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मनेंद्रगढ़ (एमसीबी)@ कठौतिया की ‘सूखी डबरी’ पर सवाल, बिना जल स्रोत बने पर्कोलेशन टैंक में लाखों खर्च,जांच की मांग तेज

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-संवाददाता-
मनेंद्रगढ़ (एमसीबी), 23 फरवरी 2026 (घटती-घटना)। एमसीबी जिले की ग्राम पंचायत कठौतिया में निर्मित एक डबरी (पर्कोलेशन टैंक) को लेकर गंभीर प्रश्न उठ खड़े हुए हैं, जल संरक्षण और भू-जल पुनर्भरण के उद्देश्य से बनाए गए इस ढांचे पर लगभग सात लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च दर्शाई गई है, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि यह संरचना वर्तमान में अनुपयोगी पड़ी है और अपेक्षित लाभ नहीं दे पा रही है।
व्यय विवरण और पारदर्शिता प्राप्त आंकड़ों के अनुसारः
5,32,257 सामग्री मद में व्यय
1,56,831 मजदूरी मद में व्यय

कुल मिलाकर लगभग 6.89 लाख की राशि खर्च दर्शाई गई है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि…माप पुस्तिका की जांच हो
तकनीकी स्वीकृति एवं भुगतान प्रक्रिया की समीक्षा की जाए
कार्यस्थल निरीक्षण की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए
ताकि यह स्पष्ट हो सके कि खर्च की गई राशि निर्धारित मानकों के अनुरूप उपयोग की गई या नहीं।

स्थल चयन पर तकनीकी आपत्ति
ग्रामीणों के अनुसार जिस स्थान पर डबरी का निर्माण किया गया है,वह क्षेत्र पथरीला और अपेक्षाकृत ऊँचाई पर स्थित है। आसपास न तो कोई स्थायी जल स्रोत दिखाई देता है और न ही प्राकृतिक जल प्रवाह की स्पष्ट दिशा, ऐसे में वर्षा जल संचयन की संभावना सीमित बताई जा रही है, विशेषज्ञों का मानना है कि पर्कोलेशन टैंक निर्माण से पूर्व निम्न बिंदुओं का अध्ययन आवश्यक होता हैः स्थल का हाइड्रोलॉजिकल सर्वे, जल प्रवाह का आकलन, मिट्टी की जलधारण क्षमता, भू-जल स्तर का पूर्व परीक्षण, यदि इन पहलुओं की अनदेखी हुई है,तो निर्माण की उपयोगिता पर स्वाभाविक रूप से प्रश्न उठते हैं।
निर्माण पूर्णता पर विवाद
निर्माण स्थल पर लगे सूचना पट्ट के अनुसार कार्य पूर्ण होने की तिथि 05 फरवरी 2026 अंकित बताई गई है। हालांकि, ग्रामीणों का दावा है कि संरचना अधूरी अथवा तकनीकी रूप से अपूर्ण प्रतीत होती है। उनका कहना है कि यदि कार्य पूर्ण घोषित किया गया है, तो उपयोगिता प्रमाणन और गुणवत्ता परीक्षण की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
अपेक्षित लाभ और वर्तमान स्थिति
पर्कोलेशन टैंक से सामान्यतः निम्न लाभ अपेक्षित होते हैं, वर्षा जल संचयन, भू-जल स्तर में सुधार, सिंचाई सुविधा में वृद्धि, मत्स्य पालन जैसी आयवर्धक गतिविधियों की संभावना, लेकिन स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वर्तमान स्थिति में न तो जल संचयन हो रहा है और न ही किसानों को कोई प्रत्यक्ष लाभ मिल पा रहा है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से स्वतंत्र तकनीकी जांच की मांग की है, उनका कहना है कि यदि स्थल चयन या निर्माण में लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित इंजीनियरों, तकनीकी सहायकों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय की जानी चाहिए, जल संरक्षण योजनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं, यदि इन योजनाओं का क्रियान्वयन वैज्ञानिक आधार पर न हो, तो इससे न केवल सरकारी धन का अपव्यय होता है, बल्कि किसानों की अपेक्षाओं को भी ठेस पहुंचती है।
निगाहें प्रशासन पर
कठौतिया की यह डबरी अब जल संचयन से अधिक प्रशासनिक जवाबदेही का विषय बन चुकी है, अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है, क्या तकनीकी जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होगी, या मामला औपचारिक कार्रवाई तक सीमित रह जाएगा? ग्रामीणों की मांग स्पष्ट हैः जल संरक्षण योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।


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