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कविता@अपना गौरव याद न रखें तो…

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अपने ही घर से कब कब भगाए गए हो,
बिना कारण कहां कहां लतियाये गए हो,
तुम्हारे विरुद्ध हुए अत्याचार की बात
क्या तुम्हें कचोटता नहीं,
इतिहास की अधूरी जानकारी पर
तू खुद अपने बाल क्यों नोचता नहीं,
दोष तुम्हारा नहीं तुम्हारी शिक्षा का है,
चमत्कारियों से मिल जाये
इस झूठी प्रतीक्षा का है,
क्यों महत्व नहीं दिया अपनी शिक्षा को,
और महत्व दिया नहीं सामाजिक दीक्षा को,
शिक्षा से दूर रह इतिहास कैसे जानोगे,
तब तक बहुरूपियों के बहकावे को ही
शास्वत सत्य मानोगे,
रूठना मनाना अपनों के बीच हो,
जागरूकता सह संसाधनों पर कब्जा
लक्षित सपनों के बीच हो,
कब कब कहां कहां और क्यों बहाया गया
रक्त का एक एक कतरा,
उठाओ इतिहास और सच्चाई जानो,
बेवजह क्यों मारे गए हमारे अपने
दुश्मन की ढिठाई भी जानो,
दूसरों के बनाये पाखंड और अंधविश्वास
कैसे रखा है तुम्हें जकड़ के,
जागृत हो छोड़ो ये सब
जिसे रखे हो पकड़ के,
हाथ पर हाथ धरे बैठे रहोगे तो रोना पड़ेगा,
अपना अतीत याद न रखे तो,
अपना गौरव याद न रखे तो,
मिला हुआ हक़ अधिकार भी खोना पड़ेगा।


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