परिवार के लिए सबसे बड़ा प्रश्न वही है—क्या उन्हें न्याय मिलेगा, और यदि मिलेगा तो कब?
एक ही परिवार पर टूटा था दःुखों का पहाड़- 16 जून की रात नौगई गांव में जो कुछ हुआ, उसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया,आरोप है कि पुराने विवाद के चलते एक ही परिवार के पांच लोगों पर जानलेवा हमला किया गया,इस हमले में लाला सिंह की वाहन सहित जिंदा जलकर मौत हो गई,वीरेंद्र सिंह गंभीर रूप से घायल होने के बाद अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान दम तोड़ बैठे, नागिन सिंह लगभग 80 प्रतिशत तक झुलस गए थे और रायपुर ले जाते समय उनकी भी मृत्यु हो गई, वहीं मयंक सिंह और योगेंद्र सिंह गंभीर रूप से घायल हुए,दोनों का उपचार अभी भी जारी है, एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत और दो लोगों का गंभीर रूप से घायल होना पूरे क्षेत्र के लिए अत्यंत दर्दनाक घटना रही।
तेरहवीं पूरी,लेकिन न्याय का इंतजार जारी- मृतकों की तेरहवीं का कार्यक्रम परिजनों ने पूरे रीति-रिवाज के साथ संपन्न कर लिया है, गांव और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग इस कार्यक्रम में शामिल हुए और दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित की, लेकिन तेरहवीं की रस्म पूरी होने के बाद भी परिवार की आंखों में सुकून नहीं दिख रहा,उनका कहना है कि अंतिम संस्कार की परंपराएं पूरी हो गई हैं, लेकिन न्याय की प्रक्रिया अभी अधूरी है,जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होगी और दोषियों को कठोर सजा नहीं मिलेगी,तब तक उन्हें मानसिक शांति नहीं मिलेगी।
परिजनों की एकमात्र मांग—सीबीआई जांच-घटना के पहले दिन से ही पीडि़त परिवार की सबसे बड़ी मांग सीबीआई जांच रही है, परिजनों का कहना है कि यह केवल हत्या का मामला नहीं,बल्कि एक अत्यंत गंभीर और सुनियोजित वारदात है,ऐसे मामलों में जांच किसी ऐसी एजेंसी से होनी चाहिए, जिस पर सभी पक्षों को समान रूप से विश्वास हो,परिवार का मानना है कि यदि जांच सीबीआई करेगी तो घटना के पीछे की पूरी साजिश,सभी जिम्मेदार लोगों की भूमिका और यदि कहीं किसी स्तर पर कोई चूक या मिलीभगत हुई है तो वह भी सामने आ सकेगी, इसी कारण आज भी उनकी पहली और अंतिम मांग सीबीआई जांच ही है।
परिजनों ने प्रशासन का पूरा सहयोग किया-घटना के बाद से लेकर अब तक पीडि़त परिवार ने जांच एजेंसियों और प्रशासन का पूरा सहयोग किया है,परिवार के सदस्यों ने पुलिस को बयान दिए,जांच में सहयोग किया और न्यायिक प्रक्रिया पर विश्वास जताया, परिजनों का कहना है कि उन्होंने किसी भी स्तर पर जांच में बाधा नहीं डाली,उन्होंने कानून पर भरोसा रखा और सरकार से केवल निष्पक्ष न्याय की मांग की,उनका कहना है कि यदि उन्होंने शासन-प्रशासन का सहयोग किया है तो सरकार भी उनकी प्रमुख मांगों पर गंभीरता से विचार करे।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की मांग- सीबीआई जांच के अलावा परिजनों की दूसरी प्रमुख मांग यह है कि पूरे मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराई जाए,उनका कहना है कि कई बार ऐसे मामलों में वर्षों तक मुकदमे चलते रहते हैं,जिससे पीडि़त परिवार को न्याय मिलने में अत्यधिक विलंब हो जाता है, इसलिए इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाकर शीघ्र निर्णय कराया जाना चाहिए,परिवार का कहना है कि दोषियों को समयबद्ध तरीके से सजा मिलेगी,तभी समाज में कानून के प्रति विश्वास मजबूत होगा।
गवाहों और साक्ष्यों की सुरक्षा भी जरूरी- पीडि़त परिवार ने शासन से गवाहों एवं साक्ष्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की है,उनका कहना है कि इतने चर्चित और गंभीर मामले में यदि गवाहों को सुरक्षा नहीं मिलेगी तो न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है,इसलिए सरकार को इस दिशा में भी आवश्यक कदम उठाने चाहिए,परिवार चाहता है कि जांच पूरी होने तक सभी महत्वपूर्ण गवाहों को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
अब भी बरकरार हैं कई सवाल- हालांकि पुलिस ने इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और कुछ आरोपियों के आत्मसमर्पण की जानकारी भी सामने आई है, लेकिन कई सवाल आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं, क्या पूरे मामले की जांच वर्तमान व्यवस्था में पूरी तरह निष्पक्ष होगी? क्या घटना के सभी पहलुओं की समान गंभीरता से जांच हो रही है? क्या पूरे घटनाक्रम के पीछे यदि कोई बड़ी साजिश है तो उसका भी खुलासा होगा? क्या पीडि़त परिवार की प्रमुख मांगों पर सरकार जल्द निर्णय लेगी? इन्हीं सवालों के कारण सीबीआई जांच की मांग लगातार मजबूत होती जा रही है।
परिजनों को अब देरी की चिंता-तेरह दिन पहले जब यह घटना हुई थी, तब सरकार और प्रशासन लगातार सक्रिय दिखाई दे रहे थे,मंत्री पहुंचे, वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे, पुलिस ने कार्रवाई की और लगातार आश्वासन भी दिए गए,लेकिन अब जब समय बीत रहा है तो परिजनों के मन में यह चिंता भी बढ़ रही है कि कहीं मामला धीरे-धीरे ठंडा न पड़ जाए,परिवार का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि तेरहवीं तक उनकी प्रमुख मांगों पर कोई ठोस निर्णय सामने आ जाएगा,लेकिन ऐसा नहीं हुआ,यही कारण है कि अब वे सरकार से जल्द निर्णय लेने की अपील कर रहे हैं।
क्या समय के साथ कम हो जाएगा दबाव?- स्थानीय स्तर पर भी यह चर्चा शुरू हो गई है कि कहीं प्रशासन यह मानकर तो नहीं चल रहा कि समय बीतने के साथ मामला स्वतः शांत हो जाएगा,हालांकि परिजनों का कहना है कि वे किसी आंदोलन या टकराव की राह पर नहीं हैं,वे केवल यह चाहते हैं कि सरकार अपने आश्वासन पर अमल करे और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे,उनका कहना है कि न्याय मिलने तक वे अपनी मांग उठाते रहेंगे।
सरकार के सामने बड़ी परीक्षा-यह मामला अब केवल एक आपराधिक घटना नहीं रह गया है,यह सरकार की संवेदनशीलता,पुलिस की विवेचना और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता की भी परीक्षा बन चुका है,एक ओर मुख्यमंत्री स्वयं कठोर कार्रवाई का आश्वासन दे चुके हैं,दूसरी ओर पीडि़त परिवार सीबीआई जांच की मांग पर अडिग है,ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह पीडि़त परिवार का विश्वास कैसे बनाए रखे।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur