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बैकुंठपुर@ सोनहत-देवगढ़ वन परिक्षेत्र में लकड़ी तस्करी का जाल, बेशकीमती वन संपदा पर संगठित हमला

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-राजन पाण्डेय-
बैकुंठपुर,21 फरवरी 2026(घटती-घटना)।
सोनहत विकासखंड के अंतर्गत आने वाले सोनहत एवं देवगढ़ वन परिक्षेत्र में इन दिनों वन संपदा की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं, सूत्रों के अनुसार क्षेत्र में बेशकीमती इमारती लकडि़यों की अवैध कटाई और तस्करी का संगठित नेटवर्क सक्रिय है, जो जंगलों के अंदरूनी हिस्सों से लकड़ी काटकर रात के अंधेरे में बाहर पार कर रहा है, वन संपदा की इस निरंतर हो रही क्षति से शासन को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है, वहीं पर्यावरणीय संतुलन पर भी खतरा मंडरा रहा है।
झारखंड नंबर ट्रक की जब्ती : एक बड़ी कार्रवाई या सिर्फ एक कड़ी?
तीन दिन पूर्व वन विभाग ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर अवैध लकड़ी से लदे एक झारखंड नंबर के ट्रक को जब्त किया, प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोनहत के बेलिया जंगल में विशेष टीम ने नाकेबंदी की, जांच के दौरान ट्रक से भारी मात्रा में कीमती लकड़ी बरामद हुई, चालक मौके से फरार हो गया, परमिट और टीपी (ट्रांजिट पास) की जांच में पाया गया कि प्राइवेट भूमि के नाम पर सिंगल परमिट बनवाकर उसकी आड़ में लकड़ी का परिवहन किया जा रहा था, बरामद लकड़ी की अनुमानित बाजार कीमत 7 से 8 लाख रुपये बताई जा रही है। ट्रक और लकड़ी को जब्त कर विभागीय डिपो में खड़ा कराया गया है, हालांकि स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि एक ट्रक पकड़ा गया है, तो यह संकेत है कि तस्करी का नेटवर्क व्यापक हो सकता है।
पर्यावरण और वन्यजीवों पर खतरा
लगातार हो रही कटाई और छाल निकासी से जंगलों का घनत्व कम हो सकता है, मिट्टी कटाव की समस्या बढ़ सकती है,वर्षा चक्र और जल स्रोत प्रभावित हो सकते हैं, वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट होने पर वे रिहायशी क्षेत्रों की ओर रुख कर सकते हैं, ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में स्थिति गंभीर रूप ले सकती है।
विभागीय कार्रवाई पर उठते सवाल-
हालिया जब्ती कार्रवाई के बावजूद यह सवाल बना हुआ है कि क्या तस्करी की जड़ तक पहुंचने के प्रयास हो रहे हैं? स्थानीय लोगों की मांग है कि नियमित रात्रिकालीन गश्त बढ़ाई जाए, संयुक्त अभियान चलाकर बड़े नेटवर्क का खुलासा किया जाए, परमिट और ट्रांजिट पास व्यवस्था की सघन जांच हो, दोषी पाए जाने पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
लोध छाल की तस्करीः वर्षों से जारी काला कारोबार
इमारती लकडि़यों के अलावा लोध पेड़ की छाल की तस्करी भी वर्षों से जारी बताई जा रही है,सोनहत से लेकर रामगढ़-छतरंग क्षेत्र तक लोध की छाल बड़े पैमाने पर निकाली जा रही है, ग्रामीणों के अनुसार, तस्कर गांवों में संपर्क बनाकर छाल निकलवाते हैं,स्थानीय स्तर पर कम कीमत पर खरीद कर इसे सूरजपुर और अंबिकापुर जैसे बाजारों में 80-100 रुपये प्रति किलो तक बेचा जाता है,इस छाल का उपयोग अगरबत्ती, साबुन और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं के निर्माण में होता है,वन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पेड़ से अत्यधिक मात्रा में छाल निकाली जाती है, तो पेड़ सूखने लगता है और अंततः नष्ट हो जाता है। इससे जैव विविधता पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।
दुर्गम इलाकों में चल रहा खेल
जानकारी के मुताबिक देवगढ़ परिक्षेत्र के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में गश्त की कमी का लाभ उठाकर तस्कर सक्रिय हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जंगल के भीतर बड़े पैमाने पर इमारती लकडि़यों की कटाई हो रही है,लेकिन कार्रवाई छिटपुट ही नजर आती है, कुछ सूत्रों का यह भी दावा है कि इस अवैध कारोबार में अंदरखाने एक संगठित तंत्र काम कर रहा है, जो परमिट व्यवस्था की खामियों और सीमित निगरानी का फायदा उठा रहा है,हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
प्रशासन से अपेक्षा
वन संपदा केवल राजस्व का स्रोत नहीं,बल्कि पर्यावरण,जल संरक्षण और जैव विविधता का आधार है, सोनहत-देवगढ़ क्षेत्र की वर्तमान स्थिति यह संकेत दे रही है कि निगरानी तंत्र को और सशक्त बनाने की आवश्यकता है,अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वन विभाग और जिला प्रशासन इस मामले में कितनी व्यापक और निर्णायक कार्रवाई करते हैं,ताकि जंगलों की हरियाली और प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके।


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