- जिसे लेकर उठे थे सवाल, उसी पर मिली सफलता, छत्तीसगढ़ के 5 नए मेडिकल कॉलेजों को NMC की हरी झंडी
- आखिरकार पूरी हुई ‘बाकी मैच’ की पारी, प्रदेश के 5 मेडिकल कॉलेजों को एनएमसी की स्वीकृति
- स्वास्थ्य मंत्री बोले थे…‘अभी मैच बाकी है’,अब एनएमसी की मंजूरी के साथ पूरा हुआ वादा
- प्रदेश को मिली बड़ी सौगात : एनएमसी ने 5 नए मेडिकल कॉलेजों को दी मंजूरी,बढ़ेंगी एमबीबीएस सीटें
- आलोचनाओं का जवाब उपलब्धि से,छत्तीसगढ़ में 5 नए मेडिकल कॉलेजों को मिली मंजूरी
न्यूज डेस्क
रायपुर,13 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। आखिरकार वह इंतजार खत्म हो गया, जिसका प्रदेश के लाखों लोगों, मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोगों को लंबे समय से इंतजार था, राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड ने छत्तीसगढ़ के पांच नए शासकीय मेडिकल कॉलेजों को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए संचालन की स्वीकृति प्रदान कर दी है, इसके साथ ही प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है, यह स्वीकृति केवल नए मेडिकल कॉलेजों की शुरुआत भर नहीं है, बल्कि प्रदेश के दूरस्थ और आदिवासी अंचलों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं,विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता और मेडिकल शिक्षा के नए अवसरों का द्वार भी खोलती है।
एक महीने पहले तक हो रही थी तीखी आलोचना- करीब एक महीने पहले तक हालात बिल्कुल अलग थे,मेडिकल कॉलेजों की स्वीकृति में हो रही देरी को लेकर सरकार,विशेषकर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल,विपक्ष, मीडिया और सोशल मीडिया के निशाने पर थे,कई तरह की आशंकाएं जताई जा रही थीं कि इस सत्र में मेडिकल कॉलेजों को अनुमति नहीं मिल पाएगी, सोशल मीडिया पर लगातार सवाल उठ रहे थे कि आखिर इतनी तैयारी के बावजूद स्वीकृति क्यों नहीं मिल रही है, विपक्ष भी सरकार पर हमलावर था और इसे स्वास्थ्य विभाग की विफलता के रूप में प्रस्तुत कर रहा था।
स्वास्थ्य मंत्री ने नहीं छोड़ा भरोसा
इन सबके बीच स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल लगातार यह विश्वास दिलाते रहे कि प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी अवश्य मिलेगी,उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर कहा था ‘मेडिकल कॉलेज बनकर रहेगा…अभी मैच बाकी है, उस समय उनके इस बयान पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं,कुछ लोगों ने इसे केवल राजनीतिक बयान माना,लेकिन स्वास्थ्य मंत्री लगातार अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर कमियों को दूर कराने और राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग के समक्ष आवश्यक दस्तावेज एवं व्यवस्थाएं पूरी कराने में जुटे रहे।
अब सच साबित हुआ भरोसा
अब जब राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग ने पांचों मेडिकल कॉलेजों को स्वीकृति प्रदान कर दी है, तो स्वास्थ्य मंत्री का वह भरोसा सही साबित हुआ है, जिस ‘बाकी मैच’ की बात उन्होंने कही थी, वह अब पूरा हो चुका है, यह उपलब्धि केवल एक राजनीतिक सफलता नहीं, बल्कि प्रदेश के लाखों नागरिकों, मेडिकल छात्रों और भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी राहत और खुशखबरी है।
प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को मिलेगी नई मजबूती
नए मेडिकल कॉलेज शुरू होने से प्रदेश में एमबीबीएस सीटों की संख्या बढ़ेगी, इससे छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों को दूसरे राज्यों का रुख कम करना पड़ेगा,वहीं मेडिकल कॉलेजों के साथ विकसित होने वाले अस्पतालों से स्थानीय लोगों को विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं भी अपने जिले में ही उपलब्ध होंगी, विशेष रूप से आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा,मेडिकल कॉलेजों के माध्यम से चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ,पैरामेडिकल कर्मचारियों और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार भी होगा।
शांत कार्यशैली,परिणाम पर विश्वास
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की कार्यशैली को करीब से जानने वाले लोग मानते हैं कि वे बिना अनावश्यक बयानबाजी के काम करने में विश्वास रखते हैं,पिछले दो दशकों से सार्वजनिक जीवन में उनकी पहचान ऐसे जनप्रतिनिधि की रही है जो विकास कार्यों को लेकर दृढ़ रहते हैं और परिणाम आने तक प्रयास जारी रखते हैं, मेडिकल कॉलेजों की स्वीकृति का यह पूरा घटनाक्रम भी उसी कार्यशैली का उदाहरण माना जा रहा है,जब आलोचनाएं अपने चरम पर थीं,तब भी उन्होंने संयम नहीं खोया और लगातार यही कहा कि मेडिकल कॉलेजों की मंजूरी मिलेगी।
स्वास्थ्य सेवाओं के भविष्य के लिए बड़ा कदम
राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग की यह मंजूरी प्रदेश की स्वास्थ्य नीति के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आने वाले वर्षों में इससे प्रदेश में डॉक्टरों की संख्या बढ़ेगी, चिकित्सा शिक्षा को मजबूती मिलेगी और जिला स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित होंगी।
आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा, परिणाम सबसे बड़ा जवाब
लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार और मंत्रियों की जवाबदेही तय होती है, इसलिए आलोचना होना भी स्वाभाविक है, लेकिन किसी भी योजना या परियोजना का वास्तविक मूल्यांकन उसके अंतिम परिणाम से होता है,नए मेडिकल कॉलेजों को मिली स्वीकृति यह दर्शाती है कि लगातार प्रयास और प्रशासनिक समन्वय से जटिल प्रक्रियाओं को भी सफलतापूर्वक पूरा किया जा सकता है, प्रदेश के लोगों के लिए यह केवल एक प्रशासनिक मंजूरी नहीं, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं,चिकित्सा शिक्षा के विस्तार और क्षेत्रीय विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है,अब यह कहा जा सकता है कि जिस ‘मैच’ के बाकी होने की बात स्वास्थ्य मंत्री ने कही थी,वह पूरा हो चुका है और उसका परिणाम प्रदेश के हित में सामने आया है।
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