अम्बिकापुर,31 मार्च 2026 (घटती-घटना)। देश में जनप्रतिनिधियों पर होने वाले खर्च को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। समाजसेवी सुजान बिंद ने इस विषय पर बयान देते हुए कहा कि सांसदों और विधायकों पर होने वाला खर्च आम जनता के लिए चिंता का विषय है और इस पर गंभीर मंथन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देश में बड़ी संख्या में विधायक और सांसद हैं, जिन पर वेतन,भत्ते,आवास,यात्रा,सुरक्षा और अन्य सुविधाओं के रूप में हर वर्ष भारी राशि खर्च होती है। यह पैसा सीधे तौर पर जनता के टैक्स से आता है,ऐसे में इसके उपयोग को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। सुजान बिंद ने यह भी कहा कि यदि इन खर्चों की समग्र समीक्षा की जाए,तो यह आंकड़ा और अधिक बढ़ सकता है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों के वेतन-भत्तों की समीक्षा करने और चुनावी खर्च पर नियंत्रण लगाने की मांग की।
आंकड़ों को लेकर स्पष्टता जरूरी : इस बीच जानकारों का कहना है कि इस प्रकार के आंकड़े अक्सर सोशल मीडिया पर बिना आधिकारिक पुष्टि के प्रसारित होते हैं। सांसदों और विधायकों के वेतन एवं सुविधाएं अलग-अलग नियमों के तहत निर्धारित होती हैं,इसलिए वास्तविक खर्च का आकलन आधिकारिक स्रोतों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
जनजागरूकता की जरूरत समाजसेवी ने आम जनता से अपील की कि वे इस विषय पर जागरूक रहें और सरकारी खर्चों में पारदर्शिता की मांग करें, ताकि लोकतंत्र मजबूत हो सके।
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