- PWD की पोल खुलीः बनते ही उखड़ी सड़क, जिम्मेदार कौन?
- करोड़ों डकार गए ठेकेदार…सड़क बनी और तुरंत बिखर गई…
- मिट्टी पर डामर चढ़ाकर खेल खत्म… खड़गवां में खुला भ्रष्टाचार…
- सरकारी पैसे की LIVE लूट,सड़क बनी और आंखों के सामने टूट गई
-राजेन्द्र शर्मा-
खड़गवां,30 मार्च 2026 (घटती-घटना)। खड़गवां विकासखंड में लोक निर्माण विभाग द्वारा कराए जा रहे सड़क निर्माण कार्यों ने विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिन सड़कों को वर्षों तक टिकाऊ होना चाहिए था, वे निर्माण के महज कुछ ही दिनों—कहीं-कहीं घंटों—में ही उखड़ती नजर आ रही हैं, यह मामला न केवल निर्माण गुणवत्ता पर प्रश्नचिन्ह लगाता है, बल्कि विभागीय निगरानी, तकनीकी मानकों और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी गंभीर आरोप खड़े करता है।
निर्माण के तुरंत बाद उखड़ने लगी सड़कें
खड़गवां मुख्यालय में कूडाकूपारा से करवा मार्ग तक बनाई गई सड़क,जिसका निर्माण आयुष फ्लाई ऐश ब्रिक्स इंडस्ट्रीज द्वारा कराया गया,निर्माण के तुरंत बाद ही खराब होने लगी, हालात इतने खराब हैं कि स्थानीय ग्रामीण अपने हाथों से डामर उखाड़ते नजर आए। वाहनों के सामान्य आवागमन से ही सड़क की परतें टूटकर बिखर रही हैं,स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़क की सतह कमजोर है,डामर की परत निर्धारित मोटाई के अनुसार नहीं डाली गई,निर्माण में जल्दबाजी और लापरवाही साफ दिखती है।
तकनीकी मानकों की खुली अनदेखी
सड़क निर्माण के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं जैसे डब्ल्यूबीएम (वाटर बाउंड मैकेडम) और डब्ल्यूएमएम का सही तरीके से पालन नहीं किया गया, सामान्यत इन सामग्रियों को प्लांट में मिक्स कर रोलर से दबाकर मजबूत बेस तैयार किया जाता है,लेकिन यहां यह प्रक्रिया या तो अधूरी रही या पूरी तरह नजरअंदाज की गई,इसके अलावा मिट्टी की सफाई किए बिना सीधे डामरीकरण कर दिया गया,रोलिंग और लेवलिंग का काम ठीक से नहीं हुआ,गुणवत्ता परीक्षण की प्रक्रिया संदिग्ध रही, इन सभी खामियों के कारण सड़क टिकाऊ नहीं बन पाई।
जनता के टैक्स की खुली बर्बादी
करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क का यह हाल दर्शाता है कि सार्वजनिक धन का दुरुपयोग हुआ है, गुणवत्ता नियंत्रण पूरी तरह विफल रहा है, जिम्मेदारों पर कार्रवाई का अभाव है, ग्रामीणों का कहना है कि जिन सड़कों को वर्षों तक चलना चाहिए, वे एक दिन भी नहीं टिक पा रहीं।
‘सेटिंग’ का खेल : ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत?
जब ग्रामीणों ने घटिया निर्माण का विरोध किया,तो मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने कथित रूप से कहा सारा काम सेटिंग से चल रहा है,जहां शिकायत करनी है कर लो,यह बयान इस पूरे मामले को और गंभीर बना देता है, इससे यह संकेत मिलता है कि निर्माण कार्य में पारदर्शिता नहीं है और ठेकेदार व विभागीय अधिकारियों के बीच सांठगांठ की संभावना है।
इंजीनियर की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
लोक निर्माण विभाग में पदस्थ इंजीनियर एस.के. लोध की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है,ग्रामीणों के अनुसार वे निर्माण स्थल पर शायद ही कभी मौजूद रहते हैं,फोन कॉल का जवाब नहीं देते,निर्माण कार्य की निगरानी प्रभावी नहीं है, ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह केवल लापरवाही है या जानबूझकर की गई अनदेखी?
मुख्यमंत्री के निर्देशों की अनदेखी
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हाल ही में लोक निर्माण विभाग को सख्त निर्देश दिए थे कि निर्माण में गड़बड़ी मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाए,दोषी अधिकारियों पर सख्त कदम उठाए जाएं,ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाए, इसके बावजूद खड़गवां में इस प्रकार की लापरवाही सामने आना प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर सवाल खड़े करता है।
सूचना बोर्ड तक नहीं, पारदर्शिता गायब
निर्माण कार्य स्थल पर सूचना बोर्ड तक नहीं लगाए गए हैं, जिससे परियोजना की लागत, ठेकेदार का नाम,निर्माण अवधि जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां आम जनता से छिपी हुई हैं,यह पारदर्शिता के नियमों का सीधा उल्लंघन है।
ग्रामीणों में आक्रोश…जांच की मांग…
स्थानीय लोगों में इस पूरे मामले को लेकर भारी नाराजगी है, ग्रामीणों ने मांग की है कि निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच हो, दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई की जाए, भविष्य में गुणवत्ता से समझौता न किया जाए।
विकास या दिखावा?
खड़गवां की यह घटना केवल एक सड़क की खराब गुणवत्ता का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम में व्याप्त खामियों और संभावित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है, जहां एक ओर सरकार ‘मॉडल सड़क’ और ‘सुशासन’ की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर विकास कार्य दम तोड़ते नजर आ रहे हैं, अब देखना होगा कि यह मामला कार्रवाई तक पहुंचता है या फिर अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाता है।
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