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कविता @मीडिया वालों को मैने देखा है…

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मीडिया वालों को लहंगा उठाकर नाचते हुए
तो किसी को घाघरा पहनकर
ठुमका लगाते हुए सत्ता के दरबारों में
शासन की नजरिया को पेश करते हुए
आगे-आगे चलकर
अपने ही बिरादरी वालों से रेस करते हुए
कोई इशारों ही इशारों में नाच रहा है
तो कोई उनकी भाव को बढ़-चढ़के बाँच रहा है
कोई मदमस्त होकर झूम रहा है
तो कोई लेटकर चरण को चूम रहा है
कोई सत्यवादी का मुखौटा और मेकअप लगा के घूम रहा है
तो कोई खुद को रेटिंग देते हिला दुम रहा है
वह देश का चतुर्थ स्तंभ है
तथा जनता-जनार्दन की बोली
सत्यता का पक्ष लेने के बजाय
अशर्फियों में भर रहे भयंकर झोली
जनता भी क्या करेगी? देख रही मनोरंजन की तरह
अब देश बचे,चाहे बिके यह धरा।।


चंद्रकांत खूंटे
जांजगीर चाम्पा,छत्तीसगढ़


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