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एमसीबी@ जंगल के हृदय में जागृत हुआ जामवंत धाम राजामंडा

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आम के पेड़ से रिसता ‘अमृत’ और सदियों पुराने अवशेषों का रहस्य
यहां प्रसाद खाने रोज आते है भालू…बाबा के हाथों से खाते है प्रसाद
-राजन पाण्डेय-
एमसीबी,25 मार्च 2026 (घटती-घटना)।
भरतपुर विकासखंड के ग्राम उचेहरा के घने जंगलों के बीच एक ऐसा स्थान है जहाँ प्रकृति, इतिहास और आस्था का अद्भुत मिलन होता है, बहरासी से मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ‘राजामंडा धाम’ आज के दौर में न केवल श्रद्धा का केंद्र है,बल्कि एक अनसुलझा रहस्य भी बना हुआ है। इसे स्थानीय लोग ‘जामवंत धाम’ के नाम से पुकारते हैं,जहाँ पत्थरों में उकेरा गया इतिहास और पेड़ों से बहती जलधारा भक्तों को मंत्रमुग्ध कर रही है,यहां एक और विशेष बात है कि भालुओं का एक झुंड़ हर रोज एक बाबा की कुटिया में आता है। भगवान का प्रसाद खाता है और फिर पानी पीकर वापस लौट जाता है, यह भालू वहां मौजूद किसी को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। भालुओं के बाबा के कुटिया में आनी की चर्चा के बाद उसके वीडियो और फोटो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग इन भालुओं को देखने के लिए आते हैं।
इतिहास के बिखरे पन्ने : राजा-रानी का निवास और खंडित मूर्तियां
घने जंगलों और पहाड़ों से घिरे इस परिसर में भगवान गणेश,शिव और विष्णु की प्राचीन खंडित मूर्तियां बिखरी पड़ी हैं,ये प्रतिमाएं किसी गौरवशाली अतीत की गवाही देती हैं, कहा जाता है कि यह क्षेत्र कभी राजा-रानी का निवास स्थान हुआ करता था,जिन्होंने इन देव-विग्रहों की स्थापना की थी।
चैत्र नवरात्रिः भक्ति का सैलाब और अखंड रामायण-वर्तमान में यहाँ चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर नवधा रामायण का पाठ और अखंड भंडारे का आयोजन हो रहा है, सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु दुर्गम रास्तों को पार कर यहाँ पहुंच रहे हैं,मनोकामना ज्योति कलश की लौ और श्रद्धालुओं के जयकारों से पूरा जंगल गुंजायमान है।
प्रशासन से उम्मीदः पर्यटन मानचित्र पर मिले जगह-भले ही सड़क की सुविधा ने यहाँ पहुंचना आसान कर दिया है, लेकिन बढ़ती भीड़ को देखते हुए बुनियादी ढांचों की भारी कमी है, श्रद्धालुओं ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि यहाँ शौचालय, विश्राम गृह और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि राजामंडा धाम प्रदेश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित हो सके। राजामंडा का जामवंत धाम सिर्फ एक मंदिर नहीं,बल्कि आस्था, इतिहास और प्रकृति का वह संगम है जो आधुनिक दुनिया की कोलाहल से दूर सुकून की तलाश कर रहे हर शख्स को अपनी ओर खींचता है।
भालुओं को सीताराम कहते हैं बाबा
बाबा इन भालुओं को सीताराम कहकर बुलाते हैं, बाबा और बुजुर्ग महिला भालुओं को अपने हाथ से खाना खिलाते हैं, खाना खाने के बाद यह भालू चुपचाप वापस लौट जाते हैं यह किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। अगले दिन फिर दोपहर में यह भालू बाबा की कुटिया में आते हैं, खाना खाने के बाद बाबा इशारा करते हैं और भालू जंगल की तरफ रवाना हो जाते हैं।
आम की जड़ों से बहता ‘चमत्कारी जल’
राजामंडा की सबसे बड़ी विस्मयकारी विशेषता यहाँ के एक विशाल आम के पेड़ के नीचे से निकलने वाली निरंतर जलधारा है, भीषण गर्मी में भी यह स्रोत सूखता नहीं है, जनश्रुति है कि यह केवल पानी नहीं बल्कि ‘अमृत जल’ है, जिसके स्पर्श मात्र से असाध्य चर्म रोग और शारीरिक कष्ट दूर हो जाते हैं, भगवान शिव की अदृश्य उपस्थिति और इस जल के औषधीय गुणों ने इसे श्रद्धालुओं की आस्था का मुख्य केंद्र बना दिया है।
क्या कहते है लोग…
‘यहाँ आने वाले लोग अपने विश्वास के साथ आते हैं। जिसके पास विश्वास है, उसके लिए भगवान हैं। लोग जामवंत जी के दर्शन और मनोकामना पूर्ति की भावना से यहाँ खिंचे चले आते हैं। ‘
बाबा रामदास चिकनिया निवासी संत
‘यह स्थान वर्षों पुराना है, यहाँ कभी राजा-रानी निवास करते थे। उन्हीं के द्वारा यहाँ विभिन्न मूर्तियां स्थापित की गई थीं। आज भी खंडित मूर्तियां उस इतिहास की गवाही देती हैं। ‘
राधेश्याम यादव स्थानीय निवासी
‘मैं पिछले तीन वर्षों से नवरात्रि में यहाँ आ रहा हूँ। मैंने यहाँ मनोकामना ज्योति कलश भी जलाया है। यहाँ शौचालय और सामुदायिक भवन जैसी सुविधाओं की सख्त आवश्यकता है। ‘
सुभाष दीक्षित श्रद्धालु (मरवाही)
‘यह एक अद्भुत और आश्चर्यजनक जगह है। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक वातावरण का वर्णन शब्दों में करना मुश्किल है। ‘
मनोज कुमार पर्यटक


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