मंच पर सम्मान,जमीन पर उपेक्षा? बैकुंठपुर में उठा बड़ा सवाल
टूटा नामपट्ट और राजनीतिः तीरथ गुप्ता के सम्मान पर घमासान
एक साल अंधेरे में रहा सम्मान,अब जागी जिम्मेदारी
सजावट में चमका शहर,पर ‘विकास पुरुष’ का बोर्ड भूला प्रशासन
बोर्ड जुड़ा तो खुली राजनीति की परतें, शब्दों में सम्मान या कर्म में?
बैकुंठपुर में नई बहस तीरथ गुप्ता स्मृति कॉम्प्लेक्स का टूटा बोर्ड बना जनचर्चा का केंद्र
सम्मान की मरम्मतः उपाध्यक्ष की पहल से फिर जला स्वाभिमान

-संवाददाता-
बैकुंठपुर,24 फरवरी 2026 (घटती-घटना)। शहर के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष स्वर्गीय तीरथ गुप्ता को बैकुंठपुर की जनता आज भी ‘विकास पुरुष’ के रूप में याद करती है,उनके कार्यकाल में हुए निर्माण कार्यों और शहरी विकास की पहल ने उन्हें एक अलग पहचान दी,इसी योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से नगर परिषद ने उनके नाम पर एक कॉम्प्लेक्स का नामकरण किया था और वहां उनके नाम का बोर्ड भी स्थापित किया गया था। लेकिन समय के साथ वही बोर्ड उपेक्षा का शिकार हो गया, पिछले लगभग एक वर्ष से बोर्ड टूटी अवस्था में पड़ा था,शहर के व्यस्त क्षेत्र में स्थित इस कॉम्प्लेक्स का नामपट्ट खंडित और जर्जर हालत में होने के बावजूद उसकी मरम्मत की ओर ध्यान नहीं दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल एक बोर्ड नहीं,बल्कि शहर की स्मृतियों और सम्मान का प्रतीक है,एक टूटे हुए बोर्ड ने बैकुंठपुर में सम्मान,जिम्मेदारी और राजनीति—तीनों को एक साथ चर्चा में ला दिया है। यह घटनाक्रम याद दिलाता है कि स्मृति चिह्न केवल नामकरण से जीवित नहीं रहते, बल्कि उनकी देखरेख और संवेदनशीलता से उनका सम्मान कायम रहता है, अब शहर में सवाल यही है—क्या यह पहल आगे भी इसी तरह जिम्मेदारी निभाने का संकेत बनेगी, या फिर यह मुद्दा भी कुछ दिनों में राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रह जाएगा?
सजावट दिखी,सम्मान नहीं?
राजनीतिक चर्चा तब तेज हो गई जब हाल ही में प्रदेश नेतृत्व का बैकुंठपुर दौरा हुआ, शहर में चौक-चौराहों की सजावट की गई, सड़कों की साफ-सफाई और रंग-रोगन पर विशेष ध्यान दिया गया। परंतु स्व. तीरथ गुप्ता जी के नाम का टूटा बोर्ड जस का तस बना रहा, आलोचकों का आरोप है कि मंचों से ‘विकास पुरुष’ कहकर तालियां बटोरी जाती हैं,लेकिन उनके नाम से जुड़े स्थायी प्रतीकों के संरक्षण की जिम्मेदारी नहीं निभाई जाती, यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि शहर के एक प्रमुख कॉम्प्लेक्स का नामपट्ट एक साल तक टूटा पड़ा रहे, तो यह प्रशासनिक संवेदनशीलता पर प्रश्नचिन्ह नहीं तो और क्या है?
पहल किसने की?
बैकुण्ठपुर नगर पालिका उपाध्यक्ष आशीष यादव और उनके पार्षदों ने स्वयं आगे आकर इस बोर्ड को पुनः बनवाने और स्थापित करने का निर्णय लिया। उन्होंने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और मरम्मत कार्य पूरा करवाया, उनका कहना है कि यह केवल एक बोर्ड की मरम्मत नहीं,बल्कि स्वर्गीय तीरथ गुप्ता जी के सम्मान की पुनर्स्थापना है, उनके समर्थकों के अनुसार,‘सम्मान भाषणों से नहीं,जिम्मेदारी निभाने से मिलता है। ‘
राजनीतिक संदेश या जनभावना?
इस पूरे घटनाक्रम ने बैकुंठपुर की राजनीति में नया विमर्श खड़ा कर दिया है, एक ओर भाजपा के स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर उपेक्षा का आरोप लगाया जा रहा है,तो दूसरी ओर इसे अनावश्यक राजनीतिक रंग देने का प्रयास भी कहा जा रहा है, कुछ लोगों का मत है कि बोर्ड टूटना एक प्रशासनिक चूक थी, जिसे अब सुधार दिया गया है, वहीं अन्य नागरिक इसे प्रतीकात्मक असंवेदनशीलता मानते हैं,जो बताती है कि स्मारकों और नामकरण के निर्णयों का पालन व्यवहार में कितना हो रहा है।
जनता की प्रतिक्रिया
शहरवासियों का कहना है कि स्वर्गीय तीरथ गुप्ता जी का योगदान किसी एक दल तक सीमित नहीं था, उनके नाम पर बने कॉम्प्लेक्स का सम्मान करना पूरी नगर परिषद और प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है, स्थानीय व्यापारी और नागरिक अब यह अपेक्षा जता रहे हैं कि शहर में अन्य स्मारकों और नामपट्टों की भी नियमित देखरेख हो, ताकि ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
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