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खड़गवां@खड़गवां में जप्त अवैध क्रेशर गायब खनिज विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल एक साल पहले हुई थी बड़ी कार्रवाई

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-संवाददाता-
खड़गवां,31 मार्च 2026 (घटती-घटना)। मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के खड़गवां तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत पैनारी में संचालित एक अवैध क्रेशर पर लगभग एक वर्ष पूर्व प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की थी। खनिज विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर क्रेशर मशीनरी, सामग्री और अन्य उपकरणों को जप्त किया था, इस दौरान संबंधित संचालक पर हजारों रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था,अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि खनिज विभाग इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई करेगा या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।
जप्त क्रेशर रहस्यमय तरीके से गायब- कार्रवाई के बाद जप्त क्रेशर को विभागीय सुपुर्दगी में रखा गया था, लेकिन अब सामने आया है कि वह मशीनरी मौके से गायब हो चुकी है,बताया जा रहा है कि लगभग एक साल से यह क्रेशर वहां मौजूद नहीं है, सबसे बड़ा सवाल यह है कि विभागीय अभिरक्षा में रखी गई इतनी बड़ी मशीनरी बिना किसी जानकारी के कैसे गायब हो गई।
एफआईआर तक नहीं,जांच भी नहीं-स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों के अनुसार, क्रेशर के गायब होने के बाद भी खनिज विभाग ने अब तक न तो किसी प्रकार की चोरी या गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई है और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ जांच शुरू की गई है, इस मामले में विभाग की चुप्पी ने पूरे घटनाक्रम को और अधिक संदिग्ध बना दिया है।
सांठगांठ की आशंका-ग्रामीणों के बीच यह चर्चा तेज है कि कहीं अवैध क्रेशर संचालक और विभागीय अधिकारियों के बीच मिलीभगत तो नहीं हुई,आशंका जताई जा रही है कि जप्त मशीनरी को किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट कर दिया गया या उसे बेच दिया गया, यदि ऐसा है, तो यह प्रशासनिक कार्रवाई को निष्प्रभावी बनाने का गंभीर मामला हो सकता है।
कई सवालों के घेरे में विभाग-
विभागीय सुपुर्दगी में क्रेशर की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी?
मशीनरी गायब हुई तो एफआईआर क्यों नहीं दर्ज कराई गई?
जप्त सामग्री का रिकॉर्ड और पंचनामा क्या कहता है?
क्या जुर्माना वसूली के बाद मामले को दबा दिया गया? इन सवालों का जवाब अभी तक सामने नहीं आया है।
राजस्व और पारदर्शिता पर असर- अवैध क्रेशर संचालन पहले ही शासन को राजस्व हानि पहुंचाता है, वहीं जप्त मशीनरी का विभागीय कब्जे से गायब होना प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है, यदि इसमें लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है, तो यह केवल विभागीय चूक नहीं बल्कि शासन की कार्रवाई को कमजोर करने वाला मामला होगा।
ग्रामीणों ने मांगी उच्चस्तरीय जांच- ग्राम पंचायत पैनारी और आसपास के ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, उनका कहना है कि कलेक्टर स्तर पर जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि जप्त क्रेशर को किसके आदेश से हटाया गया और वह वर्तमान में कहां है।


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