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नई दिल्ली@कैंसर रोधी दवाओं पर 30′ ट्रेड मार्जिन की सीमा

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सुप्रीम कोर्ट ने पूछा-दूसरी दवाओं की कीमत पर रोक क्यों नहीं,27 अक्टूबर तक जवाब मांगा


नई दिल्ली,12 अक्टूबर 2026। सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर की दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30′ तक सीमित करने के केंद्र के फैसले पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि सरकार के जवाब में खुश होने जैसा कुछ नहीं है। कोर्ट ने पूछा कि जब कैंसर की दवाओं पर मार्जिन तय किया जा सकता है,तो दूसरी दवाओं पर ऐसा क्यों नहीं किया जा सकता? केंद्र ने बताया कि इस फैसले से मरीजों को सालाना करीब 2,500 करोड़ रुपए की बचत होने की उम्मीद है। कोर्ट ने दवाओं की कीमत तय करने के तरीके पर जानकारी देने के लिए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को 27 अक्टूबर तक का समय दिया। सरकार के फार्मास्यूटिकल्स विभाग की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, 2024-25 में भारत में कैंसर-रोधी दवाओं की सालाना बिक्री 5,281 करोड़ रही। 2021-22 में यह 3,382 करोड़ थी। यानी तीन साल में बिक्री करीब 56′ बढ़ी। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी पेश हुए। बेंच ने कहा, हम मानते हैं कि परिवहन,कच्चे माल, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और दूसरी लागत होती हैं। लेकिन ये सभी एमआरपी में शामिल होती हैं। उन्हें असली लागत से 400 गुना ज्यादा कीमत पर बेचने की अनुमति देने का क्या तर्क है? आप ऐसा कैसे होने दे सकते हैं? भाटी ने कहा कि भारत में दवाओं की कीमत दुनिया में सबसे कम है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से इलाज के लिए बड़ी संख्या में लोग भारत आते हैं। तुषार मेहता ने कहा कि दवाओं की कीमत एक सीमा से ज्यादा नियंत्रित नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि ज्यादा मार्जिन मिलने से दवाएं दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचती हैं। जस्टिस मेहता ने कहा, ‘अगर डीपीसीओ से मंजूर दवाएं ग्राहकों तक नहीं पहुंचतीं, तो मरीजों तक उन्हें पहुंचाना सरकार की जिम्मेदारी है। असल विवाद यह है कि डीपीसीओ की नियंत्रित सूची में कौन-सी दवाएं होनी चाहिए और कौन-सी नहीं। ‘केंद्र ने 551 पन्नों के विस्तृत हलफनामे में कहा कि नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन्स स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय तैयार और प्रकाशित करता है। हलफनामे के मुताबिक, नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन्स को 2011, 2015 और हाल में 2022 में प्रकाशित किया गया था। केंद्र ने कहा कि नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंशियल मेडिसिन्स स्टैंडिंग नेशनल कमेटी ऑन मेडिसिन्स तैयार करती है। इसमें सभी संबंधित पक्ष और विशेषज्ञ शामिल होते हैं।


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