Breaking News

बिलासपुर@सस्पेंडेड आईएएस रानू की अटैच प्रॉपर्टी नहीं होगी मुक्त

Share


हाईकोर्ट बोला…पहले की संपत्ति भी हो सकती है कुर्क,मनी-लॉन्डि्रंग में सीधे सबूत जरूरी नहीं

बिलासपुर,24 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कोरबा कलेक्टर रहीं और सस्पेंड आईएएस रानू साहू के रिश्तेदारों की संपत्ति अटैच करने के खिलाफ दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल ने अपने फैसले में कहा कि अपराध से पहले खरीदी गई संपत्ति भी अटैच की जा सकती हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मनी लॉन्डि्रंग के मामलों में सीधे सबूत होना जरूरी नहीं है। परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर भी कार्रवाई की जा सकती है। दरअसल कोल लेवी वसूली और मनी लॉन्डि्रंग केस में रानू साहू आरोपी हैं। जांच के दौरान ईडी को पता चला कि रानू साहू ने अवैध लेन-देन कर अपने रिश्तेदारों के नाम पर संपत्ति अर्जित की है। जांच के बाद ईडी ने रानू साहू के रिश्तेदार तुषार साहू, पंकज कुमार साहू, पीयूष कुमार साहू, पूनम साहू, अरुण कुमार साहू, लक्ष्मी साहू, सहलिनी साहू और रेवती साहू की करोड़ों की संपत्तियों को अटैच किया है। जिसके खिलाफ रिश्तेदारों ने हाईकोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दायर की थी। साथ ही अटैच संपत्तियों को मुक्त कराने की मांग की थी।
ईडी की कार्रवाई पर
हाईकोर्ट ने लगाई मुहर

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि संबंधित संपत्तियां रानू साहू के कलेक्टर बनने से पहले खरीदी गई थी, इसलिए उन्हें अटैच करना गलत है। साथ ही यह भी दलील दी गई कि एफआईआर में उनका नाम शामिल नहीं है और अपीलेट ट्रिब्यूनल की ओर से अपील खारिज करना भी अनुचित है। हालांकि हाईकोर्ट ने इन सभी तर्कों को स्वीकार नहीं किया।
हाईकोर्ट बोला…मनी लांड्रिंग केस में संपत्ति अटैच करने का है अधिकार
डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अपराध से पहले खरीदी गई संपत्ति भी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्डि्रंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत स्वतः सुरक्षित नहीं मानी जा सकती। कानून के तहत जुर्म से हुई कमाई की परिभाषा केवल अवैध संपत्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी समतुल्य कीमत की संपत्ति भी इसमें शामिल होती है। ऐसी स्थिति में अगर वास्तविक अवैध कमाई का पता नहीं चल पाता, तो एजेंसियां बराबर मूल्य की अन्य संपत्तियों को भी अटैच कर सकती हैं। भले ही वे पहले कानूनी रूप से खरीदी गई हो।
सीधे सबूत जरूरी नहीं,
परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर्याप्त

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि मनी लॉन्डि्रंग जैसे मामलों में सीधे साक्ष्य मिलना अक्सर कठिन होता है, क्योंकि लेन-देन कठिन और इनडायरेक्ट तरीके से किए जाते हैं। फाइनेंशियल एनालिसिस, संपत्ति खरीद की टाइमलाइन और वैध आय के अभाव जैसे परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर भी यह माना जा सकता है कि संपत्ति और अपराध से हुई कमाई के बीच शुरुआत से संबंध है।
इन सभी तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने ईडी की कार्रवाई को सही ठहराते हुए रानू साहू के रिश्तेदारों की ओर से दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दी है।


Share

Check Also

राजपुर@ उत्कृष्ट पार्षद के लिए नवीन सर्व सोनार समाज ने किया पार्षद विशवास का सम्मान

Share राजपुर,24 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)। नवीन सर्व सोनार समाज राजपुर द्वारा निर्दलीय निर्वाचित वार्ड पार्षद …

Leave a Reply