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कोरिया@सीएम के रास्ते साफ,पर शिकायतों पर ताला,बैकुंठपुर में अतिक्रमण हटाओ अभियान या दिखाओ अभियान?

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  • जनदर्शन में सुनवाई, ज़मीन पर चुप्पी — पुराने बस स्टैंड का अतिक्रमण बना प्रशासन की परीक्षा
  • जहां वीआईपी नजर, वहां बुलडोज़र तेज ज्बाकी जगह नियम भी धूप में सूखते?
  • जनदर्शन या मुखदर्शन? खबरें छपीं, आवेदन हुए, फिर भी अतिक्रमण जस का तस
  • चौड़ीकरण के नाम पर चयनात्मक कार्रवाई — बैकुंठपुर में नियमों की नई परिभाषा
  • बुलडोज़र का जीपीएस ऑन: सीएम मार्ग चमका, बस स्टैंड फिर भी बचा!
  • फल धूप में सूखे या नियम? अतिक्रमण पर प्रशासन की मीठी चुप्पी
  • आवेदन ढेर, कार्रवाई शून्य — जनदर्शन बना सिर्फ फोटो सेशन?


-रवि सिंह-
कोरिया,10 फरवरी 2026(घटती-घटना)।
मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे से पहले बैकुंठपुर शहर में अतिक्रमण हटाने की ऐसी तेज़ रफ्तार देखने को मिली, मानो वर्षों से सोई हुई व्यवस्था अचानक अलार्म बजते ही जाग गई हो, घड़ी चौक से लेकर खरबत चौक तक फुटपाथ, छोटे ठेले, बोर्ड और अस्थायी ढांचे हटाकर सड़क को चमका दिया गया, ताकि वीआईपी काफिले को कहीं असुविधा न हो, लेकिन इसी चमक के बीच पुराने बस स्टैंड का वह अतिक्रमण आज भी जस का तस खड़ा है, जिस पर वर्षों से शिकायतें हो रही हैं, खबरें छप रही हैं और जनदर्शन में आवेदन दिए जा रहे हैं, सवाल उठ रहा है कि आखिर यह कार्रवाई नियमों के तहत हो रही है या फिर “जहां कैमरा, वहां कार्रवाई” वाला फार्मूला लागू है।
खबर छपी, जनदर्शन हुआज् लेकिन जमीन पर वही पुराना दृश्य- पूर्व में प्रकाशित खबर में पुराने बस स्टैंड की जमीन पर किए गए अतिक्रमण को विस्तार से उजागर किया गया था, शिकायतकर्ता ने जनदर्शन में आवेदन देकर उम्मीद जताई थी कि अब शायद प्रशासन जागेगा और सार्वजनिक गैलरी आम लोगों के लिए खुल सकेगी। जनदर्शन में सुनवाई भी हुई, आश्वासन भी मिला, लेकिन महीनों बाद भी न तो गैलरी खाली हुई और न ही अतिक्रमण हटाने की कोई ठोस कार्रवाई नजर आई, अब स्थानीय लोग तंज कसते हुए कहते हैं कि जनदर्शन शायद समस्या सुनने का मंच कम और “मुखदर्शन” का कार्यक्रम ज्यादा बन गया है — जहां जनता अपनी समस्या सुनाती है और फाइलें सुनकर सो जाती हैं।
पुलिस बल की कमी या इच्छाशक्ति की?- जनदर्शन के दौरान प्रशासन की ओर से यह तर्क दिया गया कि अतिक्रमण हटाने के लिए पुलिस बल उपलब्ध नहीं है। लेकिन यही शहर तब चौंक गया जब मुख्यमंत्री के आगमन की खबर मिलते ही उसी प्रशासन को अचानक पर्याप्त पुलिस बल भी मिल गया और बुलडोज़र भी, स्थानीय नागरिकों का सवाल सीधा है, क्या पुलिस बल भी वीआईपी कैलेंडर देखकर ही उपलब्ध होता है?
फल धूप में सूखते हैं या नियम?– नगर पालिका का तर्क है कि फल व्यवसायियों का माल धूप में खराब हो जाता है, इसलिए उन्हें दुकान के बाहर रखने की अनुमति दी गई है, लेकिन शिकायतकर्ताओं का कहना है कि अनुमति के नाम पर पूरी 12 फीट की गैलरी ही कब्जे में ले ली गई है। पैदल चलने के लिए छोड़ी गई जगह अब फल के क्रेट, तिरपाल और अस्थायी ढांचों से भरी पड़ी है, व्यंग्य करते हुए स्थानीय लोग कहते हैं कि बैकुंठपुर में अब नया नियम बन गया है —”जहां धूप ज्यादा पड़े, वहां अतिक्रमण वैध।”
आप भी बाहर निकाल लो” — नियमों का नया सिद्धांत?- शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जब उन्होंने नगर पालिका से कार्रवाई की मांग की तो जवाब मिला — “आप भी बाहर निकाल लो”। यह कथन अपने आप में व्यवस्था की मानसिकता को उजागर करता है, अगर हर व्यक्ति को अतिक्रमण की खुली छूट दे दी जाए, तो फिर कानून की किताबों को संग्रहालय में रख देना ही बेहतर होगा।
सीएम का रास्ता और भाजपा कार्यालय के सामने सवाल- मुख्यमंत्री जिस मार्ग से गुजरेंगे, वहां भाजपा कार्यालय के सामने निर्माण सामग्री सड़क किनारे रखे जाने की चर्चा भी जोरों पर है। छोटे दुकानदारों के तिरपाल हटाने में जिस तेजी से कार्रवाई हुई, वही तेजी यहां क्यों नहीं दिख रही — यह सवाल शहर की चाय दुकानों से लेकर सोशल मीडिया तक गूंज रहा है, कुछ लोग तंज कसते हैं —”बुलडोज़र भी शायद जीपीएस से चलता है, जहां आदेश मिले वहीं रुक जाता है।”
सड़क चौड़ीकरण या चयनात्मक सफाई?- शहर में प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण को लेकर प्रशासन पहले से तैयारी कर रहा था। लेकिन मुख्यमंत्री के दौरे ने इस तैयारी को अचानक मिशन मोड में बदल दिया, छोटे व्यवसायियों का दर्द यह है बता कि सालों से बैठकर रोजी-रोटी कमाने वाले लोगों को एक झटके में हटा दिया गया, जबकि प्रभावशाली जगहों पर बने अतिक्रमण पर फाइलों की धूल अभी भी मोटी होती जा रही है।
जनदर्शन पर उठता भरोसे का संकट- जनदर्शन को आम जनता की समस्याओं के समाधान का मंच बताया जाता है, लेकिन पुराने बस स्टैंड का मामला अब इस मंच की प्रभावशीलता पर सवाल बन गया है, कई बार शिकायत, कई बार खबर और कई बार आश्वासन — लेकिन परिणाम शून्य, लोग अब कहने लगे हैं कि जनदर्शन में समाधान कम और फोटो ज्यादा मिलते हैं।
स्थानीय जनता की मांग और प्रशासन के लिए आईना- स्थानीय नागरिकों की मांग है कि सभी अतिक्रमणों पर समान नियम लागू हों, सार्वजनिक गैलरी और रास्ते आम लोगों के लिए मुक्त किए जाएं, जनदर्शन में दिए गए आवेदनों पर समयबद्ध कार्रवाई हो, और वीआईपी दौरे से पहले नहीं, बल्कि पूरे साल नियमों का पालन कराया जाए।
दिखावे की सफाई या व्यवस्था की सच्चाई?– बैकुंठपुर में चल रही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या प्रशासन का बुलडोज़र सिर्फ वीआईपी नजरों के लिए चलता है, या फिर यह शहर की स्थायी व्यवस्था सुधारने का प्रयास है, अभी हालात यह हैं कि मुख्यमंत्री के स्वागत में सड़कें जरूर चमक रही हैं, लेकिन जनदर्शन में की गई शिकायतों की फाइलें शायद अभी भी किसी अलमारी में धूप सेंक रही हैं, और शहर पूछ रहा है — “क्या अतिक्रमण हटाने की असली परीक्षा मुख्यमंत्री के जाने के बाद शुरू होगी, या फिर सब कुछ फिर से ‘जैसा था वैसा’ हो जाएगा?”


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