रायपुर,17 नवम्बर 2025। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने ईडी से पूछा कि ऐसी कौन-सी जांच बची है जो अभी तक पूरी नहीं की जा सकी। कोर्ट ने कहा, एक तरफ कहते हो कि शराब घोटाले के आरोपियों को बेल नहीं देनी है, दूसरी तरफ कहते हो कि हम जांच कर रहे हैं। तो ऐसी कौन-सी जांच है जो अभी तक चल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को निर्देश दिया है कि जांच अधिकारी अपना पर्सनल एफिडेविड दाखिल करें, जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि पूर्व मंत्री कवासी लखमा के खिलाफ अभी कौन-सी जांच चल रही है। इस जांच को पूरा करने के लिए कितने समय की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर को तय की है। बता दें कि ईडी ने लखमा को 15 जनवरी को गिरफ्तार किया था। इसके साथ ही शराब घोटाले के केस में ईओडब्ल्यू ने भी केस दर्ज किया है, जिसकी जांच के बाद चार्जशीट पेश किया गया है। इस मामले में भी ईओडब्ल्यू ने गिरफ्तार किया है। वहीं,सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले मामले में आबकारी विभाग के अधिकारियों को पहले दी गई अंतरिम गिरफ्तारी सुरक्षा को स्थायी कर दिया। कोर्ट ने यह आदेश उन मामलों की सुनवाई के दौरान दिया, जिनमें अधिकारियों पर मनी लॉन्डि्रंग और भ्रष्टाचार के आरोप हैं। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की पीठ ने यह फैसला सीनियर एडवोकेट एस. नागमुथु और सिद्धार्थ अग्रवाल (याचिकाकर्ताओं की ओर से) और सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी और एएसजी एस.डी. संजय (राज्य और ईडी की ओर से) की दलीलें सुनने के बाद सुनाया। ईडी का आरोप है कि पूर्व मंत्री और मौजूदा विधायक कवासी लखमा सिंडिकेट के अहम हिस्सा थे। लखमा के निर्देश पर ही सिंडिकेट काम करता था। इनसे शराब सिंडिकेट को मदद मिलती थी। वहीं,शराब नीति बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई,जिससे छत्तीसगढ़ में एफएल-10 लाइसेंस की शुरुआत हुई। ईडी का दावा है कि लखमा को आबकारी विभाग में हो रही गड़बडि़यों की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने उसे रोकने के लिए कुछ नहीं किया।
सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों
की सुरक्षा स्थायी की
वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले मामले में आबकारी विभाग के अधिकारियों को पहले दी गई अंतरिम गिरफ्तारी सुरक्षा को स्थायी कर दिया। कोर्ट ने यह आदेश उन मामलों की सुनवाई के दौरान दिया, जिनमें अधिकारियों पर मनी लॉन्डि्रंग और भ्रष्टाचार के आरोप हैं। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की पीठ ने यह फैसला सीनियर एडवोकेट एस. नागमुथु और सिद्धार्थ अग्रवाल (याचिकाकर्ताओं की ओर से) और सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी और एएसजी एस.डी. संजय (राज्य और ईडी की ओर से) की दलीलें सुनने के बाद सुनाया।
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