रायपुर,13 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने स्वास्थ्य विभाग में निजीकरण,आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ने का फैसला किया है। संघ की प्रांतीय महासमिति एवं कोर कमेटी की बैठक में कर्मचारियों के लंबित वेतनमान, नियमित भर्ती,संविदा व दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन सहित विभिन्न कर्मचारी हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के बाद चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की गई। आंदोलन के प्रथम चरण में 22 जुलाई को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रांतीय कार्यालय में प्रांताध्यक्ष अनिल पाण्डेय की अध्यक्षता एवं संरक्षक/सलाहकार ओ.पी. शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित बैठक में स्वास्थ्य विभाग में निजीकरण की बढ़ती प्रक्रिया पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। बैठक में विशेष रूप से पैथोलॉजी और फार्मेसी सेवाओं को एचएलएल कंपनी को सौंपे जाने के बाद भविष्य में व्यापक निजीकरण की आशंका जताते हुए इसका पुरजोर विरोध करने का निर्णय लिया गया। बैठक में कहा गया कि दूसरे राज्यों के डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल कर्मियों के लिए पंजीयन की अनिवार्यता समाप्त किए जाने से प्रदेश के युवाओं के रोजगार के अवसर प्रभावित होंगे। साथ ही फर्जी डिग्री और डिप्लोमा धारकों के स्वास्थ्य सेवाओं में प्रवेश की आशंका भी बढ़ेगी,जिससे गुणवत्तापूर्ण उपचार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। महासमिति ने राज्य शासन से स्वास्थ्य कर्मचारियों के लंबित पुनरीक्षित वेतनमान को तत्काल लागू करने,विभाग में स्वीकृत रिक्त पदों पर नियमित भर्ती शुरू करने,संविदा एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन देने,जीवन दीप कर्मचारियों के लिए स्पष्ट नीति बनाने तथा प्रदेश में स्वास्थ्य आयोग के गठन की मांग की। बैठक में कर्मचारी-अधिकारी महासंघ के संयोजक अनिल शुक्ला ने कहा कि प्रदेश में विभिन्न विभागों में अलग-अलग माध्यमों से निजीकरण की शुरुआत की जा रही है।
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