- कुर्सी बदली,मुस्कान वही…सोनहत की कथा में दिखा राजनीति का फ्रेम…
- शिवमहापुराण कथा में सत्ता का संगम…एक तस्वीर और कई संकेत
- भक्ति के मंच पर राजनीति की झलक,
- सोशल मीडिया पर छाया ‘पद का फर्क’
- आज की मंत्री,कल की मंत्री…सोनहत की तस्वीर बनी चर्चा का विषय
- कथा से ज्यादा तस्वीर की चर्चा, राजनीति के उतार-चढ़ाव का आईना
- राजनीति का चक्र और कथा का मंच-कुर्सियां बदलीं,कैमरा वही रहा
- फ्रेम में भक्ति कम,राजनीति ज्यादा सोनहत की तस्वीर वायरल
- कल की कमान,आज की जिम्मेदारी…एक तस्वीर में दो दौर
- कथा सुनने पहुंचे नेता,चर्चा में आ गई कुर्सी की कहानी
- सत्ता की सीढि़यां और मुस्कान की तस्वीर—सोनहत बना सियासी मंच
- राजनीति का ‘पहले और अब’ – कथा स्थल से निकली बड़ी तस्वीर
कोरिया/सोनहत,12 फरवरी 2026 (घटती-घटना)।कोरिया जिले के सोनहत में आयोजित शिवमहापुराण कथा कार्यक्रम की एक तस्वीर इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है,यह तस्वीर इसलिए खास मानी जा रही है क्योंकि इसमें महिला एवं बाल विकास विभाग की पूर्व और वर्तमान मंत्री एक ही मंच पर दिखाई दे रही हैं,धार्मिक आयोजन के बीच यह राजनीतिक उपस्थिति लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई और सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो गई।
बताया जा रहा है कि सोनहत में चल रही शिवमहापुराण कथा के दौरान कार्यक्रम की गरिमा उस समय और बढ़ गई जब प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े कथा स्थल पहुंचीं, उनके आगमन पर आयोजकों और श्रद्धालुओं ने स्वागत किया। कथा स्थल पर मौजूद जनप्रतिनिधियों और नेताओं की मौजूदगी ने कार्यक्रम को धार्मिक के साथ-साथ राजनीतिक दृष्टि से भी चर्चा में ला दिया। धार्मिक आयोजनों में भक्ति, भजन और प्रवचन की चर्चा होना आम बात है, लेकिन सोनहत में आयोजित शिवमहापुराण कथा इस बार एक तस्वीर की वजह से ज्यादा चर्चित हो गई, मंच वही था, कथा वही थी, श्रोताओं की भीड़ भी वैसी ही… बस फर्क इतना था कि फ्रेम में राजनीति के ‘कल’ और ‘आज’ एक साथ नजर आ गए, कहते हैं राजनीति में कोई भी तस्वीर सिर्फ तस्वीर नहीं होती, वह संदेश भी होती है। कथा स्थल पर जब प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े पहुंचीं, तो कार्यक्रम की गरिमा बढ़ना स्वाभाविक था। लेकिन चर्चा तब और तेज हो गई जब उसी मंच पर पूर्व मंत्री रेणुका सिंह भी दिखाई दीं, फिर क्या था — सोशल मीडिया ने इसे भक्ति से ज्यादा राजनीति के चश्मे से देखना शुरू कर दिया।
कुर्सी का चक्र और राजनीति का कैलेंडर- राजनीति का कैलेंडर बड़ा दिलचस्प होता है। कभी मंत्री का बोर्ड गाड़ी के आगे लगता है,कभी विधायक का। कभी दिल्ली की गलियों में पहचान बनती है, तो कभी क्षेत्रीय मंचों पर फिर से जनता के बीच मुस्कुराना पड़ता है,रेणुका सिंह का सफर भी कुछ ऐसा ही रहा — राज्य की मंत्री,फिर संसद की सदस्य, केंद्रीय राज्यमंत्री और अब फिर विधानसभा की राजनीति। राजनीति में यह उतार-चढ़ाव नया नहीं, लेकिन एक ही फ्रेम में ‘पूर्व’ और ‘वर्तमान’ दिख जाएं तो व्याख्याएं अपने-आप जन्म ले लेती हैं।
तस्वीर की भाषा और राजनीतिक संकेत- तस्वीर में मुस्कानें बराबर थीं, लेकिन पद अलग-अलग दौर के थे। कुछ लोग इसे अनुभव और नए नेतृत्व का संगम बता रहे हैं, तो कुछ इसे सत्ता की अस्थायी प्रकृति का उदाहरण मान रहे हैं,राजनीतिक गलियारों में हल्की-फुल्की टिप्पणी भी सुनाई दी — ‘राजनीति में फोटो वही रहती है,बस नाम के आगे लिखा पद बदलता रहता है।’ धार्मिक मंच पर यह दृश्य उस सच्चाई की याद दिलाता है कि राजनीति में स्थायी कुछ नहीं होता। आज जो ‘माननीय मंत्री’ है, वह कल ‘पूर्व मंत्री’ भी हो सकता है… और राजनीति का पहिया फिर घूम जाए तो कहानी उलटी भी हो सकती है।
भक्ति और रणनीति का संगम? धार्मिक आयोजनों में नेताओं की मौजूदगी नई बात नहीं है। जनता के बीच बने रहने का यह एक सहज मंच भी होता है। लेकिन जब दो पीढि़यों का नेतृत्व एक साथ दिख जाए, तो सवाल भी उठते हैं — क्या यह सिर्फ श्रद्धा थी या राजनीतिक संकेतों का शांत संदेश? विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे मंचों पर मुस्कुराहटें अक्सर भविष्य की संभावनाओं की झलक भी होती हैं। हालांकि,यह भी सच है कि हर मुलाकात को राजनीति का चश्मा पहनाकर देखना जरूरी नहीं।
राजनीति का सच : पद बदलता है,पहचान नहीं
लोकतंत्र में कुर्सी स्थायी नहीं होती, लेकिन सक्रियता ही नेता की पहचान बनाती है। सोनहत की यह तस्वीर शायद उसी सच्चाई का प्रतीक बन गई है — जहां एक तरफ वर्तमान जिम्मेदारी है, तो दूसरी तरफ अनुभव का लंबा सफर, राजनीति में उत्थान और पदावनती को लेकर जितनी बातें होती हैं, उतना ही यह भी याद रखना जरूरी है कि लोकतंत्र में हर दौर अस्थायी है और हर तस्वीर इतिहास का एक छोटा सा पन्ना।
आखिरी लाइन (कॉलम का तंज)
कथा में शिवपुराण की कहानी चल रही थी, लेकिन मंच पर खड़ी तस्वीर ने राजनीति का पुराण भी याद दिला दिया—यहां कुर्सियां बदलती रहती हैं,बस कैमरे की फ्लैश और मुस्कानें हमेशा एक जैसी रहती हैं।
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