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लेख @ सुपर पावर या सुपर खलनायक

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अमेरिका को दुनिया की सुपर पावर कहा जाता है। इसका कारण यह है कि इस देश ने इतना आर्थिक विकास कर लिया है कि कि यह दुनिया का सबसे अमीर देश है। इसको टक्कर देने के लिए कभी यूएसएसआर दूसरी सुपर पावर हुआ करती थी जिसको बड़े तरीके से अमेरिका ने तुड़वाकर कई देशों में बांट दिया है लेकिन पुराने सोवियत संघ में से निकल कर रूस अब भी अमेरिका जैसे सुपर पावर को टक्कर दे सकता है। इतना ही नहीं अपने आर्थिक विकास, परमाणु शक्ति तथा सैनिक शक्ति के बलबूते पर चीन भी अमेरिका के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बना हुआ है। उत्तरी कोरिया भी समय-समय पर अमेरिका को आंखें दिखाता रहता है। इस सारे के बावजूद भी विश्व अमेरिका को ही सुपर पावर कहा जा सकता है। परंतु मेरा मानना है कि अमेरिका सुपर पावर ही नहीं बल्कि सुपर खलनायक भी है। इसका मुख्य कारण यह है कि अपनी बलशाली आर्थिक तथा सैनिक शक्ति के बलबूते पर अमेरिका सारी दुनिया में सब देशों से वहीं कुछ करवाना चाहता है जो कि उसके हित में
हो। यह बात अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शासन के दौरान देखने को ज्यादा मिलती है। ट्रंप कोई निश्चित विचारों वाले राष्ट्रपति नहीं है। वह बार-बार अपने इरादे बदलते रहते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य अमेरिका के हितों की रक्षा करना है। ऐसे-ऐसे आदेश पारित करते हैं जिससे अमेरिका की छवि धूमिल होती है। उन्होंने अमेरिका से गैर कानूनी तौर पर रहने वाले प्रवासियों को देश से बाहर निकालने का जो बीड़ा उठाया है उससे अमेरिका में हिंसक प्रदर्शन हुए हैं और बहुत सारे लोग ट्रंप के खिलाफ हो गए हैं। एक तरफ अमेरिका अपने आप को लोकतंत्र का ठेकेदार कहता है और आतंकवाद को जड़ से उखाड़ने का प्रण करता है और दूसरी और वह सीरिया जैसे देश को अभय दान दे देता है। एक तरफ ईरान के साथ परमाणु संवर्धन को रोकने के लिए बातचीत करता है और दूसरी तरफ इजरायल की आर्थिक तथा सैनिक सहायता करके ईरान पर हमला करके उसके परमाणु ठिकानों, सैनिक जनरलों परमाणु वैज्ञानिकों को मरवा देता है। अरब देशों में इस तरह फूट डलवाता है कि कोई दो अरब देश ईरान की मदद के लिए नहीं आए। सुपर पावर के तौर पर विभिन्न देशों में अमेरिका सत्ता परिवर्तन करवाता रहता है। एक तरफ रूस तथा यूक्रेन में युद्ध रुकवाने के लिए बातचीत करता है दूसरी तरफ यूरोपीय देशों को यूक्रेन के पक्ष में उकसा कर उसे रूस के विभिन्न क्षेत्रों पर हमला करवाने के लिए कहता है। सभी को पता है कि
पाकिस्तान आतंकवाद की जननी है इसके बावजूद भी वह अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से उसको ऋ ण दिलवाने में मदद करता है। ट्रंप से पहले के राष्ट्रपतियों ने भी सुपर खलनायक की भूमिका निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सुरक्षा परिषद के विरोध के बावजूद अमेरिका ने इराक में सद्दाम हुसैन को तख्ता पलट करके मरवा दिया, अमेरिका में विश्व व्यापार केंद्र तथा कुछ अन्य इलाकों में आतंकी हमले के बाद अमेरिका ने नाटो देशों के साथ मिलकर अफगानिस्तान पर अपनी कठपुतली सरकार बैठा दी। अफगानिस्तान में रूस द्वारा संचालित सरकार को गिराने के लिए अमेरिका ने पाकिस्तान को तालिबानी आतंकवादियों को बढ़ावा देने के लिए कहा! बाद में इन्हीं तालिबानी आतंक वादियों ने अफगानिस्तान से अमेरिका को मैदान छोड़कर भागने के लिए मजबूर कर दिया! विश्व के किसी भी देश में कोई भी समस्या हो आपको अमेरिका वहां अपनी टांग अड़ाए मिलेगा। क्योंकि यूरोपीय देश ट्रंप की हां में हां नहीं मिलाते इसलिए ट्रंप का उनके साथ व्यवहार अच्छा नहीं है। अमेरिका भारत को भी अपने साथ मिलाना चाहता है। वह चाहता है कि भारत अमेरिका से ही अपनी जरूरत की सभी वस्तुओं को प्राप्त करे रूस अथवा किसी और देश के साथ
संबंध नहीं रखें। अमेरिका चाहता है हम रूस से हथियार नहीं खरीदें, अमेरिका चाहता है हम ईरान से तेल ना खरीदें,यह क्या बात हुई। भारत एक लोकतंत्र तथा गणतंत्र तथा गुटनिरपेक्ष देश है। हम किसी भी देश के साथ अपने हितों को ध्यान में रखकर व्यापार कर सकते हैं। कहां तो अमेरिका आतंकवाद को खत्म करने के बाद कहता है और कहां पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा पहलगाम में 26 व्यक्तियों को करने के बाद जब दोनों मैं सैनिक संघर्ष होता है तो ट्रंप साहब पाकिस्तान तथा भारत को एक समान मानते हैं। यह एक सुपर पावर का काम नहीं बल्कि खलनायक का काम है। अमेरिका एक व्यापारी, साम्राज्यवादी तथा स्वार्थी देश है। यह किसी का नहीं है। जो देश इस पर निर्भर करते हैं यह उन्हीं को ही धोखा देता है। कभी टीवी चैनलों के ऊपर ट्रंप और मोदी को गले लगाते हुए दिखाकर ट्रंप कहते थे,माई डियर फ्रेंड मोदी, और मोदी भी कहा करते थे माई डियर फ्रेंड ट्रंप। लेकिन आजकल ट्रंप इस प्रकार की दोनों देशों में दोस्ती की सारी बातें भूलकर भारत विरोधी नीतियां ही अपना रहे हैं। आपको याद होगा इसी सुपर पावर अमेरिका ने ही जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर बम गिरकर तबाही मचा दी थी। इस समय अमेरिका के पास विश्व में सबसे ज्यादा परमाणु हथियार हैं। अमेरिका दुनिया में सबसे ज्यादा हथियार बनाने वाला देश है जो कि यह चाहता है विभिन्न देशों में युद्ध चलता रहे ताकि उसके हथियार बिकते रहे। अमेरिका में एक लॉबी है जो कि विश्व के किसी न किसी भाग में युद्ध होते रहने को ही हितकर समझती है ताकि अमेरिका के हथियार बिकते रहें और उनका परीक्षण भी होता रहे। यही कारण है कि रूस और यूक्रेन का युद्ध, इजरायल की विनाशकारी सैनिक गतिविधियां ईरान में भी तबाही मचाने पर उतारू हो गई है। अमेरिका इस संयुक्त राष्ट्र को कुछ नहीं समझता जिसकी स्थापना दूसरे विश्व युद्ध के बाद करने में उसी ने अहम भूमिका निभाई थी। जो बातें अमेरिका के पक्ष में नहीं होती सुरक्षा परिषद में वह उसका वीटो कर देता है। यही काम सुरक्षा परिषद के अन्य चार स्थाई सदस्य भी करते रहते हैं। अब जब इसराइल ने ईरान पर हमला कर दिया है और ईरान ने भी बदले की कार्रवाई कर दी है, ईरान के परमाणु वैज्ञानिक तथा परमाणु ठिकाने नष्ट हो गए हैं, तो ट्रंप ने कहा है कि उन्हें इन हमलों की जानकारी तो थी लेकिन उन्होंने इसमें कोई हिस्सा नहीं लिया। वक्त वक्त की बात है आज अमेरिका सुपर पावर बना हुआ है, उसे चीन ललकारने के लिए तैयार हो रहा है। अच्छी बात तो यही है कि डोनाल्ड ट्रंप को भगवान सद्बुद्धि दे और वह विश्व के अनेक भागों में शांति स्थापित करने में अपनी भूमिका निभा सके जैसा कि चुनावों से पहले उन्होंने कहा था कि उनके राष्ट्रपति बनते ही रूस यूक्रेन युद्ध रुक जाएगा और इजरायल और हमास में युद्ध विराम हो जाएगा।


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