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कोरिया/सोनहत@ सती त्याग के प्रसंग से नम हुईं आँखें

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शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन मिनी स्टेडियम में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजा सोनहत, सती दाह प्रसंग ने भाव-विभोर किए श्रद्धालु
संशय छोड़ो, श्रद्धा अपनाओ — आचार्य विनय कांत त्रिपाठी की वाणी से सराबोर हुआ मिनी स्टेडियम
शिव कथा में डूबा सोनहत, सती त्याग की कथा सुनकर भावुक हुआ जनसमूह
शिव-पार्वती की झांकी पर पुष्प वर्षा, तीसरे दिन भक्ति में सराबोर हुआ पूरा पंडाल
श्रद्धा में संदेह का स्थान नहीं — शिव महापुराण कथा में उमड़ी आस्था की अविरल धारा
कोरिया/सोनहत,11 फरवरी 2026 (घटती-घटना)।
स्थानीय मिनी स्टेडियम में आयोजित भव्य शिव महापुराण कथा का तीसरा दिन श्रद्धा, भावनाओं और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा,जैसे ही विख्यात कथावाचक आचार्य विनय कांत त्रिपाठी ने माता सती के त्याग और भगवान शिव की महिमा का वर्णन किया,पूरा पंडाल भक्ति के रंग में रंग गया,हजारों श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंचे और हर-हर महादेव के जयघोष से वातावरण गूंजता रहा,कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीमती रेणुका सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं,उन्होंने व्यासपीठ का पूजन कर क्षेत्र की खुशहाली और समृद्धि की कामना की तथा श्रद्धालुओं के बीच बैठकर कथा का श्रवण किया। माता सती के प्रसंग ने किया भावुक,नम हुईं आँखें- तीसरे दिन की कथा का मुख्य केंद्र माता सती का त्याग और भगवान शिव के प्रति उनका अटूट समर्पण रहा। आचार्य विनय कांत त्रिपाठी ने बताया कि संशय किस तरह भक्ति को कमजोर कर देता है, उन्होंने विस्तार से समझाया कि माता सती द्वारा भगवान श्रीराम की परीक्षा लेने का प्रसंग केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन का संदेश है-जहां संदेह आता है,वहां दुख और विछोह निश्चित होता है,कथा के दौरान कई श्रद्धालु भावुक होकर आँसू पोंछते नजर आए। पंडाल में ऐसा आध्यात्मिक माहौल बना कि लोग मंत्रमुग्ध होकर कथा सुनते रहे।
अहंकार भक्ति का सबसे बड़ा शत्रु” — आचार्य की सीख- कथावाचक ने नारद मोह का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब ज्ञान और तपस्या पर अहंकार हावी हो जाता है, तो ईश्वर स्वयं माया के माध्यम से उसे तोड़ देते हैं, उन्होंने कहा कि भगवान शिव को पाने के लिए भक्ति में सरलता और समर्पण जरूरी है, उन्होंने भगवान शिव के लिंग स्वरूप के प्राकट्य और ब्रह्मा-विष्णु को दिए गए दायित्वों का भी वर्णन किया, जिससे श्रोता गहरे आध्यात्मिक चिंतन में डूब गए।
श्रद्धा में संदेह का स्थान नहीं- आचार्य विनय कांत त्रिपाठी ने कहा, “श्रद्धा का मार्ग विश्वास का मार्ग है। जहां संशय होता है, वहां पतन तय है।” दक्ष प्रजापति के यज्ञ और सती दाह के प्रसंग पर कथा जब चरम पर पहुंची, तो पूरा पंडाल शांत और भावनाओं से भरा दिखाई दिया। श्रद्धालुओं ने ध्यानपूर्वक कथा सुनी और कई लोग ध्यानमग्न होकर भगवान शिव का स्मरण करते नजर आए।

शिव-पार्वती की झांकी ने बदला माहौल- कथा के दौरान प्रस्तुत भगवान शिव और माता पार्वती की सजीव झांकी ने पूरे आयोजन को उत्सव में बदल दिया, कलाकारों द्वारा प्रस्तुत यह झांकी इतनी आकर्षक रही कि पंडाल में बैठे श्रद्धालु कैलाश धाम का अनुभव करने लगे, जैसे ही झांकी मंच पर आई, विधायक रेणुका सिंह सहित आयोजन समिति और भक्तों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया, भजनों की मधुर धुन और जयघोषों के बीच पूरा मिनी स्टेडियम आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।
विधायक रेणुका सिंह की सादगीपूर्ण उपस्थिति- कार्यक्रम में पहुंचीं विधायक रेणुका सिंह ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजनों से समाज में सकारात्मकता और भाईचारे की भावना मजबूत होती है, उन्होंने आम श्रद्धालुओं के बीच बैठकर कथा सुनी और आचार्य जी से आशीर्वाद प्राप्त किया, उनकी सादगीपूर्ण उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया।
मिनी स्टेडियम छोटा पड़ा, ग्रामीण क्षेत्रों से उमड़ी भीड़- तीसरे दिन कथा श्रवण के लिए आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे, मिनी स्टेडियम का विशाल मैदान भी श्रद्धालुओं की भीड़ के आगे छोटा नजर आने लगा, आयोजन समिति द्वारा बैठने, शीतल जल और सुगम दर्शन की बेहतर व्यवस्था की गई थी, जिससे श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो।
भंडारे में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़- कथा के समापन के बाद आयोजित भंडारे में भी भारी संख्या में लोग पहुंचे। भक्तजन प्रसाद ग्रहण करते हुए भजनों पर झूमते नजर आए। पूरा वातावरण “हर-हर महादेव” के उद्घोष से गूंजता रहा और आध्यात्मिक उत्साह देर शाम तक बना रहा।


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