
बैकुंठपुर में भाजपा महिला मोर्चा ने सुना पीएम का संबोधन,महिलाओं की भागीदारी को बताया ऐतिहासिक अवसर
कोरिया,13 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)। भारतीय लोकतंत्र एक ऐसे मोड़ पर खड़ा दिखाई दे रहा है, जहां दशकों पुरानी मांग अब विधायी हकीकत बनने की दहलीज पर है। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’—जिसे राजनीतिक गलियारों में महिला आरक्षण के रूप में जाना जाता है—अब सिर्फ बहस का विषय नहीं, बल्कि सत्ता संरचना को पुनर्परिभाषित करने वाला प्रस्ताव बन चुका है। बैकुंठपुर में इस ऐतिहासिक पहल की गूंज साफ सुनाई दी, जहां भाजपा महिला मोर्चा ने एकत्र होकर प्रधानमंत्री के संबोधन का लाइव प्रसारण देखा और इस पहल को‘नारी सशक्तिकरण की निर्णायक छलांग’ बताया।
लाइव प्रसारण के जरिए जुड़ा स्थानीय उत्साह
भारतीय जनता पार्टी जिला कार्यालय बैकुंठपुर में आयोजित इस कार्यक्रम में महिला मोर्चा की पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं,कार्यक्रम का केंद्र रहा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संबोधन,जिसे सभी ने सामूहिक रूप से सुना,यह आयोजन केवल एक राजनीतिक गतिविधि नहीं था, बल्कि इसे एक वैचारिक संवाद के रूप में भी देखा गया,जहां स्थानीय स्तर पर महिलाओं की भागीदारी और उनकी राजनीतिक भूमिका पर चर्चा हुई।
क्या है ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’?
यह अधिनियम भारतीय संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण देने से जुड़ा है एक ऐसी मांग,जो पिछले लगभग चार दशकों से भारतीय राजनीति में उठती रही है,प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि यह निर्णय 21वीं सदी के भारत के लिए ऐतिहासिक मोड़ साबित होगा, यह सिर्फ प्रतिनिधित्व नहीं,बल्कि निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करेगा,संसद और विधानसभाओं तक महिलाओं की पहुंच संरचनात्मक रूप से आसान होगी।
विशेष सत्रः इंतजार के अंत की शुरुआत
केंद्र सरकार द्वारा 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुलाया जाना इस बात का संकेत है कि सरकार इस विधेयक को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाना चाहती है, प्रधानमंत्री ने इसे‘दशकों की प्रतीक्षा का अंत’ बताते हुए कहा कि यह अधिनियम महिलाओं के जीवन में एक बड़ा अवसर लेकर आएगा—विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए जो राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना चाहती हैं,लेकिन संरचनात्मक बाधाओं के कारण पीछे रह जाती हैं।
विश्लेषणः राजनीति में महिलाओं की हिस्सेदारी क्यों जरूरी?
प्रतिनिधित्व बनाम वास्तविक भागीदारी
भारत की आधी आबादी महिलाएं हैं, लेकिन संसद और विधानसभाओं में उनकी हिस्सेदारी अभी भी सीमित है, यह अधिनियम इस असंतुलन को सुधारने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।
नीति निर्माण में दृष्टिकोण का विस्तार-महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से नीति निर्माण में सामाजिक, पारिवारिक और आर्थिक मुद्दों पर अधिक संवेदनशील दृष्टिकोण आने की संभावना है।
राजनीतिक संस्कृति में बदलाव
विशेषज्ञ मानते हैं कि महिलाओं की संख्या बढ़ने से राजनीति में संवाद, सहमति और सामाजिक मुद्दों पर ध्यान बढ़ सकता है हालांकि यह बदलाव धीरे-धीरे ही दिखाई देगा।
स्थानीय प्रतिक्रियाः आभार और उम्मीद
बैकुंठपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भाजपा महिला मोर्चा की पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया और इसे महिलाओं के लिए‘स्वर्णिम अवसर’ बताया, जिलाध्यक्ष रीता यादव, जिला महामंत्री पुष्पलता राजवाड़े, ममता कुशवाहा, रेखा यादव, संगीता गुप्ता, लक्ष्मी साहू, आंचल सिंह परमार, शीला राजवाड़े, गीता साहू, साक्षी सिंह राजपूत, पार्वती रजक, गीता एक्का, तोता रानी, शिल्पा शर्मा, पुष्पा पाल, आभादेवी चौहान, सीमाकली, सीमा साहू, रीना साहू, शीतल साहू, प्रतिमा साहू सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहीं।
अवसर, राजनीति और यथार्थ की परीक्षा
‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर उत्साह जितना बड़ा है, चुनौती भी उतनी ही गंभीर है, यह अधिनियम अगर लागू होता है, तो यह भारतीय राजनीति में संरचनात्मक बदलाव की शुरुआत हो सकती है-लेकिन असली परीक्षा होगी इसके प्रभावी क्रियान्वयन और वास्तविक सशक्तिकरण की, सवाल अब सिर्फ यह नहीं है कि महिलाओं को सीटें मिलेंगी या नहीं, बल्कि यह है कि क्या उन्हें निर्णय लेने की असली ताकत भी मिलेगी? भारतीय संसद एक नया इतिहास रचने की ओर बढ़ रही है-अब देखना यह है कि यह इतिहास कितनी गहराई तक समाज को बदलता है।
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