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कविता@बढ़ती जनसंख्या…

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जनसंख्या में देश हमारा,विश्व में अव्वल होगा
हम दो हमारे दो से इस समस्या का हल होगा
बेटा-बेटी दोनों को समान शिक्षा व अधिकार दो
हर परिवार का हो एक ही नारा हम दो हमारे दो
बेटा की चाहत में अपने परिवार को ना बढ़ने दो
शिक्षा,और संस्कार के लिए
बच्चों को खूब पढ़ने दो
भुखमरी और बेरोजगारी से
लोगों की जान बचायेंगे
छोटा परिवार के नारे को सच कर हम दिखायेंगे
छोटा सा परिवार हमारा,
खुशियाँ का आधार हैं !
मिल जुल कर हम रहते है यही हमारा प्यार है
शिक्षा-दीक्षा देकर बच्चों को काबिल हम बनायेंगे
अशिक्षा को दूर भगाकर,शिक्षा की अलख जगायेंगे
बेटा-बेटी दोनों अच्छा उसमें ना तुम भेद करो
बेटियाँ,बेटों से कम नहीं यह सच स्वीकार करो


प्रीतम साहू
लिमतरा,धमतरी
छत्तीसगढ़


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