रायपुर,17 जून 2026। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित जिला खनिज न्यास घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (प्रवर्तन निदेशालय) ने अपनी जांच का दायरा और तेज कर दिया है। इसी कड़ी में प्रवर्तन निदेशालय की विभिन्न टीमों ने राज्य के पांच प्रमुख जिलों में एक साथ छापेमारी की। जांच एजेंसी के इस बड़े सर्च ऑपरेशन के दौरान 1 करोड़ रुपए से अधिक की नगद राशि बरामद की गई है। यह पूरी कार्रवाई लगभग 575 करोड़ रुपए के कथित डीएमएफ घोटाले से जुड़े मनी लॉन्डि्रंग मामले के तहत की जा रही है। जांच की जद में आए इन पांच जिलों में रायपुर, धमतरी, दुर्ग, कोरबा और अंबिकापुर शामिल हैं, जहां कुल नौ ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने दबिश दी। प्रवर्तन निदेशालय की टीमों ने नौ अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की, जिनमें चार रिहायशी घर और पांच व्यापारिक परिसर शामिल थे। सबसे अधिक नगद राशि कोरबा और धमतरी के ठिकानों से मिलने की सूचना है। जांच के दायरे में आने वाले प्रमुख नामों में कारोबारी प्रकाश सालुंके, किशोर एग्रो से जुड़े शाश्वत लुणावत, मानसून एग्रो के प्रमोटर और कांग्रेस के पूर्व सरगुजा जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता, तथा ठेकेदार दीपेश गांधी समेत कई अन्य सप्लायर और कारोबारी शामिल हैं। गौरतलब है कि राकेश गुप्ता कृषि विभाग के एक बड़े सप्लायर माने जाते हैं और पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में उनकी फर्म द्वारा की गई सप्लाई पर भी जांच एजेंसियां लगातार अपनी नजरें जमाए हुए हैं। छापेमारी के दौरान प्रवर्तन निदेशालय को कई बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज, बैंक लेनदेन की विस्तृत फाइलें और डिजिटल साक्ष्य हाथ लगे हैं। जांच एजेंसी अब इन बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स की फॉरेंसिक लैब में गहन जांच करवा रही है। अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य कथित घोटाले में शामिल पूरे मनी लॉन्डि्रंग नेटवर्क, इस अवैध कमाई के लाभार्थियों और सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले बिचौलियों का पता लगाना है। पूरी कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे और ठिकानों पर सीआरपीएफ के जवानों को तैनात किया गया था। प्रवर्तन निदेशालय की प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई गई है कि ष्ठरूस्न फंड में भारी गड़बड़ी की गई है। खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए आवंटित अरबों रुपए की राशि को कथित तौर पर ठेकेदारों, सप्लायरों और बिचौलियों के माध्यम से दूसरे खातों में डायवर्ट किया गया। जांच में सरकारी ठेकों की मंजूरी और परियोजनाओं के काम दिलाने के बदले 25 से 40 प्रतिशत तक कमीशन लिए जाने के गंभीर आरोपों की भी पड़ताल की जा रही है।
माना जा रहा है कि बरामद दस्तावेजों के आधार पर जल्द ही एजेंसी मनी लॉन्डि्रंग नेटवर्क से जुड़े संदिग्धों को समन भेजकर पूछताछ करेगी, जिसके बाद गिरफ्तारियों का सिलसिला भी शुरू हो सकता है।
पहले भी कई बड़े अधिकारी और बिचौलिए आ चुके हैं घेरे में
यह पहली बार नहीं है जब ष्ठरूस्न घोटाला जांच एजेंसियों के केंद्र में आया है। इससे पूर्व भी इस मामले में कई बड़े नाम और प्रशासनिक अधिकारी जांच के दायरे में रहे हैं। इनमें पूर्व कोरबा कलेक्टर रानू साहू, पूर्व उप सचिव सौम्या चौरसिया और कथित बिचौलिए सूर्यकांत तिवारी का नाम प्रमुख है। वर्ष 2024 और 2025 में भी प्रवर्तन निदेशालय ने छत्तीसगढ़ के कई स्थानों पर छापेमारी की थी, जिसके बाद करोड़ों रुपए की संपत्तियां अटैच की गई थीं। फिलहाल 16 जून को हुई इस ताज़ा कार्रवाई पर प्रवर्तन निदेशालय की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं जारी किया गया है, लेकिन राज्य के राजनीतिक गलियारों में इस छापेमारी ने बड़ी हलचल मचा दी है।
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