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कोरिया/सोनहत@कोरबा में बुलडोजर की रफ्तार,नौगई में कार्रवाई की रफ्तार क्यों थमी?

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  • छत्तीसगढ़ में अपराध पर दोहरा पैमाना? कोरबा में बुलडोजर कार्रवाई, नौगई तिहरे हत्याकांड में अब तक इंतजार
  • अपराध एक,कार्रवाई अलग-अलग? कोरबा में बुलडोजर…नौगई तिहरे हत्याकांड में अब तक इंतजार
  • छत्तीसगढ़ में अपराध पर दोहरा पैमाना? कोरबा में आरोपी का अवैध निर्माण ढहा,नौगई हत्याकांड में कार्रवाई क्यों नहीं?
  • कोरबा में बुलडोजर चला,नौगई में क्यों नहीं? तीन मौतों के बाद भी आरोपियों के कथित अवैध निर्माणों पर कार्रवाई का इंतजार
  • तीन हत्याओं पर नहीं चला बुलडोजर…एक हमले में हुई कार्रवाई…सरकार की कार्रवाई पर उठ रहे समानता के सवाल
  • क्या छत्तीसगढ़ में अपराधियों के लिए अलग-अलग कानून? कोरबा में तत्काल बुलडोजर, नौगई तिहरे हत्याकांड में अब तक इंतजार


रवि सिंह
कोरिया/सोनहत,29 जून 2026 (घटती-घटना)।
छत्तीसगढ़ में अपराधियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई और बुलडोजर नीति को लेकर सरकार लगातार जीरो टॉलरेंस की बात करती रही है, लेकिन प्रदेश के दो अलग-अलग जिलों में हुई घटनाओं के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई का कोई समान पैमाना है या फिर परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग मापदंड अपनाए जा रहे हैं? एक ओर कोरबा जिले में भाजपा नेता पर हुए जानलेवा हमले के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी के अवैध निर्माण पर बुलडोजर चला दिया,वहीं दूसरी ओर कोरिया जिले के नौगई तिहरे हत्याकांड को 13 दिन बीत जाने के बाद भी आरोपियों के कथित अवैध निर्माणों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। यही अंतर अब चर्चा और सवालों का विषय बन गया है।
नौगई हत्याकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था-16 और 17 जून की दरमियानी रात सोनहत थाना क्षेत्र के ग्राम नौगई में हुई घटना को प्रदेश के सबसे जघन्य अपराधों में गिना जा रहा है। आरोप है कि एक परिवार के लोगों ने सामूहिक रूप से दूसरे परिवार के पांच सदस्यों पर जानलेवा हमला किया,इस हमले में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल होकर अब भी अस्पताल में उपचाराधीन हैं,मृतकों में एक व्यक्ति वाहन सहित जिंदा जल गया, जबकि अन्य दो की मौत गंभीर चोटों और जलने के कारण उपचार के दौरान हुई,इस घटना ने पूरे प्रदेश में आक्रोश पैदा किया और इसे मॉब लिंचिंग जैसी क्रूरतम वारदातों में शामिल कर देखा जाने लगा।
कोरबा में त्वरित कार्रवाई, कोरिया में इंतजार
दो दिन पहले कोरबा जिले में भाजपा नेता पर जानलेवा हमले का मामला सामने आया,घटना के बाद पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध कार्रवाई की और प्रशासन ने उसके कथित अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाकर उसे ध्वस्त कर दिया, प्रशासन की इस कार्रवाई को सरकार की अपराध के प्रति सख्त नीति का उदाहरण बताया गया, लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि एक जिले में जानलेवा हमले के मामले में इतनी त्वरित कार्रवाई हो सकती है, तो कोरिया जिले में तीन लोगों की मौत और दो लोगों के गंभीर रूप से घायल होने वाले मामले में वैसी ही कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई दी?
जनता पूछ रही है…-
स्थानीय लोगों का कहना है कि नौगई जैसी घटना में तीन लोगों की जान चली गई और दो लोग अब भी अस्पताल में जिंदगी की लड़ाई लड़ रहे हैं, ऐसे मामले में यदि अवैध निर्माणों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई थी, तो उस पर अब तक क्या निर्णय लिया गया? लोग यह भी जानना चाहते हैं कि क्या प्रशासन ने आरोपियों के निर्माणों की जांच कराई? यदि जांच हुई तो उसका निष्कर्ष क्या रहा? और यदि जांच ही नहीं हुई तो उसके पीछे क्या कारण हैं?
सरकार से स्पष्ट नीति की अपेक्षा- कानून के जानकारों का मानना है कि अवैध निर्माणों पर कार्रवाई संबंधित राजस्व, नगरीय निकाय या अन्य सक्षम प्राधिकार द्वारा उपलब्ध अभिलेखों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर की जाती है, इसलिए यदि किसी भी मामले में ऐसी कार्रवाई की जाती है तो उसका आधार स्पष्ट और समान होना चाहिए, इसी कारण अब मांग उठ रही है कि सरकार अपराधियों के विरुद्ध बुलडोजर अथवा अवैध निर्माण हटाने जैसी कार्रवाई के संबंध में अपनी नीति स्पष्ट करे, ताकि यह संदेश जाए कि कानून सभी के लिए समान है और किसी भी मामले में दोहरे मापदंड नहीं अपनाए जाते।
13 दिन बाद भी कार्रवाई पर सवाल-
घटना के बाद पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया और विवेचना जारी होने की बात कही, लेकिन पीडि़त परिवार लगातार पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाता रहा है, परिजनों का कहना है कि जांच की गति और कार्रवाई दोनों उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं हैं, इसी बीच अब एक नया सवाल भी सामने आ गया है, यदि सरकार अपराधियों के विरुद्ध बुलडोजर जैसी सख्त कार्रवाई को कानून व्यवस्था का हिस्सा मानती है, तो नौगई हत्याकांड के आरोपियों के कथित अवैध निर्माणों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
व्यापारिक संघ और परिजनों ने पहले ही उठाई थी मांग…
ऐसा नहीं है कि नौगई हत्याकांड में बुलडोजर कार्रवाई की मांग पहली बार उठी हो,पीडि़त परिवार ने पहले ही आरोपियों के कथित अवैध निर्माणों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की थी,इसके बाद जिले के व्यापारिक संघ ने भी प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर आरोपियों के अवैध कब्जों एवं निर्माणों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की थी,इसके बावजूद अब तक इस दिशा में कोई सार्वजनिक कार्रवाई सामने नहीं आई है।
क्या कार्रवाई के अलग-अलग पैमाने हैं?
यही वह प्रश्न है जो अब राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया है, यदि सरकार अपराधियों के विरुद्ध बुलडोजर कार्रवाई को कानून के दायरे में उचित मानती है,तो क्या यह नीति सभी मामलों में समान रूप से लागू होगी? क्या अपराध की गंभीरता के आधार पर कार्रवाई तय होती है? या फिर आरोपी, घटना अथवा स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार निर्णय बदल जाते हैं? इन सवालों के जवाब फिलहाल शासन और प्रशासन के पास ही हैं।
अब निगाहें शासन के फैसले पर…
नौगई तिहरे हत्याकांड में पुलिस विवेचना जारी है,लेकिन इसके समानांतर प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर भी सवाल बढ़ते जा रहे हैं, एक ओर पीडि़त परिवार निष्पक्ष जांच,सीबीआई जांच और शीघ्र न्याय की मांग कर रहा है, वहीं अब आरोपियों के कथित अवैध निर्माणों पर कार्रवाई नहीं होने को लेकर भी बहस तेज हो गई है, ऐसे में अब यह देखना होगा कि शासन और प्रशासन इस पूरे मामले में कोई स्पष्ट निर्णय लेते हैं या नहीं,ताकि कानून की समानता और निष्पक्षता को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब मिल सके।


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