सूरजपुर 11 फरवरी 2026 (घटती-घटना)। परीक्षा के बढ़ते दबाव और विद्यार्थियों में तनाव को देखते हुए शिक्षा जगत से सकारात्मक संदेश सामने आया है, सीबीएसई सिटी कोऑर्डिनेटर एवं साधु राम विद्या मंदिर के प्राचार्य प्राभाकर उपाध्याय ने कहा है कि परीक्षाएँ जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं, बल्कि सीखने और स्वयं को बेहतर बनाने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। उन्होंने विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों से अपील की कि परीक्षा को बोझ नहीं, बल्कि अवसर के रूप में देखें। उन्होंने बताया कि आज की प्रतिस्पर्धात्मक दुनिया में केवल अंक ही सफलता की गारंटी नहीं हैं, संचार कौशल, रचनात्मक सोच, नेतृत्व क्षमता, समस्या समाधान और तकनीकी दक्षता जैसे जीवन कौशल विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करते हैं। नई शिक्षा नीति और सीबीएसई की मूल्यांकन प्रणाली भी अब रटने की प्रवृत्ति से आगे बढ़कर अनुभवात्मक शिक्षण और व्यावहारिक ज्ञान पर जोर दे रही है, प्राभाकर उपाध्याय ने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों की तुलना दूसरों से न करें और उन पर अधिक अंक लाने का दबाव न बनाएं।
सकारात्मक माहौल, प्रोत्साहन और बच्चों की रुचियों को समझना उनकी सफलता के लिए जरूरी है। वहीं विद्यालयों को भी परीक्षा परिणाम के साथ-साथ विद्यार्थियों के समग्र विकास, खेल, योग और सह-पाठयक्रम गतिविधियों पर ध्यान देने की जरूरत बताई, उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में मोबाइल और सोशल मीडिया का सीमित व उद्देश्यपूर्ण उपयोग जरूरी है, खासकर परीक्षा के दौरान, संतुलित दिनचर्या, पर्याप्त नींद, पौष्टिक आहार और नियमित अध्ययन से विद्यार्थी तनावमुक्त रह सकते हैं, अंत में उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता केवल अंकों से तय नहीं होती, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन, समय प्रबंधन और निरंतर सीखने की आदत ही असली सफलता की कुंजी है, उन्होंने संदेश दिया कि परीक्षा को डर नहीं, बल्कि आत्ममूल्यांकन और आगे बढ़ने के अवसर के रूप में स्वीकार करना चाहिए।
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