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बलरामपुर@प्रदेश में कई मामले आ गए कहीं कलेक्टर कार्यालय जला तो कहीं थाने पर पथराव हुए पर डीजीपी की खामोशी प्रदेश का हाल बयां कर रही।

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-विशेष संवाददाता-
बलरामपुर,26 अक्टूबर 2024 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ इस समय पुलिसिंग को लेकर बदनाम होती जा रही है अलग-अलग जिलों में कई बड़ी घटनाएं भी हो चुके जो किसी से छुपी नहीं, पर पूरे मामले में छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग के मुखिया यानी कि डीजीपी की खामोशी क्या इस और इशारा कर रही है कि वह अपने विभाग को संभाल पाने में नाकाम है? क्योंकि अब यह बात विपक्ष भी कहने लगा है और कह भी क्यों ना क्योंकि उन्हें तो मौका मिला है, और वह तो निशान साधेंगे ही क्योकि मौका अच्छा है वर्तमान सरकार की छवियां पर वह कटाक्ष तो करेंगे, पर सवाल यह खड़ा होता है कि क्या छाीसगढ़ पुलिस के डीजीपी ऐसी वारदातों पर काबू पाने के लिए अपनी पुलिस को तैयार नहीं कर पाए हैं? या फिर जिन्हें जिम्मेदारी दी जा रही है वह जिम्मेदारी निभानी में नाकाम है और अपने मुखिया के सर को झुकना की जिम्मेदारी उठा लिया है? यह बात बलरामपुर घटना के बाद होना जरूरी भी है क्योंकि छत्तीसगढ़ में बलोदा बाजार, कवर्धा, सूरजपुर के बाद अब बलरामपुर में पुलिस की किरकिरी हो रही है, बलरामपुर जिले में वर्तमान भाजपा सरकार के 10 महीने के कार्यकाल में ही पुलिस कस्टडी में मौत का पहला मामला आ गया और यह मामला आया तो जरूर पर कई सवाल भी लाया, जिसकी पुलिस कस्टडी में मौत हुई है उसके विरुद्ध शिकायत हुई थी पर शिकायत पर पुलिस कार्यवाही ना करके प्रताडि़त करने पर लगी हुई थी, उसका नतीजा यह हुआ कि थाने के ही बाथरूम में युवक की संधि हालत में फांसी लगाने की जानकारी ने पूरे जिला को अशांत कर दिया, जैसे ही यह बात बहार आई पूरा जिला उबलने लगा, जिसकी मृत्यु हुई वह स्वास्थ्य विभाग का कर्मचारी था इस वजह से विभाग के लोग भी विरोध में शामिल हो गए, पुलिस की लापरवाही एक बार फिर सामने आई, पुलिस की गलती पर नजर डाले तो पुलिस की गलती इतनी ही थी की अपने व्यवहारों में सुधार नहीं लाया, पुलिस पहले की तरह ही अभी भी कार्य कर रही है जिसका नतीजा था पुलिस कस्टडी में एक और मौत, पुलिस कार्यवाही के बजाय उगाही पर ध्यान ज्यादा और प्रताडि़त करना उद्देश्य ही पुलिस की कार्यप्रणाली को चार चांद लग रहा है, पुलिस पास का जब मृतक के खिलाफ शिकायत थी तो कार्यवाही क्यों नहीं की गई? कार्यवाही करके जेल क्यों नहीं भेजा गया? बुला बुलाकर प्रताडि़त क्यों किया जा रहा था? क्या यही प्रताड़ना ही पुलिस कस्टडी में एक व्यक्ति के मौत की कारण बनी?
महिलाओं ने एडिशनल एसपी को चप्पल व डंडे से मारा,बरसाए पत्थर,जान बचाकर भागीं,फिर भी हुईं घायल
बलरामपुर अस्पताल में पीएम के बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जा रहा था। इसी दौरान अस्पताल परिसर में मौजूद महिलाएं फिर उग्र हो गईं। इस दौरान उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहीं जशपुर की एडिशनल एसपी निमिशा पांडेय पर हमला कर दिया। एएसपी उन्हें शांत रहने के लिए कहती रहीं, लेकिन महिलाओं ने उन्हें चप्पल व डंडे से मारा। पत्थर मारने के दौरान जब वे भागने लगीं तो गिर गईं। इससे उन्हें चोटें भी आई हैं।
यह है पूरा मामला
एनआरएचएम में पदस्थ प्यून द्वारा बलरामपुर थाने के टॉयलेट में फांसी लगाने की घटना के बाद जमकर बवाल मच गया है। एनआरएचएम कर्मचारियों के अलावा नगरवासी व मृतक के परिजनों ने नेशनल हाइवे पर टायर जलाकर चक्काजाम किया तथा पुलिस के खिलाफ नारे लगाए। उग्र प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने उन्हें खदेडऩे भीड़ पर लाठी चार्ज कर दिया। इससे गुस्साए लोगों ने पुलिस पर पथराव किया तो पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। इससे लोग और बिदक गए और थाने पर पथराव कर दिया। इससे खिड़कियों के कांच फूट गए। प्रदर्शन रात तक चलता रहा। हम आपको बता दें कि बलरामपुर के ग्राम संतोषीनगर निवासी निवासी गुरुचंद मंडल 30 वर्ष एनआरएचएम कार्यालय में संविदाकर्मी के रूप में प्यून के पद पर पदस्थ था। उसकी पत्नी रीना मंडल पिछले 20 दिनों से घर से गायब है। इसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट बलरामपुर थाने में दर्ज है। गुमशुदगी को लेकर शक के आधार पर पुलिस ने गुरुवार की दोपहर करीब 2 बजे उसे थाने में बुलाया था। इसी बीच करीब 3.30 बजे उसकी लाश थाने के टॉयलेट में फांसी पर लटकी मिली। बताया जा रहा है कि युवक ने टॉयलेट में जाकर गमछे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। युवक का फांसी के फंदे पर देख पुलिसकर्मियों के होश उड़ गए। फिर उन्होंने तत्काल इसकी सूचना थाना प्रभारी समेत एसपी को दी।
घटना की सूचना जैसे ही एनआरएचम में पदस्थ कर्मचारियों तथा चिकित्सकों को हुई, वे तत्काल थाने पहुंच गए…
घटना की सूचना जैसे ही एनआरएचम में पदस्थ कर्मचारियों तथा चिकित्सकों को हुई, वे तत्काल थाने पहुंच गए। इसके अलावा मृतक के परिजन सहित अन्य लोग भी मौके पर पहुंचे। बताया जा रहा है कि चिकित्सक व कर्मचारी घटनास्थल की स्थिति को देखकर पूरे मामले को समझना चाह रहे थे कि आखिर किन परिस्थितियों में गुरुचंद की मौत हुई। पुलिस द्वारा घटनास्थल दिखाने से साफ इंकार कर दिया। इससे कर्मचारियों, परिजन व अन्य लोगों का आक्रोश फूट पड़ा तथा उन्होंने थाने का घेराव कर जमकर हंगामा मचाया, फिर उन्होंने एसपी कार्यालय के सामने नेशनल हाइवे पर टायर जलाकर चक्काजाम कर दिया। उग्र होता देख थाना व एसपी कार्यालय के पास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया। दरअसल लोग मृतक के पिता से मिलना चाह रहे थे, जिन्हें थाने के अंदर बैठाकर रखा गया था, जब काफी देर बाद भी पिता को बाहर नहीं लाया गया तो लोगों का आक्रोश फूट पड़ा।
रेलिंग तोडक¸र थाना परिसर में घुसी भीड़,छावनी में हुआ तब्दील
मौके पर मौजूद प्रदर्शनकारी रेलिंग तोड़ते हुए थाना कैंपस में घुस गए, इस दौरान उग्र भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। टियर गैस भी छोड़े गए। जवाब में प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों ने थाने पर पथराव किया। उन्होंने थाने के खिड़कियों में लगे कांच के शीशे पत्थर से तोड़ दिए। देर रात तक लोग वहीं डटे रहे तथा चक्काजाम जारी था। तनाव की स्थिति देखते हुए पूरे जिले से पुलिस बल मंगाकर थाने के 200 मीटर दायरे को छावनी में तदील कर दिया गया है।
पीएम के बाद प्यून के डेड़ बॉडी को लेने से परिजनों ने किया इनकार, अस्पताल परिसर में मचा बवाल,महिला-पुरुषों ने पुलिस पर किया हमला
एनआरएचएम के प्यून की थाने में फांसी लगाकर आत्महत्या मामले में बलरामपुर में बवाल मचा हुआ है। रात में जहां उग्र प्रदर्शन कर रही भीड़ पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था तो भीड़ ने थाने पर पथराव किया था। शुक्रवार को प्यून के शव का जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा पीएम किया गया। इसके बाद परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया।
शव का हुआ पीएम,न्यायिक जांच शुरु
शुक्रवार को अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल से फॉरेसिंक पीएम एक्सपर्ट डॉ. संतू बाग व डॉ. रवि बलरामपुर अस्पताल पहुंचे थे। मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में वीडियोग्रॉफी कराकर मृतक के शव का पीएम कराया गया। वहीं मामले की जांच के लिए जिला एवं सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार साहू द्वारा मजिस्टि्रयल जांच के लिए बलरामपुर के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दीपक शर्मा को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। इनकी उपस्थिति में ही पीएम किया गया। इधर एनएचआरसी के प्रावधान के तहत मामले की न्यायिक जांच शुरु हो गई है।
नौकरी व मुआवजे की मांग
मृतक के परिजनों ने पीएम के बाद उसका शव लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद काफी संख्या में भीड़ ने एनएच पर चक्काजाम कर दिया। इसके बाद प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और समझाइश देने का प्रयास किया। इधर परिजनों ने परिवार के एक सदस्य को नौकरी, मुआवजा समेत 5 मांगों को लेकर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा है। करीब डेढ़ घंटे तक चले चक्काजाम के बाद एसडीएम द्वारा निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया गया। इसके बाद वे शव ले जाने को राजी हुए।
थाना प्रभारी व आरक्षक सस्पेंड
थाने में प्यून द्वारा फांसी लगा लिए जाने के मामले में मचे बवाल के बीच एसपी वैभव बैंकर रमन ने बलरामपुर थाना प्रभारी प्रमोद रुसिया व आरक्षक अजय यादव को सस्पेंड कर दिया है। इधर पीसीसी ने मामले की जांच के लिए 8 सदस्यीय टीम बनाई है। टीम में संयोजक अंबिकापुर महापौर डॉ. अजय तिर्की व सदस्यों में शफी अहमद, राजेंद्र तिवारी, मधु गुप्ता, सीमा सोनी, केपी सिंह, लाल साय तथा दिनेश यादव शामिल हैं।


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