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बैकुंठपुर@बैकुंठपुर निकाय चुनाव में गोंडवाना की एंट्री…आफताब,अभिनेन्द्र से मुलाकात ने बढ़ाई सियासी हलचल!

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  • भाजपा-कांग्रेस के दावेदारों पर गोंडवाना की नजर? आफताब और अभिनेन्द्र से संपर्क के बाद चर्चाएं तेज…
  • आफताब अहमद और अभिनेन्द्र चंदेल से निलेश पाण्डेय की मुलाकात,क्या निकाय चुनाव में तीसरा विकल्प भी उतरेगा मैदान में?
  • कांग्रेस से निष्कासित आफताब अहमद और भाजपा से जुड़े पार्षद अभिनेन्द्र सिंह चंदेल के घर पहुंचे गोंडवाना के निलेश पाण्डेय,टिकट की दौड़ के बीच तीसरे विकल्प की चर्चा तेज
  • आफताब की कांग्रेस वापसी अधर में,गोंडवाना से संपर्क की चर्चा, बैकुंठपुर में नए सियासी समीकरण के संकेत
  • एक भाजपा से जुड़ा पार्षद, दूसरा कांग्रेस से निष्कासित नेता—दोनों तक पहुंचे गोंडवाना के निलेश पाण्डेय
  • टिकट नहीं मिला तो क्या बदलेंगे रास्ते? आफताब-अभिनेन्द्र से गोंडवाना की मुलाकात ने उठाए सवाल
  • बैकुंठपुर में तीसरे विकल्प की तैयारी? गोंडवाना ने शुरू की प्रत्याशियों की तलाश, दो चर्चित चेहरों से संपर्क
  • आफताब अहमद और अभिनेन्द्र चंदेल से निलेश पाण्डेय की मुलाकात,क्या निकाय चुनाव में तीसरा विकल्प भी उतरेगा मैदान में?
  • कांग्रेस से निष्कासित आफताब अहमद और भाजपा से जुड़े पार्षद अभिनेन्द्र सिंह चंदेल के घर पहुंचे गोंडवाना के निलेश पाण्डेय,टिकट की दौड़ के बीच तीसरे विकल्प की चर्चा तेज


-रवि सिंह-
बैकुंठपुर,24 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)।
नगर पालिका चुनाव की सरगर्मी बढ़ने के साथ बैकुंठपुर की राजनीति में अब तीसरे विकल्प की आहट भी सुनाई देने लगी है,अब तक अध्यक्ष पद के चुनाव की चर्चाएं मुख्य रूप से भाजपा और कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों के इर्द-गिर्द घूम रही थीं,लेकिन गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की सक्रियता ने राजनीतिक समीकरणों में एक नया पहलू जोड़ दिया है,पार्टी ने जिला मुख्यालय बैकुंठपुर के लिए निलेश पाण्डेय को प्रभारी नियुक्त किया है,जिम्मेदारी मिलने के बाद वे संभावित प्रत्याशियों से संपर्क साधने में जुटे हैं, इसी सिलसिले में उनकी मुलाकात दो ऐसे नेताओं से हुई है, जिनका जुड़ाव अलग-अलग राष्ट्रीय दलों से है और जो नगर पालिका चुनाव में अपनी राजनीतिक संभावनाएं तलाश रहे हैं।
इनमें वर्तमान पार्षद अभिनेन्द्र सिंह चंदेल और कांग्रेस से निष्कासित आफताब अहमद उर्फ छोटे खान के नाम शामिल हैं,अभिनेन्द्र चंदेल निर्दलीय चुनाव जीतने के बाद भाजपा से जुड़ाव बनाए हुए हैं,जबकि आफताब अहमद की राजनीतिक पृष्ठभूमि कांग्रेस से जुड़ी रही है,दोनों के घर जाकर निलेश पाण्डेय की मुलाकात करना ऐसे समय चर्चा का विषय बना है,जब बैकुंठपुर नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए विभिन्न राजनीतिक दावेदार अपनी-अपनी पार्टी से टिकट मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं,इन मुलाकातों को लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह की संभावनाओं पर चर्चा होने लगी है,क्या गोंडवाना गणतंत्र पार्टी स्थानीय पहचान रखने वाले नेताओं को अपने साथ जोड़कर चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है? क्या भाजपा और कांग्रेस में टिकट नहीं मिलने की स्थिति में कुछ दावेदार तीसरे विकल्प की ओर देख सकते हैं? या फिर ये मुलाकातें संभावित प्रत्याशियों से परिचय और राजनीतिक संवाद तक सीमित हैं? फिलहाल किसी के पार्टी प्रवेश, टिकट या चुनावी गठजोड़ की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है,इसलिए इन मुलाकातों को बगावत अथवा दल-बदल का संकेत संभवित है,लेकिन इतना जरूर है कि गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की सक्रियता ने बैकुंठपुर के चुनावी विमर्श में एक नया सवाल खड़ा कर दिया है की क्या इस बार मुकाबले का गणित केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच ही सीमित रहेगा, या तीसरा दल भी अध्यक्ष पद की दौड़ में अपनी जगह बनाने का प्रयास करेगा?
निलेश पाण्डेय की सक्रियता, संभावित प्रत्याशियों की तलाश शुरू
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने बैकुंठपुर की राजनीतिक गतिविधियों के लिए निलेश पाण्डेय को प्रभारी बनाया है,इसके बाद संभावित प्रत्याशियों से संपर्क साधने की उनकी कवायद को पार्टी की स्थानीय चुनावी तैयारी के संदर्भ में देखा जा रहा है,किसी भी दल के लिए नगरीय निकाय चुनाव में उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया केवल नाम तय करने तक सीमित नहीं होती, स्थानीय पहचान रखने वाले चेहरों की तलाश, संभावित दावेदारों से संवाद, संगठन का विस्तार और चुनाव लड़ने के इच्छुक लोगों की राजनीतिक स्थिति समझना भी इस प्रक्रिया के हिस्से हो सकते हैं,निलेश पाण्डेय की मुलाकातें इस संदर्भ में महत्वपूर्ण दिखाई देती हैं,क्योंकि जिन दो नेताओं से वे मिले हैं, उनका स्थानीय निकाय की राजनीति से संबंध रहा है, एक वर्तमान पार्षद हैं,जिन्होंने पहले निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर अपनी पहचान बनाई,दूसरे ऐसे नेता हैं,जिनका कांग्रेस से पुराना संबंध रहा है,लेकिन फिलहाल वे पार्टी से बाहर हैं,यह स्पष्ट नहीं है कि पार्टी ने इनके अलावा किन लोगों से संपर्क किया है,अध्यक्ष पद के लिए कितने संभावित नामों पर विचार हो रहा है या किसी नाम को लेकर कोई औपचारिक सहमति बनी है,फिर भी स्थानीय चुनाव में संभावित प्रत्याशियों तक पहुंच बनाना तीसरे दल के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक गतिविधि है,अब देखना होगा कि यह शुरुआती संपर्क आगे किसी औपचारिक घोषणा में बदलता है या नहीं।
अभिनेन्द्र सिंह चंदेलः निर्दलीय जीत से भाजपा के जुड़ाव तक
अभिनेन्द्र सिंह चंदेल का नाम बैकुंठपुर की स्थानीय राजनीति में इसलिए चर्चा में है, क्योंकि वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर वर्तमान में पार्षद हैं और भाजपा से अपना जुड़ाव बनाए हुए हैं,नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर उनके नाम की चर्चा भी संभावित दावेदारों के संदर्भ में होती रही है,उनकी राजनीतिक स्थिति एक महत्वपूर्ण पहलू सामने लाती है,निर्दलीय चुनाव जीतने का उनका अनुभव स्थानीय निकाय की राजनीति से जुड़ा है,जबकि भाजपा से उनका वर्तमान जुड़ाव उन्हें राष्ट्रीय दल के राजनीतिक समीकरणों से भी जोड़ता है,ऐसे में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रभारी निलेश पाण्डेय का उनके घर जाकर मिलना चर्चा का विषय बनना स्वाभाविक है,लेकिन इस मुलाकात से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि अभिनेन्द्र चंदेल भाजपा छोड़ने जा रहे हैं या गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने का फैसला कर चुके हैं,उनकी ओर से ऐसा कोई अधिकृत बयान सामने नहीं आया है,अब राजनीतिक नजरिए से महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि यदि भाजपा उन्हें टिकट देती है,तो क्या वे पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ेंगे? और यदि टिकट नहीं मिलता,तो क्या वे संगठन के फैसले को स्वीकार करेंगे या दूसरे विकल्पों पर विचार करेंगे? फिलहाल इन सवालों के उत्तर भविष्य के घटनाक्रम पर निर्भर हैं, उनसे हुई मुलाकात को तीसरे दल की संभावित प्रत्याशी तलाश का हिस्सा माना जा सकता है, लेकिन इसे किसी राजनीतिक समझौते का प्रमाण कहना उचित नहीं होगा।
आफताब अहमद उर्फ छोटे खानः कांग्रेस से निष्कासन के बाद भी अधूरा राजनीतिक अध्याय?
इस पूरे घटनाक्रम में आफताब अहमद उर्फ छोटे खान का नाम अधिक चर्चा में है,उनका राजनीतिक जुड़ाव लंबे समय तक कांग्रेस से रहा,लेकिन पिछले नगर पालिका चुनाव के दौरान हुए विवाद के बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था,अब आगामी निकाय चुनाव फिर सामने है और उनकी कांग्रेस में वापसी की संभावना पर अनिश्चितता बनी हुई है, बैकुंठपुर नगर पालिका के पिछले अध्यक्ष पद के चुनाव का घटनाक्रम आज भी स्थानीय राजनीति के संदर्भ में चर्चा में आता है,उस चुनाव में कांग्रेस के पास पार्षदों की संख्या अधिक होने के बावजूद भाजपा की नविता शिवहरे अध्यक्ष निर्वाचित हुई थीं,चुनाव के बाद पार्टी के भीतर विवाद हुआ और आफताब अहमद सहित कुछ लोगों के खिलाफ निष्कासन की कार्रवाई की गई थी,स्थानीय राजनीतिक चर्चा में आफ ताब अहमद को उस चुनाव के बाद पैदा हुए विवाद से जोड़कर देखा जाता रहा है, लेकिन यह कहना कि कांग्रेस नगर पालिका में अध्यक्ष पद हासिल नहीं कर पाई तो उसका पूरा कारण केवल एक व्यक्ति था, पूरे घटनाक्रम का अत्यधिक सरलीकरण होगा,अध्यक्ष पद के चुनाव में पार्टी के भीतर मतदान,पार्षदों की भूमिका और उस समय के राजनीतिक समीकरण भी महत्वपूर्ण थे, निष्कासन के बाद आफताब अहमद की कांग्रेस में वापसी को लेकर प्रयास और चर्चाएं होने की बात आपके इनपुट में सामने आई है,लेकिन अब तक उनकी औपचारिक वापसी नहीं हुई है,यही स्थिति उनके सामने आगामी चुनाव के विकल्पों का सवाल खड़ा करती है, यदि कांग्रेस में वापसी का रास्ता नहीं खुलता और पार्टी से टिकट पाने की संभावना भी नहीं रहती,तो वे किसी अन्य राजनीतिक मंच के बारे में विचार कर सकते हैं,इसी संदर्भ में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से संपर्क की चर्चा को देखा जा रहा है, हालांकि उनके पार्टी प्रवेश या अध्यक्ष पद की दावेदारी की पुष्टि नहीं हुई है।
दोनों नेताओं के बीच तालमेल की चर्चा…लेकिन कोई पुष्टि नहीं…
स्थानीय स्तर पर यह अनुमान भी लगाया जा रहा है कि अभिनेन्द्र चंदेल और आफताब अहमद,भले ही अलग-अलग राष्ट्रीय दलों से जुड़े रहे हों,लेकिन टिकट वितरण की स्थिति के अनुसार भविष्य में किसी प्रकार का राजनीतिक तालमेल बना सकते हैं,इस संभावना के पीछे तर्क यही दिया जा रहा है कि यदि दोनों में से किसी को अपने-अपने वर्तमान राजनीतिक विकल्पों से संतोषजनक अवसर नहीं मिलता, तो वे नए रास्ते तलाश सकते हैं,ऐसी स्थिति में किसी तीसरे दल के साथ जुड़ना या एक-दूसरे के प्रति समर्थन की रणनीति बनाना संभावित विकल्प हो सकता है,लेकिन दोनों के बीच किसी समझौते,साझा रणनीति अथवा एक-दूसरे के पक्ष में चुनावी समर्थन का कोई प्रमाण फिलहाल सामने नहीं आया है, इसलिए उनके बीच तालमेल को निश्चित मानना उचित नहीं होगा, राजनीति में पुराने संबंध और व्यक्तिगत संपर्क कई बार नए समीकरणों की चर्चा को जन्म देते हैं,लेकिन वास्तविक गठजोड़ तभी माना जा सकता है,जब संबंधित नेता अपनी भूमिका स्पष्ट करें और कोई औपचारिक निर्णय सामने आए।
भाजपा-कांग्रेस की टिकट प्रक्रिया भी तय करेगी आगे की दिशा
बैकुंठपुर नगर पालिका अध्यक्ष पद को लेकर भाजपा और कांग्रेस के दावेदार अभी अपने-अपने संगठन के फैसले का इंतजार कर रहे हैं, संभावित उम्मीदवार अपने स्तर पर संपर्क बढ़ा रहे हैं, लेकिन अंतिम टिकट किसे मिलेगा, यह अभी तय नहीं है, ऐसे में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की सक्रियता को टिकट की राजनीति के समानांतर उभरती संभावना के रूप में देखा जा सकता है, यदि किसी दावेदार को टिकट नहीं मिलता, तो उसके अगले कदम पर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो सकती हैं, किसी भी नेता के सामने संगठन के फैसले को स्वीकार करने, पार्टी में बने रहने, निर्दलीय चुनाव लड़ने या किसी दूसरे दल से जुड़ने के विकल्प हो सकते हैं, वह किस दिशा में आगे बढ़ेगा, इसका निर्णय वही नेता करेगा, इसी वजह से निलेश पाण्डेय की मुलाकातों का वास्तविक महत्व आने वाले दिनों में ही स्पष्ट होगा, भाजपा और कांग्रेस की टिकट घोषणा के बाद यह देखना होगा कि अभिनेन्द्र चंदेल और आफताब अहमद अपनी राजनीतिक स्थिति को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।
क्या गोंडवाना गणतंत्र पार्टी बन सकती है आफताब का तीसरा विकल्प?
आफताब अहमद की राजनीतिक स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उनकी पुरानी पार्टी कांग्रेस है,लेकिन फिलहाल वे संगठन का हिस्सा नहीं हैं,ऐसे में आगामी चुनाव में उनकी भूमिका का प्रश्न स्वाभाविक रूप से उठता है, यदि उनकी कांग्रेस में वापसी नहीं होती,तो उनके सामने निर्दलीय चुनाव लड़ने या किसी अन्य राजनीतिक दल के साथ जुड़ने जैसे विकल्प हो सकते हैं, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रभारी से हुई मुलाकात को इसी संभावना के संदर्भ में देखा जा रहा है,लेकिन किसी संभावित विकल्प पर चर्चा और उसके लिए औपचारिक निर्णय लेने में अंतर होता है,अभी यह स्पष्ट नहीं है कि आफताब अहमद गोंडवाना से जुड़ने के इच्छुक हैं या निलेश पाण्डेय ने उन्हें पार्टी की ओर से किसी प्रस्ताव के साथ आमंत्रित किया है,दोनों पक्षों की ओर से सार्वजनिक पुष्टि के बिना इस विषय को संभावित राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए,फिर भी यदि भविष्य में आफताब अहमद किसी तीसरे दल से जुड़ते हैं,तो वह उनके राजनीतिक सफर में एक नया अध्याय होगा, उनकी स्थानीय पहचान और पिछले चुनाव से जुड़ी पृष्ठभूमि के कारण ऐसी किसी घोषणा पर राजनीतिक हलकों में चर्चा होना स्वाभाविक है।
क्या बैकुंठपुर में त्रिकोणीय मुकाबले की जमीन तैयार हो रही है?
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की सक्रियता के बाद बैकुंठपुर नगर पालिका चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना पर चर्चा होने लगी है,अब तक स्थानीय चुनाव की मुख्य राजनीतिक तस्वीर भाजपा और कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों के इर्द-गिर्द रही है,तीसरे दल की ओर से संभावित दावेदारों से संपर्क किए जाने की खबर इस तस्वीर में एक नया पहलू जोड़ती है,हालांकि किसी दल का प्रभारी नियुक्त होना या संभावित प्रत्याशियों से मुलाकात करना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि पार्टी प्रभावी चुनावी मुकाबले के लिए तैयार है,इसके लिए उम्मीदवारों की औपचारिक घोषणा, संगठन की सक्रियता,चुनावी अभियान और स्थानीय मुद्दों पर पार्टी की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी,यदि गोंडवाना गणतंत्र पार्टी किसी स्थानीय पहचान वाले उम्मीदवार को अध्यक्ष पद के लिए उतारती है,तो वह चुनावी प्रतिस्पर्धा में एक नया विकल्प प्रस्तुत कर सकती है, लेकिन इसका असर किस दल पर पड़ेगा या कौन-सा उम्मीदवार कितना समर्थन हासिल करेगा,इसका अनुमान अभी लगाना संभव नहीं है।
फिलहाल संपर्क की राजनीति,अगला कदम बाकी
बैकुंठपुर में निलेश पाण्डेय की नियुक्ति और संभावित प्रत्याशियों से संपर्क ने गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की स्थानीय सक्रियता को चर्चा में ला दिया है, अभिनेन्द्र सिंह चंदेल और आफताब अहमद से उनके घर जाकर मुलाकात होना इस घटनाक्रम का प्रमुख पहलू है, एक ओर भाजपा से जुड़े वर्तमान पार्षद अभिनेन्द्र चंदेल की संभावित दावेदारी और पार्टी के साथ उनका संबंध चर्चा में है, दूसरी ओर कांग्रेस से निष्कासित आफताब अहमद के सामने आगामी चुनाव में राजनीतिक विकल्प का प्रश्न है,दोनों से संपर्क को पार्टी के लिए संभावित प्रत्याशियों से संवाद की प्रक्रिया के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन किसी के पार्टी बदलने,टिकट पाने या चुनावी समझौते की पुष्टि अभी नहीं हुई है,फिलहाल बैकुंठपुर की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि किसने किससे मुलाकात की, बल्कि यह है कि इन मुलाकातों के बाद कोई ठोस राजनीतिक निर्णय सामने आता है या नहीं,गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की ओर से उम्मीदवार घोषित होने, आफताब अहमद की राजनीतिक स्थिति स्पष्ट होने और अभिनेन्द्र चंदेल के अगले कदम सामने आने के बाद ही तस्वीर अधिक साफ होगी, आगामी नगर पालिका चुनाव में तीसरे विकल्प की संभावना को लेकर चर्चा शुरू जरूर हो गई है,लेकिन उसे वास्तविक त्रिकोणीय मुकाबले में बदलने के लिए अभी कई राजनीतिक निर्णय बाकी हैं।


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