नोहय नारी अब तो अबला
बनगे हावे अब ए ह सबला।
नारी बिना हे ए जग ह सुन्ना
तारय इही हर इही जग ला।।
तहीं हर लक्ष्मी तहीं हर दुर्गा
तहीं ऋषिनारी बने अहिल्या।
ज्ञान देवइया तहीं ह सरसती
राम के माई तहीं ह कौसल्या।।
तय हरस दाई तय हर दीदी
तहीं ह बहिनी जीवन साथी।
तहीं ह शक्ति तहीं हर श्रद्धा
घर-परिवार के बने सारथी।।
सृष्टि के तहीं ह बने रचइया
ए जग के तय जन्म देवइया।
तहीं ह बने बागडोर धरइया
तहीं बने देख-रेख करइया।।
तोर बिना ए जग हावे सुन्ना
तहीं ह लछमी तय अनपुन्ना।
नर के सँग म साथ चलइया
घर-संसार ल सरग बनइया।।
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