
आजकल सोशल मीडिया का जमाना है! शायद ही कोई व्यक्ति ऐसा होगा जोकि बाइल,ऐसएमऐस,फेसबुक,ट्विटर, व्हाट्सएेप,चैटिंग आदि का प्रयोग नहीं करता होगा! अपने या प्रतिद्वंदी के बारे में विचार प्रकट करने का सोशल मीडिया एक लाजवाब माध्यम है! सोशल मीडिया पर फेसबुक या व्हाट्सएेप पर या ट्विटर पर लोग अपने विचार व्यक्त करते हैं! सोशल मीडिया का जहां सदुपयोग होता है, हम एक दूसरे के बारे में अच्छी बात नहीं जानते हैं, अच्छी-अच्छी पोस्ट,तस्वीरें या वीडियो भेजते हैं या मंगवाते हैं, दुनिया के किसी भी हिस्से में बैठे हुए दूसरे व्यक्ति के साथ वीडियो कॉलिंग या वीडियो कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं! सोशल मीडिया समाज में रहने वाले लोगों को अपने विचारों के आदान प्रदान करने का एक मनपसंद तकनीक है जिसके बारे में आज से 50 साल पहले कभी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी! लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आजकल सोशल मीडिया का भरपूर दुरुपयोग होने लगा है! लोकतंत्र में लोगों को अपने विचारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तो होती है परंतु जिस तरह से लोग अनियंत्रित ढंग से एक दूसरे के बारे में मर्यादा से हटकर तथा गैर जिम्मेदार तरीके से अपने विचारों की अभिव्यक्ति करने लगे हैं उससे सोशल मीडिया के दुरुपयोग का साफ पता चलता है! सोशल मीडिया पर संप्रदायिक जहर फैलाना, राष्ट्र विरोधी बातों का प्रचार करना, अनैतिक बातें लिखना,अपशब्दों का प्रयोग करना,चरित्र हनन करना, किसी व्यक्ति या समुदाय के बारे में गंदी भाषा का प्रयोग करना आदि का मतलब यह नहीं कि सोशल मीडिया पर आप को जो भी आपके मन में आए कहने का अधिकार है! सोशल मीडिया का प्रयोग करते समय मर्यादा, संयम, संस्कार,एक दूसरे के प्रति सम्मान, देशहित आदि की बातों को जरूर ध्यान रखना चाहिए! लेकिन पूछा जा सकता है क्या सोशल मीडिया पर विचार व्यक्त करते हुए इन सब बातों का ध्यान रखा जाता है! संविधान के मुताबिक हमें अपने विचारों को व्यक्त करने की आजादी तो है लेकिन अगर इस आजादी का प्रयोग ईषर्््या, घृणा, देशद्रोह, देश की एकता तथा अखंडता के खिलाफ किया जाएगा तो सोशल मीडिया का वह सरासर दुरुपयोग होगा! प्रिंट मीडिया तथा इलेक्ट्रॉनिक्स मीडिया की तो जवाबदेही है! अगर इनमें से कोई मर्यादा तथा निर्धारित गाइडलाइंस की उल्लंघना करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है परंतु सोशल मीडिया के बारे में अभी ऐसा कुछ नियम नहीं बना। सोशल मीडिया दूसरों को नीचा दिखाने,अपमान करने, जहर फैलाने, देशद्रोह से संबंधित विचारों को फैलाने, गलत सूचना देने, भ्रमित करने वाले फोटो या वीडियो दिखाकर गलत प्रचार करने में लगा हुआ है। किसी के साथ हिसाब बराबर करने, बदनाम करने, ब्लैकमेल करने आदि की बातें सोशल मीडिया पर आम देखी जा सकती हैं। सकारात्मक विचारों का आदान-प्रदान बहुत कम ही देखने को मिलता है। सुबह सुबह जब हम उठते हैं तो हमें बहुत बार अपने मित्रों, रिश्तेदारों या शुभचिंतकों द्वारा भेजी गई अच्छी-अच्छी पोस्ट, कविताएं, भजन
यह फोटो देखने को मिलते हैं और मन खुश हो जाता है। यह सब कुछ कुछ समय के लिए सुबह-सुबह ही होता है जैसे-जैसे दिन चढ़ता है सोशल मीडिया का नकारात्मक रूप देखने को मिलता है। राजनीतिक, धार्मिक,सामाजिक आरोप तथा प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो जाता है। हिंसा, हत्या, आगजनी, झगड़े, पुलिस द्वारा लोगों को पीटे जाने या फिर कोरोनावायरस महामारी से संबंधित बातें बढ़ा चढ़ा कर बताने या किसी राज्य में राजनीतिक उथल-पुथल को बढ़ा चढ़ाकर बताने आदि की बातें मिर्च मसाला लगाकर लोग एक दूसरे के आगे परोसते हैं। बहुत बार कुछ शरारती लोग दूसरों का ट्विटर अकाउंट चोरी करके उनके नाम से ही गलत खबरें सोशल मीडिया पर देना शुरू कर देते हैं। आजकल धार्मिक उन्माद पैदा करने के लिए सोशल मीडिया का दुरुपयोग एक आम बात हो गई है। नागरिकता संशोधन कानून, राष्ट्रीय पापुलेशन रजिस्टर, जम्मू कश्मीर में धारा 370 समाप्त करना, कोरोनावायरस महामारी के बारे में लोगों में भय, डर तथा आतंक फैलाना आदि बातें आम हो गई हैं। कुछ समय पहले दिल्ली में मौलाना साद की अध्यक्षता में तबलीगी जमात के लोगों द्वारा जलसा करने तथा उनमें विदेशी लोगों के द्वारा भी शामिल होने के कारण कोरोनावायरस महामारी को फैलाने में इन लोगों का हाथ होने के बारे में जो बवंडर खड़ा हो गया वह सोशल मीडिया का दुरुपयोग था! सुप्रीम कोर्ट द्वारा अयोध्या मामले में राम मंदिर बनाने वालों के हक में फैसला करना सोशल मीडिया के द्वारा समाज के एक विशेष वर्ग के पक्ष तथा दूसरे समुदाय के विरुद्ध प्रचार करने के लिए किया गया भारतीय वायु सेना द्वारा पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक करने को लेकर , चीन द्वारा लद्दाख में हमला करने, हमारे 20 को शहीद करने तथा पैगोंग क्षेत्र के एक हिस्से पर चीनी सैनिकों द्वारा कब्जा करने की बात को लेकर भी सोशल मीडिया तरह तरह के भ्रम फैला रहा है। सोशल मीडिया के द्वारा प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी के बारे में अमर्यादित भाषा का प्रयोग करना तथा भाजपा के लोगों द्वारा राहुल गांधी तथा कांग्रेस के बारे में ऐतराज़ योग्य भाषा का प्रयोग करना सोशल मीडिया में अक्सर देखा जाता है। सोशल मीडिया पर विपक्ष द्वारा सैनिकों के मनोबल को गिराने वाली बातें कहना भी सोशल मीडिया का सरासर दुरुपयोग है। हमें कोई ऐसी बात नहीं करनी चाहिए जिससे देश की रक्षा करने वाले सैनिकों के मनोबल पर चोट पहुंचाने वाला कोई असर हो। कई बार सोशल मीडिया पर गुमराह करने वाले चित्र दिखाए जाते हैं। कई बार सोशल मीडिया पर बच्चों को विशेष प्रकार की गेम्स खेलने के लिए लालायित किया जाता है और बच्चों के मन पर इसका इतना बुरा असर पड़ता है कि कई बार वे खुदकुशी करने को भी तैयार हो जाते हैं। बेशक सोशल मीडिया पर भजन, कथा, कीर्तन, सत्संग से संबंधित बातें भी दिखाई जाती हैं लेकिन सोशल मीडिया नफरत, बदले बाजी, बगावत, उत्तेजना, सांप्रदायिक दंगों, स्टंट बाजी के दृश्य दिखाकर लोगों का अहित ही करता है। आज जम्मू कश्मीर में जो हालात भारत विरोधी हैं उनके पीछे मीडिया के दुरुपयोग का प्रभाव ही है। आतंकवादी सोशल मीडिया के द्वारा ही
अपने सहयोगियों से सहयोग तथा बातचीत करके ही आतंकी गतिविधियों को अंजाम देते हैं। कश्मीर में जब आतंकवादी घुसपैठ करते हैं तो वे पाकिस्तान में अपने आकाओं के संपर्क में होते हैं और उनसे मार्गदर्शन लेते हैं तथा स्थानीय लोगों के भी संपर्क में होते हैं और अपनी कार्रवाई को अंजाम देने के लिए उनकी मदद लेते हैं।
चाहे लोकतंत्र हो या प्रशासन की कोई और व्यवस्था, सभी लोगों के विचार एक जैसे नहीं होते। उनके विचारों में मतभेद तथा असहमति होना आम बात है। इसका मतलब यह नहीं कि एक दूसरे के प्रति ईर्ष्या, राष्ट्रीय विरोधी बयान बाजी, सांप्रदायिक वैमनस्य या फिर अपने विरोधी के व्यक्तिगत जीवन पर कीचड़ फेंका जाए या फिर उनको झूठे मुकदमों में फंसा कर मीडिया द्वारा उनका बंटाधार किया जाए। इसे किसी प्रकार से उचित नहीं कहा जा सकता। किसी राजनीतिक पार्टी में या विपक्ष में आपसी मतभेद हो सकते हैं लेकिन उसके बावजूद भी के प्रति सम्मान, मर्यादा तथा संयम बनाए रखने की बहुत जरूरत होती है। पंडित जवाहरलाल नेहरू तथा श्री अटल बिहारी वाजपेई एक दूसरे के प्रतिद्वंदी होने के बावजूद भी एक दूसरे की बहुत इज्जत करते थे। जब 1971 में इंदिरा गांधी ने युद्ध में पाकिस्तान को करारी हार दी तथा बांग्लादेश का निर्माण किया तब श्री अटल बिहारी वाजपेई ने कहा था…इंदिरा इज इंडिया…! इसे कहते हैं राजनैतिक शालीनता! आज के सत्तासीन भाजपाई इस बारे में सोशल मीडिया पर कुछ कहेंगे? इसी तरह इंदिरा गांधी और श्री चंद्रशेखर की आपस में बनती नहीं थी! लेकिन जैसी ही चंद्रशेखर को पता चला कि संजय गांधी की हवाई हादसे में मृत्यु हो गई है, वह तुरंत इंदिरा गांधी के पास अफसोस करने के लिए पहुंचे! जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे, उन्हें पता चला कि वाजपेई जी के गुर्दे ठीक नहीं है और इसका इलाज विदेशों में हीरो हो सकते हैं! अपने विदेशी दौरे के समय वह वाजपेई जी को अपने साथ ले गए और उनका इलाज करवाया! बाद में वाजपेई जी ने कहा था कि वह राजीव गांधी की वजह से ही जिंदा है। राजनीतिक मतभेद के बावजूद भी एक दूसरे के प्रति गरिमा, मर्यादा, सम्मान, संयम, सहिष्णुता आदि गुणों को त्यागना नहीं चाहिए। क्या यह बातें आज के सोशल मीडिया में देखने को मिल सकती हैं?लेकिन आज के शूरवीर मीडिया में जो कुछ देखने को मिलता है उपर्युक्त बातों के बिल्कुल विपरीत ही देखने को मिलता है। इसका भरपूर दुरुपयोग हो रहा है। प्रिंट मीडिया तथा इलेक्ट्रॉनिक वीडियो की तरह सोशल मीडिया पर भी खबरें, पोस्ट, वीडियो या अन्य सामग्री छान छान कर लोगों के सामने पेश की जानी चाहिए। इसमें किसी प्रकार की अश्लीलता, ईर्ष्या, विद्रोह, दंगे फसाद फैलाने वाली बात, बदले बाजी, अनैतिकता, बच्चों के दिमाग पर बुरा असर डालने वाली कोई बात पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। सोशल मीडिया का उद्देश्य ज्ञान में वृद्धि करना, स्वस्थ मनोरंजन, शिक्षा प्रदान करना, साहित्य को बढ़ावा देना, पढ़ाई में मदद करना, आपसी सौहार्द पूर्ण संबंधों को बढ़ावा देना, राष्ट्रीय एकता तथा अखंडता को बढ़ावा देना, धार्मिक, समाजिक तथा संप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना होना चाहिए। संविधान के मुताबिक धर्मनिरपेक्षता की रक्षा करना भी सोशल मीडिया का उद्देश होना चाहिए। सोशल मीडिया से संबंधित लोगों की जवाबदेही जरूर होनी चाहिए।
प्रोफेसर शाम लाल कौशल
रोहतक हरियाणा
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