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नई दिल्ली@सुप्रीम कोर्ट बोला-जंतर-मंतर हिंसा मामले में कम शिकायतें मिलीं

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प्रदर्शनकारियों और पुलिस पर हमले के पर्याप्त सबूत नहीं,जांच कमेटी किसी नतीजे तक नहीं पहुंची

नई दिल्ली,05 नवम्बर 2026। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान हिंसा और पुलिस की ज्यादती की जांच कर रही कमेटी को अब तक बहुत कम शिकायतें मिली हैं। पर्याप्त सामग्री नहीं होने के कारण कमेटी फिलहाल किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी है। पूर्व जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता वाली हाई पावर्ड इन्क्वायरी कमेटी ने कोर्ट को बताया कि शिकायतों के लिए पोर्टल और ईमेल की व्यवस्था करने के बावजूद लोगों ने बहुत कम शिकायतें दर्ज कराईं। 29 अक्टूबर को कमेटी की बैठक में सिर्फ एक शिकायतकर्ता हलफनामे के साथ पहुंचा था। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को पीडि़तों की ओर से दाखिल वीडियो, याचिकाएं और हलफनामे कमेटी को भेजने की अनुमति दी। साथ ही निर्देश दिया कि कमेटी संबंधित पक्षों से जवाब लेकर नियमित अंतराल पर अंतरिम रिपोर्ट पेश करे। कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक, 13 अक्टूबर को शिकायत दर्ज कराने के लिए ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया गया था। इस पर शिकायतकर्ता को नाम, आधार नंबर या दूसरी पहचान संबंधी जानकारी देना जरूरी नहीं है। पोर्टल तक पहुंच सिर्फ कमेटी के चेयरमैन और संबंधित लोगों की है। कमेटी ने देशभर के 149 अखबारों में सार्वजनिक नोटिस प्रकाशित कर शिकायतें आमंत्रित की थीं। ईमेल, डाक और कार्यालय में सीधे शिकायत देने की सुविधा भी रखी गई थी। 17 अक्टूबर को प्रेस रिलीज जारी की गई और 21 अक्टूबर को दोबारा शिकायतें मांगी गईं। इसके बावजूद पोर्टल पर बहुत कम शिकायतें आईं और ईमेल, डाक या सीधे कार्यालय में कोई शिकायत नहीं मिली।
याचिकाकर्ताओं ने कहा…पहले
ही सौंप चुके हैं शिकायतें

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश एडवोकेट वृंदा ग्रोवर ने कहा कि उन्होंने पोर्टल शुरू होने से पहले ही कमेटी को शिकायत दी थी। पोर्टल शुरू होने के बाद तय प्रक्रिया के तहत एक और शिकायत जमा कराई गई थी। सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में दाखिल वीडियो और दूसरी सामग्री कमेटी को भेजी जा सकती है, ताकि हर पीडि़त को अलग-अलग पेश न होना पड़े। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जनहित याचिका दायर करने वाले तीसरे पक्ष के लोग पीडि़तों की संख्या के बारे में दावा कर सकते हैं, जबकि वास्तविक संख्या अलग हो सकती है। उन्होंने उदाहरण दिया कि कोई 50 पीडि़तों का दावा करे, लेकिन वास्तव में सिर्फ 5 पीडि़त हों। ग्रोवर ने कहा कि हिंसा के मामलों में एक भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाने की अनुमति किसने दी थी। उनके मुताबिक, कमेटी की रिपोर्ट में केंद्र सरकार ने इस मामले में कोई जानकारी नहीं दी है।


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