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अम्बिकापुर@राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का सरगुजा दौरा,जनजातीय गौरव और इतिहास का समागम

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-संवाददाता-
अम्बिकापुर,18 नवम्बर 2025 (घटती-घटना)। सरगुजा अंचल के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण है। 20 नवंबर 2025 को भारत की पहली जनजातीय महिला राष्ट्रपति, महामहिम द्रौपदी मुर्मू,जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर सरगुजा का दौरा करने जा रही हैं। उनके इस दौरे को लेकर पूरे क्षेत्र में जबरदस्त उत्साह और गर्व का माहौल है, क्योंकि यह अवसर सरगुजा के जनजातीय समुदाय के लिए गौरव और सम्मान का प्रतीक है। राष्ट्रपति के आगमन से ठीक दो दिन पहले, सुरक्षा व्यवस्था के तहत 1700 से अधिक सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जा चुकी है। राष्ट्रपति के आगमन के दौरान सुरक्षा को लेकर विशेष उपाय किए गए हैं। एसपीजी (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप) की टीम हर कदम पर निगरानी रख रही है। गांधी स्टेडियम में हेलीपैड का निर्माण पहले ही पूरा कर लिया गया है, और पीजी कॉलेज ग्राउंड में मुख्य कार्यक्रम का आयोजन होगा। जहां राष्ट्रपति मुर्मू जनजातीय नृत्य प्रतियोगिता में विजेता टीम को पुरस्कृत करेंगी। इसके साथ ही, राज्य सरकार की दो महत्वपूर्ण योजनाओं का शुभारंभ भी राष्ट्रपति के हाथों होना है—मुख्यमंत्री अखरा विकास योजना और मुख्यमंत्री गुनिया बैगा सम्मान निधि। ये योजनाएं जनजातीय समुदाय के लिए खासतौर पर महत्त्वपूर्ण साबित होने वाली हैं। स्थानीय पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां भी कार्यक्रम स्थल पर तैनात की गई हैं, जिससे कि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटा जा सके। हेलीकॉप्टर के आगमन से लेकर राष्ट्रपति के कार्यक्रम स्थल तक के मार्ग को पूरी तरह से सील कर दिया जाएगा, और चारों ओर से निगरानी की जाएगी। इस आयोजन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, राज्यपाल रामेन डेका, और अन्य मंत्रीगण, सांसद, विधायक और प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल होंगे। सरगुजा अंचल का जनजातीय इतिहास बहुत समृद्ध और गौरवमयी है। 1952 में भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने पंडों जनजाति के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक स्थिति का प्रत्यक्ष अवलोकन किया था, और पंडों नगर पहुंचे थे। उनकी इस यात्रा की स्मृति में आज भी पंडों नगर में भारत का इकलौता ग्रामीण राष्ट्रपति भवन स्मारक मौजूद है, जो सरगुजा के जनजातीय गौरव का प्रतीक माने जाते हैं। यह स्थल आज भी जनजातीय समुदाय के सम्मान और गौरव का महत्वपूर्ण केंद्र है। अब 73 वर्षों के बाद, 20 नवंबर को एक बार फिर राष्ट्रपति मुर्मू इस ऐतिहासिक सरगुजा अंचल में आ रही हैं। उनका आगमन जनजातीय समुदाय के लिए एक और ऐतिहासिक पल होगा, क्योंकि वे अपने इतिहास और संस्कृति की नई पहचान के रूप में इसे देख रहे हैं। इस बार, सरगुजा का जनजातीय समाज अपने गौरव और सम्मान को एक नई ऊंचाई पर पहुंचते हुए देखेगा। राष्ट्रपति मुर्मू के आगमन से एक दिन पहले, 19 नवंबर को एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन भी किया जाएगा, जिसका विषय होगा ‘स्वतंत्रता संग्राम में जनजातियों की भूमिका ‘। इस संगोष्ठी में सरगुजा के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने वाले जनजातीय नायकों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। साहित्यकार अजय कुमार चतुर्वेदी, जिन्होंने सरगुजा के 40 विस्मृत स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के जीवन-वृत्त पर एक पुस्तक लिखी है, इस संगोष्ठी में विशेष प्रस्तुति देंगे। उनका व्याख्यान इस तथ्य को उजागर करेगा कि कैसे जनजातियों ने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया और किस प्रकार उनका योगदान आज तक उपेक्षित रहा है।
जनजातीय गौरव का प्रतीक सरगुजा : सरगुजा अंचल ने जनजातीय समाज के कई महान और प्रेरणादायी व्यक्तित्वों को जन्म दिया है। इनमें पद्मश्री माता राजमोहनी देवी, गहिरा गुरु, और जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी माझी राम गोंड, महली भगत, और राजनाथ भगत जैसे महान नेता शामिल हैं। इन नेताओं ने अपने संघर्ष और नेतृत्व से सरगुजा की पहचान को राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित किया। सरगुजा का पंडों नगर भी इस दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह स्थल न केवल इतिहास का गवाह है, बल्कि आज भी जनजातीय गौरव का जीवंत प्रतीक है।
नई पहचान का सूर्योदय
राष्ट्रपति मुर्मू का यह दौरा सरगुजा के लिए एक नई पहचान और ऊर्जा का प्रतीक बनेगा। स्थानीय जनजातीय समुदाय इस अवसर को अपने इतिहास, सम्मान और पहचान से जुड़ा एक नया अध्याय मान रहा है। बुजुर्गों का मानना है कि जिस तरह 1952 में सरगुजा ने राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाई थी, उसी तरह 2025 का यह अवसर भी जनजातीय समाज के लिए एक नई ऊर्जा और एक नई दिशा का प्रतीक बनेगा। इस ऐतिहासिक अवसर को लेकर सरगुजा अंचल में उत्साह और गर्व का माहौल है, और यह आयोजन न केवल सरगुजा, बल्कि पूरे राज्य और देश के लिए जनजातीय गौरव का उत्सव बन चुका है।


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