नई दिल्ली,28 जुलाई 2026। सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को कॉकरोच जनता पार्टी के आह्वान पर हुए छात्र आंदोलन के दौरान संसद मार्च में पुलिस कार्रवाई से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच के सामने याचिकाकर्ताओं ने बताया कि यह मामला सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि मध्य प्रदेश, नागपुर और बिहार में भी इसी तरह की घटनाएं हुई हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पैलेट गन के इस्तेमाल, इलेक्टि्रक बैटन,नाबालिगों की हिरासत और पुलिस की सिविल ड्रेस में हिंसा जैसे कई गंभीर आरोपों पर सख्त टिप्पणी की और कहा कि इन सभी मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों को कोर्ट से राहत मिली है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि फिलहाल एफ आईआर पर दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। इसके साथ ही केंद्र समेत सात राज्यों को नोटिस जारी किया गया है। याचिकाकर्ताओं के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कोर्ट को बताया कि यह पूरे देश में हो रहे विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा मामला है और सिर्फ दिल्ली की घटना नहीं है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि सभी याचिकाओं में कुछ समान आरोप देखने को मिले हैं। इनमें एक 19 साल के लड़के की आंखों की रोशनी पैलेट गन के इस्तेमाल से जाने का मामला है। इसके अलावा इलेक्टि्रक बैटन के इस्तेमाल की शिकायत भी है। एक युवती को गंभीर चोट लगने के बाद आईसीयू में भर्ती कराया गया। वकीलों पर हमले की भी घटना सामने आई है और एक मीडियाकर्मी पर बेरहमी से हमला किया गया।
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