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सम्पादकीय@आतंकवाद केवल भारत की समस्या नहीं

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तीन बड़े हमलों का मुख्य साजिशकर्ता लश्कर-ए-तैयबा का आतंकवादी रजाउल्ला निजामनी खालिद उर्फ अबू सैफुल्ला की पाकिस्तान के सिंध प्रांत में गोली मार कर हत्या कर दी गई। पाक सरकार ने उसे सुरक्षा मुहैया की थी। वह नागपुर स्थित आरएसएस मुख्यालय,सीआरपीएफ कैंप व भारतीय विज्ञान संस्थान पर हमलों का मुख्य साजिशकर्ता था। सिंध के मतली में उसके घर के करीब के चौराहे पर अज्ञात बंदूकधारियों ने उसे गोलियां मार दीं,जिसे आपसी रंजिश का मामला बताया जा रहा है। वह लश्कर के अबू अनस तथा चीमा का करीबी सहयोगी बाताया जाता है। अनस अब भी फरार है। 2008 में उप्र के रामपुर में जन्मा खालिद रामपुर के केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल शिविर पर हमले का मास्टरमाइंड था,जिसमें सात जवानों व एक नागरिक की मौत हुई थी। 2005 में बंगलुरु के भारतीय विज्ञान संस्थान में हुए हमले में एक प्रोफेसर समेत चार अन्य लोगों की भी हत्या हुई थी। इन हमलों की साजिश और इन मासूम लोगों की हत्या के मॉडय़ूल का पर्दाफाश होने के बाद खालिद नेपाल से पाकिस्तान भाग गया। जहां वह लश्कर-ए-तैयबा व जमात-उल-दावा जैसे आतंकी संगठनों के लिए धन जुटाने और नये आतंकियों की भर्ती करने का काम कर रहा था। लश्कर-ए-तैयबा दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा इस्लामी आतंकवादी संगठन माना जाता है। बीते पांच सालों में आपसी झगड़ों में एक-के बाद एक कई आतंकी लगभग एक से तरीके से मारे गए। भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा इनमें से कई वांछित भी बताए जाते हैं। हालांकि विचारणीय तथ्य तो यह भी है कि इसी दरम्यान ट्रंप प्रशासन द्वारा नियुक्त दो व्यक्तियों पर लश्कर से संबंध रहने के आरोप भी लग रहा हैं। जिस पर भारत सरकार समेत अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने खासी चिंता व्यक्त की है। आतंकवाद केवल भारत की समस्या नहीं है। आतंकवादी एक-दूसरे की जान लें या उन्हें मुठभेड़ में मार गिराया जाए;शांति की चाहना रखने वालों के लिए सुकून की बात है। मगर जिस तरह से भेड़ के खाल ओढ़े भेडि़ए झुंडों में शामिल हैं, उनसे मुक्ति पाना दुरूह होता जा रहा है। आतंकवादियों की धर-पकड़ के साथ ही, उनके द्वारा करायी जाने वाली घुसपैठ पर लगाम लगाना भी निहायत जरूरी है। साथ ही आतंकियों के बरगलाने में आने वाले नौजवानों को जागरूक करने के तरीके भी इजाद करने की जरूरत महसूसनी होगी। बुरी मौत मारे गए इन आंतकियों के हश्र के मार्फत उन्हें भटकाव से बचाना भी चाहिए।


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