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अम्बिकापुर@बिना कलेक्टर अनुमोदन 29 दुकानें हस्तांतरित करने का आरोप,11 साल से किराया नहीं वसूले जाने पर उठे सवाल

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कम्पनी बाजार की दुकानों को लेकर निगम प्रशासन घिरा,कैलाश मिश्रा ने कलेक्टर से जांच व कार्रवाई की मांग की

-संवाददाता-
अम्बिकापुर,19 मई 2026 (घटती-घटना)। नगर पालिक निगम अंबिकापुर में आईडीएसएमटी योजना के तहत आवंटित दुकानों को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। सामाजिक कार्यकर्ता व वरिष्ठ भाजपा नेता गोधनपुर निवासी कैलाश मिश्रा ने कलेक्टर सरगुजा को आवेदन सौंपकर आरोप लगाया है कि कम्पनी बाजार क्षेत्र में रजाई-गद्दा व्यवसाय करने वाले व्यापारियों को वर्ष 2015 में 29 दुकानों का नियम विरुद्ध हस्तांतरण कर दिया गया, जबकि योजना में केवल ‘आबंटन’ का प्रावधान है, हस्तांतरण का नहीं। शिकायत में कहा गया है कि आईडीएसएमटी योजना अंतर्गत छत्तीसगढ़ शासन नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आदेश क्रमांक 39/70/5504/अ.स./न.प्र./2001 रायपुर दिनांक 23 नवंबर 2001 के अनुसार योजना के अध्यक्ष कलेक्टर होते हैं तथा दुकानों के आबंटन के लिए कलेक्टर का अनुमोदन आवश्यक है। आरोप है कि बिना कलेक्टर की स्वीकृति के ही 29 दुकानों को एक विशेष वर्ग के लोगों के नाम हस्तांतरित कर दिया गया।
11 वर्षों से नहीं लिया गया किराया : आवेदन में सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि वर्ष 2015 से अब तक संबंधित दुकानदारों से नगर निगम द्वारा एक रुपये तक का किराया नहीं लिया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि इससे नगर निगम को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इन दुकानों का नियमानुसार संचालन किया जाए तो निगम की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
निगम प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल : मामले के सामने आने के बाद नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। शहर में चर्चा है कि आखिर इतने वर्षों तक दुकानों का किराया क्यों नहीं वसूला गया और बिना सक्षम स्वीकृति के हस्तांतरण कैसे कर दिया गया। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला प्रशासनिक लापरवाही के साथ-साथ वित्तीय अनियमितता का भी माना जा सकता है। अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि शिकायत के बाद इस मामले में जांच समिति गठित होती है या नहीं तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की जाती है।
सामान्य सभा में उठा था मामला,फिर भी नहीं हुई कार्रवाई
कैलाश मिश्रा ने अपने आवेदन में उल्लेख किया है कि यह मामला नगर निगम की सामान्य सभा की बैठक में भी उठ चुका है और जांच कराने का निर्णय लिया गया था। इसके बावजूद अब तक किसी प्रकार की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई और न ही कोई ठोस कार्रवाई हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम में कई मामलों की जांच की घोषणा तो होती है,लेकिन फाइलें आगे नहीं बढ़तीं। ऐसे में कम्पनी बाजार दुकान हस्तांतरण प्रकरण भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
प्रथम दृष्टया नियम विरुद्ध प्रतीत होता है मामला
शिकायतकर्ता ने कहा है कि जब दुकानों के हस्तांतरण में कलेक्टर का अनुमोदन ही नहीं लिया गया तो पूरा मामला प्रथम दृष्टया अवैध और नियम विरुद्ध प्रतीत होता है। उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि तत्काल जांच कराई जाए और नियम विरुद्ध तरीके से हस्तांतरित दुकानों को खाली कराकर पुनःनगर निगम के नियंत्रण में लिया जाए।


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