- धान कम हुआ, जांच हुईज्फिर सब ठीक हो गया! आखिर किसके च्जादुई पैसोंज् से?
- धान कम,जांच ज्यादा….लेकिन कार्रवाई गायब ! शिवप्रसादनगर में किसका है ‘जादुई संरक्षण’?
- धान खरीदी में करोड़ों का खेल? कमी पकड़ी गई, लेकिन कार्रवाई रास्ते में ही ‘गायब’
- धान माफिया का दबदबा या सिस्टम की मजबूरी? जांच हुई,मगर नतीजा शून्य
- शिवप्रसादनगर धान केंद्र का रहस्यः धान गायब, कार्रवाई भी गायब !
- धान घोटाला, जमीन सौदा और राइस मिल की तैयारी—भैयाथान में किसका खेल?
- ‘सब बिकता है’ की चर्चाः क्या पैसों के दम पर दब गई धान घोटाले की जांच?
- धान घोटाले से राइस मिल तकः शिवप्रसादनगर में बन रहा नया ‘माफिया मॉडल’?
- धान की कमी,7 एकड़ जमीन और राइस मिल—भैयाथान में सवाल ही सवाल
- जांच बाउंड्री तक पहुंची….फिर लौट आई ! शिवप्रसादनगर का रहस्यमय धान मामला
- धान घोटाले पर सन्नाटाः क्या राजनीति और पैसों के बीच दब गई कार्रवाई?

-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर,12 मार्च 2026 (घटती-घटना)। कहते हैं कि पैसा बहुत कुछ कर सकता है,लेकिन क्या पैसा इतना ताकतवर भी हो सकता है कि वह हर जांच को प्रभावित कर दे,हर कार्रवाई को रास्ते में रोक दे और भ्रष्टाचार के आरोपों पर पर्दा डाल दे? सूरजपुर जिले के भैयाथान ब्लॉक के शिवप्रसादनगर धान खरीदी केंद्र को लेकर इन दिनों यही सवाल लोगों की जुबान पर है, स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां एक ऐसा कथित धान माफिया सक्रिय है जिसकी पकड़ इतनी मजबूत बताई जाती है कि जांच कितनी भी बड़ी क्यों न हो,आखिर में सब ‘संतुलित’ हो जाता है। भैयाथान के शिवप्रसादनगर धान खरीदी केंद्र का यह मामला केवल धान की कमी का नहीं है,बल्कि यह सवाल उठाता है कि क्या व्यवस्था इतनी कमजोर हो चुकी है कि पैसा और प्रभाव हर जांच को प्रभावित कर सकता है,यदि इन सवालों का जवाब समय रहते नहीं मिला,तो लोगों का भरोसा व्यवस्था से उठना स्वाभाविक है।
धान की कमी और कार्रवाई का ‘रहस्यमय अंत’
बताया जा रहा है कि इस वर्ष शिवप्रसादनगर धान खरीदी केंद्र में भारी मात्रा में धान की कमी पाई गई,भौतिक सत्यापन हुआ,रिपोर्ट बनी,और कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू हुई,धान खरीदी केंद्र की प्रभारी साधना कुशवाहा को पद से पृथक भी किया गया,यह देखकर लोगों को लगा कि इस बार शायद कार्रवाई सच में आगे बढ़ेगी,लेकिन कुछ ही समय बाद जैसे कोई अदृश्य शक्ति सक्रिय हो गई,फिर से जांच हुई…और मामला वहीं आकर रुक गया जहां से शुरू हुआ था, यानी कि सब कुछ फिर संतुलित हो गया। ग्रामीणों के बीच इस स्थिति को लेकर व्यंग्य में कहा जा रहा है कि कार्रवाई बाउंड्री लाइन तक पहुंची,लेकिन किसी अदृश्य ताकत ने उसे वापस लौटा दिया।
कार्रवाई बाउंड्री तक गई….फिर वापस आ गई…
स्थानीय लोग इस पूरे घटनाक्रम को बड़े व्यंग्यात्मक अंदाज में बताते हैं, उनका कहना है कि इस मामले में कार्रवाई ठीक वैसे ही हुई जैसे क्रिकेट में गेंद बाउंड्री लाइन तक पहुंचकर अचानक रुक जाए,जांच आगे बढ़ती दिखी, कार्रवाई की आहट भी आई,लेकिन फिर मामला वहीं थम गया, लोगों के बीच चर्चा है कि जैसे ही कार्रवाई बाउंड्री के करीब पहुंचती है, कोई अदृश्य ताकत उसे वापस मोड़ देती है।
‘सब बिकता है’ वाली चर्चा
क्षेत्र में चर्चा है कि कथित माफिया खुलेआम यह कहता है कि दुनिया में सब बिकता है, बस खरीदने वाला होना चाहिए,हालांकि इस कथन की आधिकारिक पुष्टि नहीं है,लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जिस तरह से हर जांच के बाद मामला शांत हो जाता है,उससे ऐसी चर्चाओं को और बल मिलता है।
8-9 केंद्रों में धान की कमी,पर कार्रवाई गायब
बताया जा रहा है कि इस साल सूरजपुर जिले के 8 से 9 धान खरीदी केंद्रों में भौतिक सत्यापन के दौरान धान की कमी पाई गई, शुरुआत में कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन धीरे-धीरे मामला शांत होता चला गया,अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि इतनी बड़ी कमी पाई गई थी तो दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
राजनीतिक संरक्षण की चर्चा
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस कथित धान माफिया को दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों से संरक्षण प्राप्त है,यही कारण है कि जब भी मामला सामने आता है,वह किसी न किसी तरह बच निकलता है,ग्रामीणों का कहना है कि यह संरक्षण ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।
जमीन खरीद का नया विवाद
इस पूरे मामले में एक और तथ्य सामने आया है जिसने लोगों को चौंका दिया है,बताया जा रहा है कि धान खरीदी केंद्र से जुड़े लोगों ने कथित माफिया के साथ मिलकर करीब 7 एकड़ जमीन खरीदी है,अब सवाल यह उठ रहा है कि इतनी बड़ी जमीन खरीदने के लिए पैसा कहां से आया।
जेल में बंद व्यक्ति की जमीन का सौदा?
ग्रामीणों के अनुसार यह जमीन ऐसे व्यक्ति की बताई जा रही है जो इस समय जेल में बंद है और जिस पर धोखाधड़ी के आरोप हैं, इतना ही नहीं,बताया जा रहा है कि इस जमीन पर बैंक का कर्ज भी था, अब सवाल यह उठता है कि यदि जमीन बैंक में गिरवी थी तो उसकी बिक्री कैसे हो गई।
राजस्व विभाग पर भी उठे सवाल
इस पूरे मामले में राजस्व विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि यदि जमीन बंधक थी तो उसका पंजीयन कैसे हो गया,लोग पूछ रहे हैं कि कहीं यहां भी पैसे की ताकत तो काम नहीं आई।
भ्रष्टाचार या ‘प्रबंधन कौशल’?
क्षेत्र में लोग व्यंग्य करते हुए कहते हैं कि यह कोई सामान्य व्यक्ति नहीं बल्कि प्रबंधन का उस्ताद है,क्योंकि जिस तरह से हर जांच के बाद मामला शांत हो जाता है, उसे देखकर लोग हैरान हैं।
क्षेत्र के चर्चित ‘बाबा’ का मेला सहयोग? राजनीतिक संरक्षण के आरोप…
शिवप्रसादनगर धान खरीदी केंद्र से जुड़े पूरे प्रकरण में अब एक और नया नाम चर्चा में आ गया है,क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है कि भैयाथान ब्लॉक के एक चर्चित बाबा,जिन्हें लोग लंबे समय से स्थानीय राजनीति और सामाजिक आयोजनों से जुड़े चेहरे के रूप में जानते हैं,इस पूरे मामले में कथित माफिया को बचाने की भूमिका निभा रहे हैं,विशेष सूत्रों का दावा है कि यह बाबा कांग्रेस से जुड़े एक सक्रिय नेता भी बताए जाते हैं और वर्तमान में प्रकाश कोयला खदान क्षेत्र में भी उनकी भूमिका चर्चा में रहती है,अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इस धान खरीदी घोटाले के कथित माफिया को बचाने में उनकी दिलचस्पी क्यों दिखाई दे रही है? सूत्रों के मुताबिक इस बाबा की पहुंच प्रशासनिक हलकों तक भी बताई जा रही है, यहां तक दावा किया जा रहा है कि कलेक्टर कार्यालय तक उनका प्रभाव है और उसी के चलते इस पूरे मामले में कार्रवाई की गति धीमी पड़ जाती है,हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है,लेकिन क्षेत्र में यह चर्चा जरूर है कि जब भी मामला गर्म होता है,कहीं न कहीं से संरक्षण की छाया आ जाती है,अब सवाल यह उठता है कि क्या यह बाबा वास्तव में इस कथित माफिया को राजनीतिक संरक्षण दे रहे हैं,या फिर यह सिर्फ क्षेत्रीय चर्चाओं का हिस्सा है,आने वाला समय ही बताएगा कि इन चर्चाओं में कितनी सच्चाई है,एक और बड़ा सवाल यह भी है कि क्या यह बाबा अपने राजनीतिक भविष्य को दांव पर लगाकर किसी धान माफिया के साथ खड़े हैं,या फिर मामला कुछ और ही है।
माफिया का तैयार होता राइस मिल : विवादित जमीन पर तेजी से निर्माण की तैयारी
इस पूरे मामले में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है,बताया जा रहा है कि कथित माफिया अब एक राइस मिल स्थापित करने की तैयारी में जुटा हुआ है,सूत्रों के अनुसार जिस जमीन को लेकर पहले से विवाद और सवाल उठ रहे हैं,उसी जमीन पर तेजी से मिट्टी पटाई का काम कराया जा रहा है और वहां राइस मिल बनाने की योजना पर काम शुरू कर दिया गया है,स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस जमीन पर यह राइस मिल बनने की तैयारी है,वह जमीन कथित माफिया,धान खरीदी केंद्र की प्रभारी साधना कुशवाहा और उनके सहयोगी रिजवान के नाम बताई जा रही है, अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी तेजी से यह तैयारी कैसे हो रही है और प्रशासन की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ रही, ग्रामीणों के अनुसार यह जमीन उस व्यक्ति से जुड़ी बताई जा रही है जिस पर लोगों को ठगने के गंभीर आरोप हैं और जो इस समय जेल में भी बताया जा रहा है,ऐसे में यह सवाल और गहरा हो जाता है कि आखिर यह जमीन खरीदी गई है या किसी और तरीके से अपने नाम कराई गई है, सूत्रों का यह भी दावा है कि इस राइस मिल परियोजना में सूरजपुर के एक बड़े व्यापारी का पैसा लगने की चर्चा है, बताया जा रहा है कि निवेश व्यापारी करेगा और जमीन माफिया के पास रहेगी, यदि यह सच है तो यह पूरा मामला केवल धान खरीदी घोटाले तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि यह एक बड़े आर्थिक नेटवर्क की तरफ भी इशारा कर सकता है,अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस पूरे मामले की जांच करेगा या फिर यह राइस मिल भी उसी रहस्यमय संरक्षण की छाया में खड़ा हो जाएगा।
जांच की मांग…
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं,लोगों का मानना है कि धान खरीदी व्यवस्था किसानों की मेहनत और सरकारी व्यवस्था से जुड़ा मामला है, इसलिए इसमें पारदर्शिता बेहद जरूरी है।
जवाब मांगते सवाल…इस पूरे मामले ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं…
धान खरीदी केंद्र में पाई गई कमी का अंतिम निष्कर्ष क्या है?
कथित माफिया की आर्थिक ताकत का स्रोत क्या है?
7 एकड़ जमीन खरीदने के लिए पैसा कहां से आया?
बैंक में गिरवी जमीन का सौदा कैसे हो गया?
यदि अनियमितता हुई थी तो दोषियों
पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
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