जीवन हा अपन नोनी किरन ला बड़का शहर मा रखके पढ़ाना चाहत रहय। जीवन के एक ठन सपना रहय की मै हां कालेज के पढ़ाई ला नियमित रूप ले नइ कर पायेव ता का होईश मैं हा अपन बेटी ला अच्छा से जगा अउ अच्छा कालेज में पढ़ा हूं।ये सोच के जीवन हा अपन बेटी किरन ला दिल्ली विश्वविद्यालय मा भर्ती करवाते।अब किरन हा दिल्ली के माहौल मा अपन आप ला ढाले के कोशिश करते। दिल्ली के चका चौंध मा किरन बुड़ जथे,अउ अपन असली बुता पढ़ाई मा लग जथे।
अब देवारी तिहार के पाख मा देवारी के एक सप्ताह के छुट्टी होथे।देवारी के छुट्टी मा किरन अपन गांव दादरगांव आते। देवारी मा किरन अपन लइका बर अड़बड़ अकन कीसम कीसम के पटाखा अउ तीन जोड़ी सलवार सूट लेथे।किरन हा पटाखा ला देख गदगद हो जथे।अब दद्दा के पसंद से आए ओन्हा मा किरन हा गिना गाए ला लागथे, किरन कहिते ये काए ओन्हा ला तंय लाए,ये हा तो एकदम देहाती बरोबर लागत हे।अतका ला सुन जीवन कहिते नोनी तंय एकर पहेली मोर कोनो पसंद मा सवाल नइ उठास। जम्मो मोर पसंद ला तंय पसंद कर लेत रेहे फेर शहर ढहर ले आए के बाद मा मोर पसंद ला तंय हीन दे बेटी। अतका ला सुन किरन कहिते, मै तोर पसंद ला हीनत नइ हव दद्दा, मै हा तो ओतकी कहत हव की ये ओन्हा हा कहा पुराना जमाना के हरे अउ मोला दद्दा नवा जमाना के फैंसी ओन्हा चाहिए। किरन के अतका बात ला सुन जीवन हा अपन बेटी के ओन्हा ला वापिस कर देथे।किरन हा अपन दद्दा ला कहिते ये देवारी मा मोर बर एकठन मोबाइल ले देना। बेटी के गोठ ला सुन जीवन हा अपन बेटी ला एकठन आई फोन ले के दे देथे। मोबाइल ला देख सुमन अड़बड़ खुश हो जते। किरन हा अपन दद्दा जीवन ला कहिते दद्दा मोला पांच सौ रुपिया दे देतेव का ता जीवन हा कहिते बेटी पइसा ला अउ का करबे।किरन अपन दद्दा ला कहिते मैं हा मोबाइल के सुरक्षा खातिर मोबाइल बर एकठन स्क्रीन गार्ड अउ कभर लूहूं।अतका सुन जीवन अपन बेटी किरन ला पइसा दे देथे।
जीवन हा बड़ेफजर अपन बेटी किरन ला समझाते कि मोबाइल के सुरक्षा खातिर स्क्रीन गार्ड अउ कभर के जरूरत हे, वाइसने हमर अपन मर्यादा लोक लाज ला बचाए खातिर, हमर तन ला पूरा तोपना आवश्यक हे।बेटी तै मोर लाए ओन्हा ला पुराना जमाना के कहिदेस, तेकर सेती मै हा ओ नवा ओन्हा ला वापिस कर देव।देख बेटी तंय मोर एकठन बात ला सदा दिन सुरता रखबे,हम कहूं रहना कतको बड़े मइन्खे बन जान, हमला हमर अपन मर्यादा अउ संस्कार ला कभू भूलाना नइ चाहि। दद्दा के बात ला सुन किरन के आंखी हा डबडबा जथे।किरन हा अपन दद्दा ला कहिते दद्दा मै हा तोर भाव ला मै नइ समझ पायेव दद्दा, मोला तंय माफी देबे।जीवन हा अपन बेटी किरन के पीठ ला थपथपाते अउ कहिथे देख बेटी बिहनिया के जाए अउ संझा के आए ला कोनो भुलाए नइ काहे।
लक्ष्मीनारायण सेन
खुटेरी गरियाबंद (छ.ग.)
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