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बिलासपुर@फर्जीवाड़ा : डेढ़ दशक से बैगा जनजाति का बनता रहा फर्जी प्रमाण पत्र,और प्रशासन के कान में जूं तक नहीं रेंगी,हल्ला मचा तब शुरू हुई जांच…

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बिलासपुर,13 जून 2026। छत्तीसगढ़ में फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनाना इतना आसान हो गया है कि स्कूली रिकॉर्ड में सफेदा लगाकर फर्जी बैगा जनजाति का प्रमाण पत्र बनवा लिया जाता है और इसका फायदा उठाकर सरकारी नौकरी कर रहे हैं। बिलासपुर जिले के कोटा और मस्तूरी ब्लाक में फर्जी तरीके से विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा का जाति प्रमाण पत्र बनवा कर 70 से अधिक लोगों ने नौकरी हासिल कर ली है। साथ ही 250 से अधिक फर्जी प्रमाण पत्र बनवा लिए गए हैं। खास बात है कि स्कूल में सफेदा लगाकर ढीमर को बैगा अंकित किया जा रहा है और नए एडमिशन मे बैगा जाति अंकित कराया जा रहा है। इनके राजस्व अभिलेख, स्कूल रिकॉर्ड, दाखिल-खारिज और निर्वाचन कागजातों में ढीमर ओबीसी जाति है। कई मामलों में पिता की जाति ढीमर है, जबकि बेटे का प्रमाण पत्र बैगा के नाम पर जारी हुआ है। कुछ शिकायतों में पत्नी एसटी और पति ओबीसी दर्ज होने जैसी विसंगतियां भी हैं। खास – बात कि जितना भी जाति प्रमाण पत्र बना है वह सब 2015 के पहले का है और निवास – बिलासपुर के इमलीपारा का लिखा गया है जबकि सभी लोग ग्राम पोड़ी, थाना सीपत, तहसील मस्तूरी के मूल निवासी है। दरअसल स्कूल रिकॉर्ड में छेड़छाड़ करते हुए दाखिले के समय या पुराने रिकॉर्ड में सफेदा लगाकर ढीमर को ‘बैगा’ लिख दिया गया। बता दें कि ढीमर मूलतः केंवट जाति के हैं। मजे की बात यह है कि कई लोग ग्राम पोंडी, सीपत तहसील मस्तूरी के निवासी हैं, पर सर्टिफिकेट एसडीएम पेंड्रारोड और पहले एसडीएम बिलासपुर से जारी कराए गए। नियमतः मस्तूरी एसडीएम से बनना था। ज्यादातर प्रमाण पत्र अस्थायी बनाए गए, जिन पर फर्जी सील और साइन किए गए। अधिकारियों से मिलीभगत कर ग्राम पंचायत से प्रस्ताव पास कराकर सर्टिफिकेट बनवाए गए।


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