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अम्बिकापुर@ 791 केस में आरोपी बरी,अब कमियों की समीक्षा कर दोषसिद्धि बढ़ाएगी पुलिस

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आईजी ने ली संभाग स्तरीय बैठक…दुष्कर्म-पॉक्सो मामलों में साक्ष्य मजबूत करने और एक साल से लंबित अपराधों के निराकरण के निर्देश
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,24 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)।
न्यायालयों में आरोपियों के दोषमुक्त होने के मामलों ने पुलिस की विवेचना और अभियोजन की कार्यप्रणाली की समीक्षा को महत्वपूर्ण बना दिया है। सरगुजा रेंज में जुलाई और अगस्त के दौरान सामने आए 791 दोषमुक्ति प्रकरणों की समीक्षा में पुलिस महानिरीक्षक दीपक कुमार झा ने विवेचना की गुणवत्ता,साक्ष्य संकलन और अभियोजन में कमियों को दूर कर दोषसिद्धि का प्रतिशत बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक मामले में आरोपी के बरी होने के कारणों का विश्लेषण कर सुधारात्मक कदम उठाए जाएं,ताकि न्यायालय में मजबूत साक्ष्यों के साथ प्रभावी पैरवी हो सके। 23 अक्टूबर को कोरिया जिले में आयोजित संभाग स्तरीय बैठक में सेशन न्यायालय के 221 और लोअर न्यायालय के 570 मामलों की समीक्षा की गई। आईजी ने निर्देश दिए कि जिला स्तर पर नियमित रूप से ऐसे मामलों की समीक्षा हो। अभियोग पत्र जिला अभियोजन अधिकारी को ई-प्रॉसिक्यूशन के माध्यम से पर्याप्त समय पहले उपलब्ध कराया जाए, जिससे विवेचना और दस्तावेजों में मौजूद कमियों को न्यायालय में विचारण शुरू होने से पहले दूर किया जा सके। दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के मामलों में दोषसिद्धि सुनिश्चित करने के लिए पीडि़ता के बयानों और अन्य साक्ष्यों को विधि के अनुरूप न्यायालय में प्रस्तुत करने पर विशेष जोर दिया गया।
पीडि़ता के पूर्व में दर्ज बयान और न्यायालय में दिए गए बयान में विरोधाभास होने या पक्षद्रोही होने की स्थिति में मामले के तथ्यों के आधार पर वैधानिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। इसी तरह,जांच में शिकायत या एफआईआर झूठी पाए जाने पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा गया। गंभीर अपराधों की विवेचना में वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने पर भी जोर दिया गया। सात वर्ष से अधिक कारावास से दंडनीय अपराधों में एफएसएल अधिकारियों की सहायता से घटनास्थल का निरीक्षण कराने, आवश्यक परीक्षण और रिपोर्ट प्राप्त कर न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। एनडीपीएस मामलों में अनिवार्य कानूनी प्रावधानों के पालन में लापरवाही पर भी आईजी ने नाराजगी जताई। उन्होंने विवेचकों को नियमों की जानकारी देने और त्रुटिरहित जांच के लिए नियमित रिफ्रेशर प्रशिक्षण कराने को कहा। बैठक के दूसरे चरण में रेंज के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों के साथ अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था की समीक्षा की गई। एक साल से अधिक समय से लंबित अपराधों, खात्मा प्रकरणों,एनसीआरपी और साइ-ट्रेन पोर्टल पर लंबित मामलों की स्थिति पर चर्चा हुई। मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स की कार्ययोजना और सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण के उपायों की भी समीक्षा की गई। आईजी ने नेटग्रिड, ई-समंस और ई-साक्ष्य जैसे तकनीकी संसाधनों के प्रभावी उपयोग, लंबित शिकायतों के निराकरण तथा पुलिसकर्मियों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं पर भी आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण विवेचना, समयबद्ध कार्रवाई और तकनीकी संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल से पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार लाया जाए। बैठक में सरगुजा के डीआईजी एवं एसएसपी राजेश अग्रवाल, जशपुर के एसएसपी लाल उमेद सिंह,कोरिया के एसपी हरीश राठौर,बलरामपुर के एसपी वैभव बैंकर, एमसीबी की एसपी रत्ना सिंह सहित संबंधित पुलिस अधिकारी और लोक अभियोजन अधिकारी मौजूद रहे।


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