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नई दिल्ली@दिल्ली,बेंगलुरु समेत कई राज्यों में फैला नकली कैंसर दवाओं का सिंडिकेट

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90 से अधिक अस्पताल जांच के दायरे में
नई दिल्ली,15 सितम्बर 2026। बेंगलुरु और दिल्ली समेत देश के कई बड़े राज्यों में नकली और गलत लेबल वाली कैंसर और आईसीयू दवाओं का एक बड़ा नेटवर्क सामने आया है। बेंगलुरु में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम की जांच में खुलासा हुआ है कि 90 से ज्यादा अस्पतालों और क्लीनिकों तक संदिग्ध दवाएं पहुंचाई गईं। दिल्ली और राजस्थान में भी सरकारी सप्लाई से दवाएं डायवर्ट कर ब्लैक मार्केट में बेचने के मामले पकड़े गए हैं।
कई राज्यों में फैला नेटवर्क
आपको बता दें कि यह पूरा रैकेट देश के प्रमुख शहरों जैसे बेंगलुरु, दिल्ली, बीकानेर (राजस्थान),महाराष्ट्र और गुजरात में फैला हुआ पाया गया है। बेंगलुरु के मगदी स्थित तवारेकेरे में एक सीक्रेट स्टॉकहाउस पर हुई छापेमारी से इस अंतरराज्यीय नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं।
जांच में आया सामने
जांच में सामने आया कि दिल्ली के सरकारी अस्पतालों से भी दवाएं चुराकर ब्लैक मार्केट के जरिए दूसरे राज्यों में सप्लाई की जा रही थीं। दवाओं का यह अवैध कारोबार लंबे समय से चल रहा था,लेकिन हाल के महीनों (अगस्त और सितंबर) में हुई छापेमारी और गिरफ्तारियों के बाद यह सामने आया। बेंगलुरु एसआईटी की जांच के साथ-साथ दिल्ली पुलिस ने अगस्त में कार्रवाई करते हुए 17 लोगों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद से ही विभिन्न राज्य सरकारें और ड्रग रेगुलेटर्स अपनी सप्लाई चेन और इंस्पेक्शन की समीक्षा कर रहे हैं।
भारी छूट पर बेची जा रही थीं दवाएं
यह नेटवर्क डिस्काउंट के लालच और प्रोक्योरमेंट सिस्टम की ढिलाई का फायदा उठाकर काम कर रहा था। फाइजर जैसे बड़े ब्रांड्स और महंगी कैंसर दवाओं को 50′ तक की भारी छूट पर बेचा जा रहा था, जिससे अस्पताल और क्लीनिक आसानी से इनके जाल में फंस गए। मैन्युफैक्चरर से लेकर मरीज तक पहुंचने की जटिल सप्लाई चेन में डिस्ट्रीब्यूटर, होलसेलर और फार्मेसी स्तर पर वेरिफिकेशन न होना और बैच नंबरों का मिलान न करना इसकी मुख्य वजह बना।
फर्जीवाड़े को रोकने के लिए किया जा रहा ये काम
इस तरह के गंभीर फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सप्लाई चेन में डिजिटल ट्रेसेबिलिटी और बारकोड सिस्टम को सख्ती से लागू किया जा रहा है। हालांकि, सिर्फ तकनीक काफी नहीं है; जब तक हर अस्पताल और फार्मेसी मैन्युफैक्चरर के रिकॉर्ड से बैच नंबर का सत्यापन नहीं करेंगे, तब तक इसे पूरी तरह रोकना मुश्किल है। सरकार द्वारा रिस्क-बेस्ड इंस्पेक्शन और कड़ी कानूनी कार्रवाई के जरिए इस पूरे सिस्टम को सुरक्षित बनाने का प्रयास जारी है।


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