- बिना सेफ्टी बेल्ट व सुरक्षा उपकरण के काम कर रहे मजदूर, दुर्घटना होने की आशंका ज्यादा…
- इतने बड़े पावर प्लांट निर्माण कार्य में आखिर क्यों नहीं रखा जा रहा है सुरक्षा व्यवस्था का ध्यान…
- टरबाइन बनाने से लेकर डैम बनाने तक में काम करने वालों को नहीं मिल रहा सुरक्षा उपकरण…
- निर्माण करने वाले ठेकेदार की चल रही मनमानी नहीं पहुंचते वहां जिम्मेदार जिस वजह से दुर्घटना के आसार बने रहते हैं हमेशा…


–ओंकार पांडेय –
सूरजपुर,22 जून 2024 (घटती-घटना)। जिला सूरजपुर के भैयाथान क्षेत्र में छत्तीसगढ़ हाइड्रो पावर प्लांट का निर्माण किया जा रहा है इस प्लांट में पानी से 24 मेगावाट बिजली उत्पादन की जाएगी जिसके लिए 2021 से निर्माण कार्य चल रहा है जो अभी तक प्रक्रियाधीन है यहां पर तीन कंपनियां अलग-अलग काम कर रही हैं जिन्हें हाइड्रो पावर प्लांट को तैयार करने का जिम्मा दिया गया है पर यहां पर लापरवाही भी देखने को मिल रही है जहां पावर प्लांट निर्माण का कार्य खत्म होने की ओर जा रहा है वैसे-वैसे सुरक्षा अत्यंत जरूरी हो चुकी है पर इसके बावजूद काम करने वाले कंपनियां मजदूरों को बिना सुरक्षा उपकरणों के ही जोखिम भरे कार्य में लगा रखें हैं जिस वजह से दुर्घटना का खतरा काफी ज्यादा है। यही वजह है कि जोखिम भरा काम होने के बावजूद सुरक्षा उपकरण न मुहैया कराने के कारण पिछले महीने दो लोगों की मौत भी हो चुकी है निर्माण क्षेत्र में उसके बावजूद इस मामले को दबाने का प्रयास किया गया, यहां तक की अभी तक मृतकों के घर वालों को मुआवजा भी नहीं मिल पाया है। पावर प्लांट निर्माण के दौरान जब वहां जाकर देखा गया तो काफी खतरों के बीच मजदूर काम कर रहे हैं पर वहां पर उनके सुरक्षा के कोई भी इंतजाम नहीं है ना ही उन्हें सेफ्टी बेल्ट मुहैया कराया गया है ना टोपी न जूता। बिना सुरक्षा उपकरणों के मजदूरों का काम करना मतलब अपनी जान जोखिम में डालना जैसा प्रतीत हो रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार हाइड्रो पावर प्लांट भैयाथान पासल में तैयार हो रहा है जिसे तैयार करने के लिए तीन कंपनियों को इसका जिम्मा दिया गया है, हाइड्रो पावर प्लांट मे कंस्ट्रक्शन का काम सूरजपुर जिले के पीआरए कंपनी के द्वारा किया जा रहा है,सुरंग बनाने का कार्य तपस्या एवम ट्रांसमिशन का कार्य पावर सुल कंपनी के द्वारा किया जा रहा है यह दोनों कंपनियां साउथ की हैं, यदि यह हाइड्रो पावर प्लांट तैयार होता है तो 24 मेगावाट बिजली उत्पादन किया जायेगा, जो सरगुजा क्षेत्र के लिए काफी महत्वपूर्ण उपलब्धी होगी और बिजली की समस्या भी कम होगी,वहीं इसका सीधा लाभ राज्य सरकार को भी होगा, पर समस्या यह है की पीआरए, तपस्या एवं पावर सुल कंस्ट्रक्शन कंपनी में लगभग 200 से ज्यादा मजदूर काम कर रहे हैं और यह काम काफी बड़ा होने के साथ-साथ काफी असुरक्षित भी है क्योंकि यहां पर काम करना प्रकृति के विपरीत है जिस वजह से यहां पर जोखिम ज्यादा है पर इसके बावजूद इस जोखिम भरे काम में बिना सुरक्षा उपकरण के इन कंपनियों के द्वारा मजदूरों से काम करवाया जा रहा है जो मजदूरों के लिए काफी खतरनाक है दो मौत होने के बावजूद अभी तक सबक नहीं लिया गया कंपनियों द्वारा साथ ही इस मामले को भी दबाने का पूरा प्रयास किया गया राजनीतिक तौर पर भी और प्रशासनिक तौर पर भी इस बात को दबाया ही गया। वर्ष 2021 से हाइड्रो पावर कंपनी कंपनी निर्माण का कार्य चालू हैं, जिसमे दो व्यक्ति की मौत हो चुकी है लेकिन अभी तक उनके परिवार में से किसी को भी कंपनी के द्वारा ना तो मुआवजा दिया गया है ना ही कोई अन्य सुविधा ।
250 करोड़ की लागत से बन रहा भैयाथान हाइड्रो पावर प्लांट
बताया जा रहा है की भैयाथान के पासल में निर्माणाधीन पवार प्लांट 250 करोड़ की लागत से बन रहा है। पावर प्लांट से उत्पादित बिजली सरगुजा के लिए एक बड़ी उपलçध भी होगी। वैसे बता दें की पावर प्लांट निजी है और इसका निर्माण कार्य भी निजी कंपनियों के ही पास है जो जैसे तैसे निर्माण कार्य पूरा करने में लगे हैं। सुरक्षा मानकों को लेकर और मजदूरों को मिलने वाली सुरक्षा सुविधाओं के मामले में किसी का ध्यान नहीं है और जिसके कारण ही दो लोगों की मौत हो चुकी है। बताया जा रहा है की निजी कंपनियां अपनी मनमानी करने में माहिर हैं और वह जैसे तैसे निर्माण कार्य संपन्न करा रहे हैं। जिम्मेदार प्लांट के निर्माणाधीन क्षेत्र में पहुंचते भी नहीं और जिसकी वजह से भी मनमानी कंपनियों कि जारी है।
जिम्मेदार अधिकारी आखिर क्यों नहीं जाते निर्माण स्थल पर?
पवार प्लांट निर्माण की देखरेख और निरीक्षण की जिम्मेदारी निभाने वाले जिम्मेदार अधिकारी निर्माण स्थल पर नहीं जाते ऐसा बताया जा रहा है जिसके कारण निर्माण कार्य में लगी कंपनियां अपनी मनमानी कर रही हैं और वह सुरक्षा मामले में बिल्कुल ध्यान नहीं दे रही हैं। बताया जा रहा है की जिम्मेदार अधिकारी निर्माण कार्य में लगी कंपनियों के साथ इस तरह मेलजोल कर चुके हैं की वह जैसा चाहें वह करती हैं और अधिकारियों को उनके अनुसार चलना पड़ता है। कुल मिलाकर जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी भूल गए हैं वह एक जगह बैठकर केवल निगरानी निरीक्षण का कोरम पूरा कर रहे हैं उन्हे निर्माण के दौरान की सुरक्षा को लेकर मजदूरों की कोई चिंता नहीं यह समझ में आता है।
करोड़ों का काम लेने वाली कंपनी सुरक्षा को लेकर लापरवाह क्यों?
पावर प्लांट के निर्माण का कार्य तीन कंपनियां कर रही हैं।। निर्माण कार्य करोड़ों का है वहीं जो कंपनियां यह निर्माण कार्य कर रही हैं वह मजदूरों की सुरक्षा को लेकर लापरवाह हैं। ऐसा क्यों है यह तो कंपनियां ही बता सकती हैं लेकिन वहां के बारे में वहां के ही लोगों की जुबानी यदि बात मानी जाए तो यह कहा जा सकता है की मजदूरों से केवल मजदूरी देकर ही काम लिया जा रहा है उनकी सुरक्षा उनके लिए बेहतरी का कोई उपाय कंपनियां नहीं कर रही हैं और जिसके कारण मजदूरों के साथ कभी भी कार्य के दौरान दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
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