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@कविता @मदिरापान…

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एक मदिरापान करने वाला
केवल मद्य ही नहीं पीता
पी जाता है घर के सुकून
बच्चों के सपने,माता-पिता के अरमान
खुद की सम्मान,इसके अलावा भी
गृह के बर्तन-भाड़ा,घर को बनाकर अखाड़ा
छीन लेता है सुख-शांति को
मिलकियत,शोहरत भांति-भांति को
जो बिखेर देता है परिवार को
भर देता है..आँसू जार-जार को
असीम-असीम कर्ज में डूबाकर
कुल-कुटुम्ब को जीवन से उबाकर
सबके जीवन को नरक बना देता है
बच्चों के भाग में कीचड़ समा देता हैं
बाप की पगड़ी जहाँ रोज उछलता है
ऐसे के संग रहना अभिशाप लगता है
जहाँ तकरार का होना आम बात है
मरने की कामना अंतिम जज्बात है।।
चंद्रकांत खूंटे
जांजगीर-चांपा
छत्तीसगढ़


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