- एंबुलेंस चलाने की जिम्मेदारी या अस्पताल चलाने का अधिकार ? जिला अस्पताल में युवक की भूमिका पर सवाल
- जीवनदीप का कर्मचारी या अस्पताल का सुपर बॉस? आपातकालीन कक्ष की वायरल तस्वीर ने उठाए सवाल…
- ड्राइवर की नियुक्ति,अस्पताल में कथित दखल! जिला अस्पताल की व्यवस्था पर कौन रखेगा नजर?
- आपातकालीन कक्ष में मरीज के उपचार तक पहुंचा एंबुलेंस चालक? नियुक्ति और अधिकारों की जांच जरूरी
- जिला अस्पताल में किसका चलता है आदेश? जीवनदीप से नियुक्त युवक की भूमिका पर उठे सवाल…
- एंबुलेंस चालक की जिम्मेदारी छोड़ दूसरे कार्यों में सक्रिय रहने का आरोप,आपातकालीन कक्ष में मरीज का उपचार करते वायरल फोटो ने बढ़ाए सवाल…
- आखिर किस पद और अधिकार से अस्पताल में कर रहा हस्तक्षेप?
–रवि सिंह-
बैकुंठपुर,02 नवम्बर 2026(घटती-घटना)। कोरिया जिला अस्पताल में इन दिनों एक ऐसे युवक की भूमिका चर्चा का विषय बनी हुई है,जिसकी नियुक्ति कथित तौर पर एंबुलेंस चालक के रूप में बताई जाती है,लेकिन अस्पताल परिसर में उसकी सक्रियता को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं,अस्पताल के विभिन्न कार्यों में कथित हस्तक्षेप से लेकर चिकित्सकों और जनप्रतिनिधियों के बीच उसकी सक्रिय मौजूदगी तक, युवक की भूमिका को लेकर अस्पताल के भीतर और बाहर चर्चाएं होने की बात सामने आ रही है,सवाल यह है कि आखिर युवक की वास्तविक जिम्मेदारी क्या है? क्या उसकी नियुक्ति केवल एंबुलेंस संचालन के लिए हुई है या जीवनदीप समिति के माध्यम से उसे कोई अन्य जिम्मेदारी भी सौंपी गई है?
मामला इसलिए भी गंभीर हो जाता है क्योंकि हाल ही में सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हुई,जिसमें उक्त युवक को आपातकालीन कक्ष में एक मरीज के उपचार सेजुड़ी गतिविधि में देखा जा रहा है,इस तस्वीर ने अस्पताल की कार्यप्रणाली और मरीजों के उपचार में अधिकृत चिकित्सा कर्मियों की भूमिका को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं,यदि युवक चिकित्सकीय कार्य कर रहा था तो किसकी अनुमति से और किस योग्यता के आधार पर? क्या अस्पताल प्रबंधन को इसकी जानकारी थी? या फिर किसी कर्मचारी को अपनी निर्धारित जिम्मेदारी से आगे बढ़कर दूसरे कार्य करने की खुली छूट मिली हुई है?
नियुक्ति एंबुलेंस चालक की, लेकिन सक्रियता दूसरे कामों में?
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि बैकुंठपुर निवासी यह युवक कई वर्षों से जिला अस्पताल में सक्रिय है,उसकी नियुक्ति जीवनदीप समिति के माध्यम से किस पद पर हुई है और उसके कार्यों का दायरा क्या निर्धारित किया गया है, यह स्पष्ट होना जरूरी है,यदि वह एंबुलेंस चालक है तो उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी मरीजों को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाने और निर्धारित एंबुलेंस संचालन से जुड़ी होनी चाहिए,लेकिन आरोप हैं कि युवक अस्पताल के दूसरे कार्यों में भी हस्तक्षेप करता है,अस्पताल के विभिन्न विभागों में उसकी सक्रियता और अधिकारियों-कर्मचारियों के बीच उसकी मौजूदगी को लेकर चर्चाएं होती रहती हैं,कुछ कर्मचारियों के असहज होने की बातें भी सामने आ रही हैं, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित कर्मचारियों के बयान अभी सामने आना बाकी है,ऐसे में अस्पताल प्रबंधन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि युवक की नियुक्ति किस पद पर हुई, उसे कौन-कौन से कार्य सौंपे गए हैं और क्या उसे निर्धारित जिम्मेदारी से अलग किसी अन्य प्रशासनिक अथवा चिकित्सकीय कार्य में लगाया गया है?
आपातकालीन कक्ष में मरीज का उपचार,वायरल तस्वीर ने बढ़ाई चिंता
इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू सोशल मीडिया पर वायरल वह तस्वीर है,जिसमें युवक को आपातकालीन कक्ष में मरीज के उपचार से जुड़ी गतिविधि करते हुए देखा जा रहा है,तस्वीर की वास्तविक परिस्थिति, समय और युवक की भूमिका की पुष्टि होना अभी बाकी है,लेकिन इसने एक महत्वपूर्ण सवाल जरूर खड़ा किया है कि अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में मरीजों की देखभाल और उपचार की जिम्मेदारी किसकी है? आपातकालीन कक्ष किसी भी अस्पताल का अत्यंत संवेदनशील हिस्सा होता है, यहां मरीजों को तत्काल चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता होती है,ऐसे में मरीज के उपचार से जुड़ा प्रत्येक कार्य निर्धारित योग्यता,प्रशिक्षण और अधिकृत चिकित्सकीय जिम्मेदारी के अनुरूप ही होना चाहिए, यदि वायरल तस्वीर में दिखाई दे रही गतिविधि चिकित्सकीय उपचार से संबंधित है तो अस्पताल प्रबंधन को इसकी जांच कर स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित युवक को ऐसा कार्य करने की अनुमति किसने दी थी? क्या वह किसी चिकित्सक या अधिकृत चिकित्सा कर्मी के निर्देश पर सहायता कर रहा था अथवा अपने स्तर पर मरीज के उपचार में शामिल था? दोनों परिस्थितियों में वास्तविक भूमिका सामने आना जरूरी है,सिर्फ तस्वीर के आधार पर किसी व्यक्ति को अयोग्य घोषित करना उचित नहीं होगा,लेकिन तस्वीर में दिखाई दे रही गतिविधि की पुष्टि और उसकी परिस्थितियों की जांच अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी बनती है।
चिकित्सकों और कर्मचारियों के बीच कथित प्रभाव की चर्चा
युवक को लेकर एक अन्य चर्चा अस्पताल के अधिकारियों, चिकित्सकों और कर्मचारियों के बीच उसकी कथित सक्रिय भूमिका को लेकर है,आरोप लगाए जा रहे हैं कि वह अस्पताल में आने वाले जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक व्यक्तियों की आवभगत में भी सक्रिय रहता है, इससे अस्पताल परिसर में उसकी पहचान एक ऐसे व्यक्ति के रूप में बन गई है,जिसकी मौजूदगी केवल एंबुलेंस संचालन तक सीमित नहीं दिखाई देती,कुछ लोगों का दावा है कि अस्पताल के भीतर उसके हस्तक्षेप को लेकर कर्मचारी असहज महसूस करते हैं, लेकिन खुलकर बोलने से बचते हैं,हालांकि,इन दावों की पुष्टि के लिए संबंधित कर्मचारियों और अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने आना आवश्यक है,यहां सवाल किसी कर्मचारी की व्यक्तिगत सक्रियता का नहीं,बल्कि संस्थागत व्यवस्था का है। जिला अस्पताल किसी व्यक्ति विशेष की निजी व्यवस्था नहीं है। यहां हर कर्मचारी और संविदा कर्मी की जिम्मेदारी,अधिकार और कार्यक्षेत्र निर्धारित होना चाहिए, यदि किसी व्यक्ति को उसके पद से अलग अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है तो उसका लिखित आदेश और कार्यविभाजन भी स्पष्ट होना चाहिए।
जीवनदीप समिति की नियुक्ति और कार्यविभाजन सार्वजनिक हो
जिला अस्पताल में जीवनदीप समिति के माध्यम से विभिन्न सेवाओं के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति और व्यवस्था की जाती है। ऐसे में संबंधित युवक की नियुक्ति का आदेश,पदनाम,कार्यविभाजन और सेवा संबंधी शर्तें सामने आनी चाहिए,क्या युवक की नियुक्ति एंबुलेंस चालक के रूप में हुई है? यदि हां,तो क्या उसे अस्पताल के अन्य विभागों में काम करने का कोई लिखित आदेश दिया गया है? क्या उसे मरीजों की देखभाल या उपचार से जुड़ी गतिविधियों में शामिल होने की अनुमति है? यदि ऐसी कोई अनुमति नहीं है तो आपातकालीन कक्ष में उसकी मौजूदगी और गतिविधि की जांच क्यों नहीं होनी चाहिए? इन सवालों का जवाब अस्पताल प्रबंधन को देना चाहिए। इससे न केवल युवक की वास्तविक जिम्मेदारी स्पष्ट होगी,बल्कि अस्पताल में काम करने वाले अन्य कर्मचारियों के कार्यक्षेत्र और जवाबदेही को लेकर भी स्थिति साफ होगी।
सीएस और अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी भी तय हो
जिला अस्पताल में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा सिविल सर्जन सहित संबंधित प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि प्रत्येक कर्मचारी अपने निर्धारित कार्यक्षेत्र में रहकर काम करे,अस्पताल की व्यवस्था किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत पहचान,राजनीतिक संपर्क या अधिकारियों से निकटता के आधार पर संचालित नहीं हो सकती,यदि किसी कर्मचारी अथवा संविदा कर्मी की भूमिका निर्धारित कार्यों से आगे बढ़ रही है तो प्रबंधन को उसका संज्ञान लेना चाहिए, विशेषकर मरीजों के उपचार से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनधिकृत गतिविधि की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए,इसलिए अस्पताल प्रबंधन को संबंधित युवक की नियुक्ति और कार्यविभाजन के दस्तावेजों की जांच करनी चाहिए,वायरल तस्वीर की वास्तविकता और परिस्थितियों की पड़ताल कर यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि क्या संबंधित गतिविधि किसी अधिकृत चिकित्सक के निर्देश पर हुई थी।
सवालों के घेरे में अस्पताल की व्यवस्था,जवाब का इंतजार
जिला अस्पताल आम नागरिकों के उपचार और जीवन रक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र है,यहां आने वाले मरीज और उनके परिजन यह उम्मीद लेकर पहुंचते हैं कि उन्हें योग्य चिकित्सकों और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों से उपचार मिलेगा,ऐसे में किसी कर्मचारी की भूमिका को लेकर उठे सवालों को हल्के में नहीं लिया जा सकता,यदि युवक केवल एंबुलेंस चालक के पद पर नियुक्त है तो उसके कार्यक्षेत्र की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए,यदि उसे कोई अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है तो उसका आदेश सामने आना चाहिए,और यदि आपातकालीन कक्ष में मरीज के उपचार से जुड़ी गतिविधि में उसकी भूमिका नियमों के विपरीत पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई भी होनी चाहिए, आखिर जिला अस्पताल में एंबुलेंस चालक की जिम्मेदारी क्या है और अस्पताल के भीतर उसकी वास्तविक भूमिका क्या बन गई है? क्या जीवनदीप समिति ने उसे किसी विशेष पद पर नियुक्त किया है या फिर अस्पताल प्रबंधन की ओर से उसे अतिरिक्त अधिकार दिए गए हैं? इन सवालों का जवाब सामने आना जरूरी है, अस्पताल किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत सक्रियता से नहीं, बल्कि निर्धारित जिम्मेदारियों, चिकित्सकीय योग्यता और संस्थागत अनुशासन से चलता है, मरीजों की सुरक्षा से जुड़े इस मामले में अस्पताल प्रबंधन की चुप्पी के बजाय स्पष्ट जवाब और निष्पक्ष जांच की अपेक्षा की जा रही है।
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