नगरसेना की नौकरी छोड़ राजनीति में आए,वार्ड 7 से शुरू हुआ सफर वार्ड 6 तक पहुंचा,दो बार पार्षद और 12 मत लेकर बने उपाध्यक्ष
दो बार पार्षद, उपाध्यक्ष की कुर्सी पर 12 मत—अब अध्यक्ष पद की दौड़ में आशीष यादव ‘लल्ला’
नगरसेना से सियासत तक लल्ला का सफर,अब बैकुंठपुर की अध्यक्षी पर नजर
वार्ड 7 की पहली जीत से अध्यक्ष पद की दावेदारी तक, लल्ला का राजनीतिक सफर चर्चा में…
शैलेश शिवहरे को हराकर दूसरी बार पार्षद बने लल्ला, अब अध्यक्षी की दावेदारी पर निगाह…
20 मतों में 12 अपने पक्ष में किए,उपाध्यक्ष बने लल्ला,अब अध्यक्ष पद की तैयारी?
-राजन पाण्डेय-
बैकुंठपुर,22 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। कोरिया जिले का पहला नगर शहर बैकुंठपुर एक बार फिर नगर पालिका चुनाव की राजनीतिक सरगर्मी के बीच खड़ा है, इस चुनाव को लेकर शहर की राजनीति में अभी से तरह-तरह के सवाल उठने लगे हैं,इस बार नगर पालिका में किसकी सरकार बनेगी,कौन से चेहरे मैदान में उतरेंगे,दोनों राष्ट्रीय दल किस रणनीति के साथ चुनाव लड़ेंगे और आखिर शहर की सत्ता की कुर्सी किसके हिस्से आएगी—इन सवालों के जवाब चुनावी तस्वीर साफ होने के साथ ही सामने आएंगे। सबसे ज्यादा चर्चा फिलहाल नगर पालिका अध्यक्ष पद के संभावित उम्मीदवारों को लेकर है,कांग्रेस की ओर से अध्यक्ष पद का उम्मीदवार कौन होगा,यह अभी स्पष्ट नहीं है,पार्टी स्तर पर अंतिम निर्णय सामने आना बाकी है,लेकिन इस बीच एक नाम ऐसा है जिसकी राजनीतिक यात्रा,नगर पालिका में अनुभव और संगठन में सक्रियता के कारण अध्यक्ष पद की दावेदारी को लेकर चर्चा हो रही है। यह नाम है आशीष यादव उर्फ ‘लल्ला’ का, आशीष यादव का पूरा नाम आशीष यादव है, जबकि शहर की राजनीति और आम लोगों के बीच वे ‘लल्ला’ नाम से भी पहचाने जाते हैं, बैकुंठपुर निवासी आशीष यादव ने राजनीति में आने से पहले नगरसेना में नौकरी की,वर्ष 2007 से 2015 तक नगरसेना में सेवा देने के बाद वर्ष 2015 में नौकरी छोड़कर राजनीति की राह पकड़ी,इसके बाद उन्होंने चुनावी राजनीति में अपना पहला कदम पार्षद के चुनाव से रखा और फिर लगातार नगर पालिका की राजनीति में अपनी जगह बनाते चले गए।
20 मतों में 12 मत लेकर बने नगर पालिका उपाध्यक्ष-2021 का चुनाव आशीष यादव के राजनीतिक सफर में एक और महत्वपूर्ण मोड़ लेकर आया,पार्षद बनने के बाद नगर पालिका में उपाध्यक्ष पद का चुनाव हुआ, इस चुनाव में आशीष यादव का मुकाबला भानु पाल से हुआ,कुल 20 मतों में आशीष यादव को 12 मत मिले,जबकि भानु पाल को 8 मत प्राप्त हुए, इस तरह आशीष यादव ने 4 मतों के अंतर से उपाध्यक्ष पद का चुनाव जीत लिया और नगर पालिका परिषद बैकुंठपुर के उपाध्यक्ष बने, यही वह समय था जब एक वार्ड पार्षद के रूप में शुरू हुई उनकी राजनीतिक यात्रा नगर पालिका के महत्वपूर्ण पद तक पहुंच गई।
अध्यक्ष की कुर्सी भाजपा के पास गई, उपाध्यक्ष पद कांग्रेस के पास रहा-2021 की नगर पालिका परिषद में अध्यक्ष पद का समीकरण कांग्रेस के लिए अपेक्षित नहीं रहा, अध्यक्ष की कुर्सी भाजपा के पास चली गई,ऐसे राजनीतिक माहौल में कांग्रेस की ओर से उपाध्यक्ष पद संभालने की जिम्मेदारी आशीष यादव के पास आई,आशीष यादव के लिए यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि अध्यक्ष पद भले ही उनके दल के पास नहीं था,लेकिन उपाध्यक्ष के रूप में वे नगर पालिका परिषद की कार्यप्रणाली का हिस्सा बने,उपाध्यक्ष रहते हुए उन्होंने अपने वार्ड के साथ-साथ शहर के अलग-अलग मुद्दों को लेकर सक्रिय रहने का प्रयास किया,उनके समर्थक उनके इसी कार्यकाल को अब अध्यक्ष पद की संभावित दावेदारी के आधार के रूप में देखते हैं।
कांग्रेस ने बनाया ब्लॉक अध्यक्ष, बढ़ा संगठनात्मक दायरा-आशीष यादव की राजनीतिक सक्रियता केवल नगर पालिका तक सीमित नहीं रही,इस बार उन्हें कांग्रेस का ब्लॉक अध्यक्ष भी बनाया गया,ब्लॉक अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनका संगठनात्मक दायरा भी बढ़ा,नगर पालिका के पार्षद और उपाध्यक्ष के रूप में स्थानीय राजनीति का अनुभव और कांग्रेस संगठन में जिम्मेदारी—इन दोनों को उनके समर्थक अध्यक्ष पद की दावेदारी के लिए महत्वपूर्ण आधार के रूप में देखते हैं, यही वजह है कि नगर पालिका अध्यक्ष पद की चर्चा शुरू होते ही आशीष यादव का नाम भी सामने आने लगा है।
लेकिन अध्यक्ष पद की राह इतनी आसान भी नहीं-आशीष यादव की राजनीतिक यात्रा भले ही लंबी हो चुकी हो, लेकिन नगर पालिका अध्यक्ष पद की दावेदारी का अगला चरण पूरी तरह पार्टी के निर्णय पर निर्भर करेगा,सबसे बड़ा सवाल यही है कि कांग्रेस किसे अपना अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाएगी? अभी तक इस संबंध में कोई अंतिम नाम सामने नहीं आया है,इसलिए आशीष यादव को अध्यक्ष पद का अधिकृत उम्मीदवार मान लेना जल्दबाजी होगी,कांग्रेस के भीतर टिकट को लेकर अलग-अलग राजनीतिक समीकरण बन सकते हैं। पार्टी किस चेहरे को मैदान में उतारेगी,यह संगठन के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा, आशीष यादव के सामने भी यही चुनौती है कि पार्षद और उपाध्यक्ष के रूप में उनके अनुभव को पार्टी अध्यक्ष पद की उम्मीदवारी के लिए कितना महत्व देती है।
वार्ड की राजनीति से शहर की अध्यक्षी तक पहुंचने की कोशिश-आशीष यादव की राजनीतिक यात्रा को अगर क्रम से देखा जाए तो यह एक सामान्य नौकरी से शुरू होकर स्थानीय राजनीति के महत्वपूर्ण पद तक पहुंचने की कहानी है,2007 से 2015—नगरसेना में नौकरी,2015—नौकरी छोड़कर राजनीति की ओर कदम,पहली बार वार्ड क्रमांक 7 से पार्षद का चुनाव,घनश्याम साहू को हराकर पहली बार पार्षद, 2021—वार्ड क्रमांक 6 से दूसरी बार पार्षद का चुनाव,पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष शैलेश शिवहरे को हराकर दूसरी बार पार्षद,उपाध्यक्ष चुनाव में भानु पाल के मुकाबले 20 में से 12 मत, नगर पालिका परिषद बैकुंठपुर के उपाध्यक्ष बने,इसके बाद कांग्रेस संगठन में ब्लॉक अध्यक्ष की जिम्मेदारी,अब इसी राजनीतिक सफर के बाद अध्यक्ष पद की संभावित दावेदारी की चर्चा सामने है।
लल्ला की दावेदारी में उनके समर्थक गिना रहे ये आधार,आशीष यादव के समर्थकों के अनुसार अध्यक्ष पद की चर्चा में उनके नाम के पीछे मुख्य रूप से ये बातें हैं…
– पहलाः- दो बार पार्षद का चुनाव जीतने का अनुभव।
– दूसराः- नगर पालिका उपाध्यक्ष के रूप में परिषद की कार्यप्रणाली का अनुभव।
– तीसराः- 20 में से 12 मत हासिल कर उपाध्यक्ष बनने का चुनावी रिकॉर्ड।
– चौथाः- वार्ड क्रमांक 6 में श्रीराम चौक, शहीद स्मारक और हाई स्कूल में लाइट स्थापना जैसे कार्यों का दावा।
– पांचवांः- लोगों के बीच मिलनसार व्यवहार और जनसंपर्क।
– छठाः- कांग्रेस संगठन में ब्लॉक अध्यक्ष की जिम्मेदारी, इन आधारों के कारण कांग्रेस के भीतर उनके नाम को अध्यक्ष पद की संभावित दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है।
अब कांग्रेस के फैसले पर टिकी नजर-बैकुंठपुर नगर पालिका चुनाव की तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है,अध्यक्ष पद के लिए कौन मैदान में उतरेगा, कांग्रेस और भाजपा किस रणनीति से चुनाव लड़ेंगे और शहर की जनता किस मुद्दे को प्राथमिकता देगी…इन सभी सवालों के जवाब आगे सामने आएंगे, फिलहाल कांग्रेस के सामने उम्मीदवार चयन का सवाल है और आशीष यादव ‘लल्ला’ का नाम इसी चर्चा के बीच सामने है,उनकी राजनीतिक यात्रा में नगरसेना की नौकरी से लेकर दो बार पार्षद और फिर नगर पालिका उपाध्यक्ष बनने तक कई पड़ाव हैं,अब वे अध्यक्ष पद की संभावित दावेदारी के कारण एक बार फिर शहर की राजनीति के केंद्र में हैं,लेकिन राजनीति में दावेदारी और टिकट के बीच का रास्ता पार्टी के निर्णय से होकर गुजरता है,इसलिए फिलहाल आशीष यादव को कांग्रेस के अध्यक्ष पद के संभावित दावेदार के रूप में देखा जा रहा है, अंतिम उम्मीदवार के रूप में नहीं,बैकुंठपुर की नगर पालिका राजनीति में अब अगली तस्वीर कांग्रेस के टिकट के फैसले के बाद ही साफ होगी…और तब यह भी सामने आएगा कि वार्ड स्तर से शुरू हुआ आशीष यादव ‘लल्ला’ का राजनीतिक सफर नगर पालिका अध्यक्ष की दौड़ तक पहुंचता है या नहीं।
नगरसेना की नौकरी छोड़ी और राजनीति में उतरे
आशीष यादव की राजनीतिक यात्रा को समझने के लिए उनके पुराने सफर पर नजर डालना जरूरी है, वर्ष 2007 से 2015 तक वे नगरसेना की नौकरी में रहे,वर्ष 2015 में नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में आने का प्रयास शुरू किया,राजनीति में आने के बाद उन्होंने सीधे बड़े पद की तरफ कदम नहीं बढ़ाया,बल्कि पार्षद का चुनाव लड़कर अपनी राजनीतिक जमीन तैयार की, पहली बार उन्होंने वार्ड क्रमांक 7 से पार्षद का चुनाव लड़ा,इस चुनाव में उनका मुकाबला घनश्याम साहू से हुआ,आशीष यादव ने घनश्याम साहू को हराकर पहली बार पार्षद का चुनाव जीता, यह जीत उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत थी,पहली बार चुनाव जीतने के बाद उन्होंने नगर पालिका की राजनीति को नजदीक से समझा और वार्ड स्तर पर अपनी सक्रियता बनाए रखी, एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि जब आशीष यादव ने पहली बार वार्ड क्रमांक 7 से चुनाव लड़ा था, तब उनका घर वार्ड क्रमांक 14 में था, यानी उन्होंने अपने निवास वाले वार्ड से चुनाव नहीं लड़ा, बल्कि वार्ड 7 से चुनाव मैदान में उतरे और जीत दर्ज की।
2021 में वार्ड 6 से फिर मैदान में उतरे
पहली बार पार्षद बनने के बाद आशीष यादव ने राजनीति में अपनी सक्रियता जारी रखी, इसके बाद वर्ष 2021 में उन्होंने वार्ड क्रमांक 6 से दोबारा पार्षद का चुनाव लड़ा,इस बार उनके सामने कोई सामान्य राजनीतिक चेहरा नहीं,बल्कि पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष शैलेश शिवहरे थे,शैलेश शिवहरे नगर पालिका की राजनीति में पहले से पहचान रखने वाला नाम थे और उन्हें अध्यक्ष पद के लिए दावेदार माने जाने की बात भी सामने आती रही थी, लेकिन 2021 के चुनाव में आशीष यादव ने शैलेश शिवहरे को पराजित कर दिया और दूसरी बार पार्षद निर्वाचित हुए, इस चुनाव के साथ आशीष यादव की राजनीतिक स्थिति पहले से अलग हो गई। पहली जीत जहां उनके राजनीतिक प्रवेश की पहचान थी, वहीं दूसरी जीत ने नगर पालिका की राजनीति में उनके प्रभाव को और सामने ला दिया,इस बार भी एक दिलचस्प बात यह रही कि जब वे वार्ड क्रमांक 6 से चुनाव लड़े, तब उनका घर वार्ड क्रमांक 12 में था, यानी पहली बार वार्ड 7 और दूसरी बार वार्ड 6 से चुनाव लड़ने वाले आशीष यादव का निवास दोनों ही चुनावों के समय संबंधित चुनावी वार्ड में नहीं था। इसके बावजूद दोनों चुनावों में उन्होंने जीत दर्ज की।
वार्ड 6 में श्रीराम चौक से शहीद स्मारक तक काम
आशीष यादव के अनुसार उपाध्यक्ष और पार्षद रहते हुए वार्ड क्रमांक 6, परियोजना कॉलोनी में कई विकास कार्य कराए गए,इनमें प्रमुख रूप से परियोजना कॉलोनी में श्रीराम चौक का निर्माण,हाई स्कूल में शहीद स्मारक का निर्माण,हाई स्कूल में लाइट स्थापना का कार्य शामिल है,आशीष यादव का कहना है कि ये सभी कार्य पार्षद निधि से कराए गए,इन कार्यों को वे अपने जनप्रतिनिधित्व के दौरान किए गए कार्यों के रूप में सामने रखते हैं,वार्ड स्तर की राजनीति में सड़क,चौक,प्रकाश व्यवस्था और सार्वजनिक स्थलों का विकास सीधे लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ा होता है। यही कारण है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधियों द्वारा अपने कार्यकाल के दौरान कराए गए कार्यों को प्रमुखता से जनता के सामने रखा जाता है।
लोगों के बीच मिलनसार व्यवहार की भी चर्चा…
आशीष यादव को लेकर उनके समर्थकों की ओर से एक और बात प्रमुखता से कही जाती है-उनका मिलनसार व्यवहार,स्थानीय राजनीति में केवल चुनाव जीतना ही किसी जनप्रतिनिधि की पहचान नहीं बनाता,लोगों के बीच रहना,आम लोगों से मिलना और उनकी समस्याओं को सुनना भी राजनीतिक सफर का हिस्सा होता है, आशीष यादव के समर्थक मानते हैं कि पार्षद और उपाध्यक्ष रहते हुए उन्होंने लोगों के बीच अपनी पहुंच बनाए रखी और इसी कारण शहर में उनका एक अलग संपर्क क्षेत्र बना, हालांकि राजनीतिक दावेदारी के संदर्भ में किसी नेता की लोकप्रियता का अंतिम आकलन चुनावी परिणाम से ही होता है,फिलहाल इतना जरूर है कि उनका नाम अध्यक्ष पद की संभावित दावेदारी को लेकर चर्चा में है।
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