समाजसेवी सौरभ सिंह ने मुख्यमंत्री को लिखा खुला पत्र वन्यजीव संरक्षण से लेकर प्रशासनिक कामकाज में तेजी लाने का दिया तर्क
-रवि सिंह-
बैकुंठपुर/कोरिया,24 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। सरगुजा वनवृत्त के व्यापक भौगोलिक क्षेत्र और वन प्रशासन से जुड़े कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से अब कोरिया में अलग वनवृत्त के गठन की मांग उठने लगी है, समाजसेवी सौरभ सिंह ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम खुला पत्र जारी कर वर्तमान सरगुजा वनवृत्त का पुनर्गठन करते हुए‘कोरिया वनवृत्त’के नवीन सृजन की मांग की है,उन्होंने इसे क्षेत्र में प्रशासनिक कसावट,वनों के वैज्ञानिक प्रबंधन,वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय समस्याओं के त्वरित निराकरण की दिशा में आवश्यक कदम बताया है,सौरभ सिंह ने अपने पत्र में कहा है कि सरगुजा वनवृत्त के अंतर्गत आने वाले विस्तृत क्षेत्र का प्रशासनिक नियंत्रण और सतत निगरानी करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है,ऐसे में कोरिया और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) क्षेत्र को केंद्र में रखकर स्वतंत्र वनवृत्त का गठन किया जाना चाहिए,ताकि स्थानीय स्तर पर वन विभाग से संबंधित कार्यों की निगरानी और निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
बड़े भौगोलिक क्षेत्र के कारण प्रशासनिक चुनौतियों का हवाला
खुले पत्र में सरगुजा वनवृत्त के व्यापक भौगोलिक विस्तार को प्रमुख आधार बनाया गया है,सौरभ सिंह का कहना है कि जब कई जिलों का वन प्रशासन एक ही वृत्त के अंतर्गत संचालित होता है,तब अधिकारियों के सामने सतत मॉनिटरिंग,योजनाओं के क्रियान्वयन और स्थानीय समस्याओं के समयबद्ध निराकरण जैसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं,उनका तर्क है कि कोरिया वनवृत्त बनने से क्षेत्रीय जरूरतों के अनुरूप योजनाओं की निगरानी की जा सकेगी,स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होने से वन विभाग से जुड़े मामलों में निर्णय लेने और संबंधित अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित करने में भी सुविधा मिलने की उम्मीद है।
वन अधिकार और वन भूमि से जुड़े मामलों में तेजी की उम्मीद…
खुले पत्र में स्वतंत्र वनवृत्त के गठन से मुख्य वन संरक्षक कार्यालय की स्थानीय स्तर पर स्थापना की संभावना का भी उल्लेख किया गया है,सौरभ सिंह का मानना है कि ऐसा होने से वन अधिकार मान्यता पत्रों,क्षतिपूरक वनीकरण और विकास कार्यों से जुड़े वन भूमि डायवर्जन के प्रकरणों के निराकरण में सुविधा हो सकती है,उन्होंने तर्क दिया है कि वन विभाग से जुड़े अनेक मामलों में स्थानीय लोगों,आदिवासी समुदायों और विकास कार्यों से संबंधित पक्षों को विभागीय प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है,ऐसे में क्षेत्र के नजदीक उच्चस्तरीय वन प्रशासनिक कार्यालय होने से संबंधित प्रकरणों की समीक्षा और समन्वय में मदद मिलने की उम्मीद है, हालांकि,इन मामलों के निराकरण की वास्तविक गति विभागीय नियमों,अधिकारों के बंटवारे और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर भी निर्भर करेगी।
लघु वनोपज और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने की बात-सौरभ सिंह ने कोरिया क्षेत्र में तेंदूपत्ता,महुआ और चिरौंजी जैसी लघु वनोपज के संग्रहण का उल्लेख करते हुए कहा है कि अलग वनवृत्त बनने से वानिकी आधारित योजनाओं को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप आगे बढ़ाने का अवसर मिल सकता है, उनके अनुसार, औषधीय पौधों के संवर्धन,वन संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और लघु वनोपज से जुड़ी गतिविधियों को प्रोत्साहन देने से स्थानीय आजीविका के अवसर विकसित करने में मदद मिल सकती है,वन आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी यह पहल उपयोगी साबित हो सकती है।
मुख्यमंत्री से संबंधित विभाग को निर्देश देने की मांग-समाजसेवी सौरभ सिंह ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि वनांचल क्षेत्रों के संतुलित विकास,वन्यजीव संरक्षण और प्रशासनिक सुगमता को ध्यान में रखते हुए सरगुजा वनवृत्त के पुनर्गठन तथा कोरिया वनवृत्त के गठन के प्रस्ताव पर विचार किया जाए,उन्होंने इसके लिए संबंधित विभाग को आवश्यक निर्देश देने की मांग की है,पत्र की प्रतिलिपि वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री,वन विभाग के प्रमुख सचिव,बैकुंठपुर विधायक भैयालाल राजवाड़े और भरतपुर-सोनहत विधायक रेणुका सिंह को भी भेजी गई है,ताकि इस प्रस्ताव पर उनके स्तर से भी उचित कार्रवाई हो सके, अब देखना होगा कि कोरिया में अलग वनवृत्त के गठन की इस मांग पर राज्य शासन और वन विभाग क्या रुख अपनाते हैं, यदि प्रस्ताव पर विचार किया जाता है,तो उसके भौगोलिक दायरे, प्रशासनिक ढांचे, संसाधनों और संभावित लाभों का आकलन महत्वपूर्ण होगा, फिलहाल यह मांग समाजसेवी की ओर से मुख्यमंत्री को भेजे गए खुले पत्र के माध्यम से सामने आई है,शासन की ओर से इस संबंध में किसी निर्णय या कार्रवाई की जानकारी पत्र में नहीं दी गई है।
वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष पर रहेगा जोर…
सौरभ सिंह ने कोरिया और एमसीबी क्षेत्र की वन संपदा तथा जैव-विविधता का उल्लेख करते हुए कहा है कि इस इलाके में वनों की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण को प्राथमिकता दिए जाने की आवश्यकता है,उनके अनुसार,अलग वनवृत्त का गठन होने पर वन्यजीवों की सुरक्षा,जंगलों की निगरानी और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं की रोकथाम के लिए क्षेत्र केंद्रित रणनीति तैयार करने में मदद मिल सकती है, वनांचल क्षेत्रों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार निगरानी और संरक्षण संबंधी कार्यों को गति देना इस प्रस्ताव का एक प्रमुख उद्देश्य बताया गया है,हालांकि,इन संभावित लाभों को प्रभावी रूप से हासिल करने के लिए नए वनवृत्त की प्रशासनिक संरचना, संसाधनों और कार्यक्षेत्र का स्पष्ट निर्धारण भी जरूरी होगा।
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