बिना विधिवत एग्रिमेंट के बिना ही करवाया जा रहा है बैल बाजार में अवैध वसूली

-सोनू कश्यप-
प्रतापपुर,26 मई 2024 (घटती-घटना)। प्रतापपुर लॉक के अंतर्गत ग्राम पंचायत केवरा भैंसामुंडा में लगता है साप्ताहिक बड़ा बैल बाजार…कई किलोमीटर से बैल बेचने वाले भैसामुंडा बाजार में बैल बेचने आते हैं और लेने वाले भी बहुत दूर-दूर से आते हैं । वही बिना टेंडर के ही सरपंच सचिव के द्वारा कुछ लोगों को लगाकर करवाया जा रहा है अवैध वसूली। जबकि इस तरह से वसूली नहीं होना चाहिए था इसका विधवत टेंडर होता है,बोली लगती है, नीलामी होता है तब जाकर रजिस्टर्ड होता है। लेकिन यहा तो गांव के विकास से सरपंच सचिव का कोई वास्ता ही नहीं है । इस तरह से वसूली करने से दूर दराज से आए हुए किसान जो की बिना खाए-पिये बड़ी मेहनत से पाई-पाई जोड़कर अपना बैल लेने बाजार में आते हैं ताकि अच्छा बैल लेकर जाएंगे । लेकिन यहां तो उन गरीब किसान लोग का पैसे का बंदरबाट किया जा रहा । इससे लेने वाले गरीब मजदूर किसान को भारी नुकसान हो रहा है । रशीद में बिना सचिव सरपंच के सील लगाये बिना ही थमाया जा रहा है । आखिर पैसा जा कहां रहा है पंचायत में किसी तरह से कोई विकास का कार्य भी नही हो रहा है । ना ही किसी गरीब का भला कर रहे हैं आखिर यह सब वसूल के पैसा को किया तो किया कहा जा रहा है । यह जांच का विषय है सवाल यह उठता है कि इतने दिनों से वसूली किया जा रहा है इसका हिसाब-किताब से लोगों का दूर दूर से कोई वास्ता ही नहीं है। एक बाजार में लगभग 10000 से 12000 हजार रूपए तक सिफऱ् बैल में वसूली करते हैं और 8000 से 10000 सजी वालों,कपड़ा वालों,व्यापारियों,किसानों से वसूला जाता है ।
कई बार सुर्खियों में रहने वाला भैसामुंडा साप्ताहिक बाजार में कार्यवाही के नाम पर किया जाता है। क्या यह सब भ्रष्टाचार में बड़े अधिकारियों का इनको संरक्षण प्राप्त है या सिर्फ अधिकारी लोग भी इसमें संलग्न है जो जांच का विषय है। अब देखना है कि विभाग किस प्रकार से इन लोगों के ऊपर जांच पश्चात कार्रवाई करती है। यदि इस तरह से भ्रष्टाचार होता है तो लगातार ख़बर प्रकाशित होता रहेगा यदि कार्यवाही नहीं होता है तो विभाग के ऊपर भी सवाल खड़ा होना तय है। इसके बाद बड़े अधिकारी भी आ सकते हैं जांच के दायरे में…।
जनपद पंचायत सीईओ राधेश्याम मिर्जा ने कहा
इस विषय में जनपद पंचायत सीईओ राधेश्याम मिर्जा ने कहा कि आपके माध्यम से यह जानकारी प्राप्त हुई है । मामले की जांच कार्यवाही के लिए टीम गठित की जाएगी तथा अवैध वसूली करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए पंचायत के सरपंच और सचिव को कारण बताओं नोटिस जारी कर तलब किया जाएगा।
रसीद में ना सरपंच…ना सचिव का है…सील साइन
साफ तौर पर देखा जा सकता है कि वसूले गए रसीद में ना सरपंच ना सचिन का सील साइन है । बल्कि ठेका समय अवधि कई महीनों से समाप्त हो जाने के बाद भी अवैध वसूली का खेल लंबे समय से चल रहा है । एक दिन में साप्ताहिक बाजार में पशुओं सहित दुकानों में वसूली करीब 20000 रूपए की वसूली की जाती है जिसमें महीने का 80 हजार रुपए का खेल किया जा रहा है। आखिर किसके शह पर इतना बड़ा गोरख धंधा चल रहा है जहां मवेशियों के बाजार से अवैध वसूली की जा रही है वहीं इस पर कार्यवाही नहीं होने से इनके हौसले बुलंद है। इस तरह से पशुओं का भी अवैध कारोबार धड़ल्ले से जारी है। क्षेत्र में इस तरह की भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। जहां सरपंच और सचिव रुपए के लालच में आकर गांव के ही कुछ रसूखदार लोगों को वसूली करने के लिए खुला छूट दे रखे हैं।
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