

- सड़क से ज्यादा मजबूत निकली राजनीति की रिटेनिंग वॉल
- विकास रास्ता पूछता रहा, नेता भूमिपूजन करते रहे, जनता को गड्ढे मिले, नेताओं को फोटो
- तीन-तीन भूमिपूजन, फिर भी सड़क गायब! ₹7.40 करोड़ का विकास ‘सियासी गड्ढे’ में दफन
- नेताओं के ‘खास’ बचाने रुकी सड़क? गोबरी पुल टूटा, बरसात से पहले बढ़ी ग्रामीणों की चिंता
- भूमिपूजन की राजनीति में फंसी सड़क, 5 साल में तीन शिलान्यास, लेकिन ग्रामीण अब भी बेहाल
- ₹7.40 करोड़ की सड़क पर राजनीति का रोलर! जनता धूल फांक रही, नेता फीता काट रहे
- गोबरी पुल टूटा, सड़क अधूरी, राजनीति पूरी, विकास के नाम पर ग्रामीणों के साथ बड़ा खेल?
- सड़क कम, सियासत ज्यादा! नेताओं के रसूख में अटका गंगौटी-शिवपुर मार्ग निर्माण
- जनता पूछ रही—सड़क बनेगी कब? तीन भूमिपूजन के बाद भी अधूरा पड़ा करोड़ों का प्रोजेक्ट
- रसूखदारों के मकान बचाने सड़क की चौड़ाई कम करने की तैयारी? ग्रामीणों में भारी आक्रोश
- विकास का ‘ब्रेकिंग पॉइंट’: पुल टूटा, सड़क रुकी और राजनीति दौड़ती रही
- जनपद सदस्य या सुपर इंजीनियर? सड़क रुकी, ग्रामीण फंसे और राजनीति गर्म
-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर/भैयाथान 17 मई 2026 (घटती-घटना)। विकास की राजनीति करने वाले नेताओं के भाषणों में सड़कें बड़ी तेजी से बन जाती हैं, मंच पर नक्शे तैयार हो जाते हैं, नारियल फूट जाते हैं, फोटो खिंच जाती हैं और जनता को भरोसा दिला दिया जाता है कि अब गांव की किस्मत बदलने वाली है, लेकिन भैयाथान ब्लॉक का गंगौटी-शिवपुर नवापारा मार्ग देखकर ऐसा लगता है कि यहां सड़क कम और राजनीति ज्यादा बनाई गई है, करीब ?7 करोड़ 40 लाख की लागत से बनने वाली यह सड़क आज खुद सरकारी दावों और सियासी खेल का सबसे बड़ा उदाहरण बन चुकी है, पांच साल में इस सड़क का तीन-तीन बार भूमिपूजन हुआ, लेकिन सड़क आज भी अधूरी पड़ी है, जनता पूछ रही है कि आखिर यह सड़क बनेगी कब? या फिर हर चुनाव में सिर्फ इसका नया भूमिपूजन ही होता रहेगा? पूर्व विधायक पारसनाथ राजवाड़े ने अपने कार्यकाल में इस सड़क का दो बार भूमिपूजन किया, सत्ता बदली तो वर्तमान कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने भी बड़े तामझाम के साथ तीसरी बार भूमिपूजन कर दिया, लेकिन जमीन पर आज भी धूल उड़ रही है, गड्ढे पड़े हैं और अधूरी रिटेनिंग वॉल विकास के दावों पर हंसती नजर आ रही है, करीब 5 किलोमीटर लंबी और 10 मीटर चौड़ी प्रस्तावित इस सड़क का निर्माण पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा कराया जाना था, लेकिन अब यह सड़क निर्माण से ज्यादा राजनीतिक संघर्ष, रसूखदारों की सुरक्षा और प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक बन चुकी है।
विकास की सड़क पर राजनीति का ब्रेकर
ग्रामीणों का आरोप है कि जब सड़क निर्माण का काम शुरू हुआ, तभी से राजनीति ने उसमें ऐसा ब्रेक लगाया कि काम दोबारा गति ही नहीं पकड़ सका, इस पूरे विवाद में सबसे ज्यादा चर्चा जनपद सदस्य राजू कुमार गुप्ता के नाम की हो रही है, गांवों में लोग व्यंग्य में उन्हें ‘पीडब्ल्यूडी का सुपर इंजीनियर’ कहने लगे हैं, आरोप है कि वे खुद को विभागीय अधिकारी से कम नहीं समझते और सड़क निर्माण में लगातार दखल देते रहे, जब सड़क निर्माण शुरू हुआ, तब उन्होंने निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाते हुए काम रुकवा दिया, अगर गुणवत्ता खराब थी, तो सवाल उठाना गलत नहीं था, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि उसके बाद सड़क दोबारा शुरू कराने के लिए आखिर क्या किया गया? ग्रामीणों का कहना है कि काम रुकवाना आसान था, लेकिन सड़क पूरी हो सके, इसके लिए किसी ने गंभीर पहल नहीं की, अब बरसात सिर पर है, लोगों की परेशानी बढ़ रही है, लेकिन जिम्मेदार लोग अब भी राजनीति में व्यस्त हैं, सूत्रों के मुताबिक क्षेत्र में यह चर्चा भी जोरों पर है कि राजू कुमार गुप्ता खुद इस निर्माण कार्य में रुचि रखते थे, लेकिन ठेकेदार द्वारा उन्हें काम में हिस्सेदारी नहीं मिलने के कारण वे लगातार निर्माण में अड़ंगा बने हुए हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन गांव-गांव में यही चर्चा सबसे ज्यादा सुनाई दे रही है, एक ग्रामीण ने तंज कसते हुए कहा सड़क कम बनी, लेकिन नेताओं की राजनीति फोरलेन हो गई।
घटिया निर्माण का खेलः रिटेनिंग वॉल में सरिया तक नहीं!
इस सड़क निर्माण में गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर सवाल उठ चुके हैं, आरोप है कि ठेकेदार द्वारा बनाई जा रही रिटेनिंग वॉल में सरिया तक नहीं डाला जा रहा था और घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा था, मामला मीडिया में आने के बाद विभाग हरकत में आया, इंजीनियर विनोद सिंह मौके पर पहुंचे और अमानक निर्माण को रुकवाकर उसे तोड़कर दोबारा बनाने के निर्देश दिए, लेकिन इसके बाद सड़क निर्माण सुधार के साथ आगे बढ़ने के बजाय पूरी तरह ठप पड़ गया, ग्रामीण पूछ रहे हैं कि यदि निर्माण में गड़बड़ी थी तो दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि कार्रवाई हुई, तो सड़क अब तक शुरू क्यों नहीं हुई?
ग्रामीणों ने दी आंदोलन और चक्काजाम की चेतावनी
गांव के लोगों में अब भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अब आश्वासन नहीं, सड़क चाहिए, यदि मानसून से पहले सड़क और पुल का निर्माण शुरू नहीं हुआ तथा किसानों को मुआवजा नहीं मिला, तो वे उग्र आंदोलन और चक्काजाम करेंगे, एक ग्रामीण युवक ने गुस्से में कहा नेताओं के लिए सड़क चुनावी पोस्टर का बैकग्राउंड है, लेकिन हमारे लिए यह जिंदगी और मौत का रास्ता है।
विकास के नाम पर राजनीति का सबसे बड़ा गड्ढा
गंगौटी-शिवपुर नवापारा सड़क आज सिर्फ अधूरी सड़क नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आईना बन चुकी है जहां जनता की जरूरतें राजनीति के सामने छोटी पड़ जाती हैं, जहां गरीब किसान की जमीन आसानी से ले ली जाती है, लेकिन रसूखदारों की दीवार बचाने के लिए पूरा प्रोजेक्ट रोक दिया जाता है, जहां पुल टूटने के बाद भी सिस्टम नहीं जागता, जहां सड़क से ज्यादा भूमिपूजन होते हैं, और जहां विकास का मतलब जनता की सुविधा नहीं, बल्कि राजनीतिक समीकरण बन जाता है, अब देखना यह है कि प्रशासन मानसून से पहले जागता है या फिर इस बार भी बारिश के साथ ग्रामीणों की परेशानियां, सरकारी दावों की पोल और राजनीति का असली चेहरा सबके सामने बहकर आएगा।
नेताओं के ‘अपनों’ का घर बचाने के लिए थमा काम?
सड़क निर्माण महीनों से बंद क्यों है? इस सवाल का जवाब तलाशने पर अंदरखाने से कई चौंकाने वाली बातें सामने आ रही हैं, सूत्रों के अनुसार, सड़क के स्वीकृत नक्शे और चौड़ीकरण की जद में कुछ स्थानीय रसूखदार नेताओं के करीबियों के मकान और दुकानें आ रही हैं, यदि सड़क तकनीकी मानकों के अनुसार बनाई गई, तो कई पक्के निर्माणों पर बुलडोजर चल सकता है, यही कारण है कि कथित तौर पर पर्दे के पीछे से दबाव बनाकर काम रुकवा दिया गया, ग्रामीणों का आरोप है कि आम जनता की सुविधा को किनारे रखकर कुछ खास लोगों के मकानों को बचाने का खेल खेला जा रहा है, गांव के लोगों का कहना है कि गरीब किसानों की जमीन सड़क के लिए आसानी से ले ली गई, लेकिन जब नेताओं के करीबियों की दीवार सामने आई तो पूरा सिस्टम रुक गया।
अब सड़क नहीं, उसकी चौड़ाई काटने की तैयारी!
इस मामले में अब एक और चौंकाने वाली चर्चा तेजी से फैल रही है, कहा जा रहा है कि जिन हिस्सों में रसूखदारों के मकान आ रहे हैं, वहां सड़क की निर्धारित चौड़ाई ही कम करने की तैयारी चल रही है, यानी सड़क जनता की जरूरत के हिसाब से नहीं, बल्कि नेताओं के करीबियों के घर बचाने के हिसाब से बनाई जाएगी! ग्रामीणों का आरोप है कि सार्वजनिक सड़क के मास्टर प्लान और तकनीकी मानकों से खिलवाड़ कर कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने की कोशिश हो रही है, यदि ऐसा हुआ, तो भविष्य में यह सड़क दुर्घटनाओं और ट्रैफिक समस्याओं का बड़ा कारण बन सकती है।
गरीब किसानों की जमीन गई, मुआवजा अब तक नहीं
इस सड़क निर्माण में करीब 57 किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई, किसानों ने विकास के नाम पर अपनी जमीन दे दी, लेकिन बदले में उन्हें न सड़क मिली और न मुआवजा, ग्रामीणों का आरोप है कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया बिजली की रफ्तार से पूरी कर ली गई, लेकिन मुआवजा भुगतान की फाइलें अब कछुए की चाल से भी धीमी चल रही हैं, एक किसान ने नाराजगी में कहा सरकार जमीन लेते समय हमें विकास का सपना दिखाती है, लेकिन बाद में वही किसान सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटता रह जाता है।
गोबरी नदी का पुल टूटा, लेकिन जिम्मेदारों की नींद नहीं टूटी
इस पूरे मामले की सबसे भयावह तस्वीर गोबरी नदी का क्षतिग्रस्त पुल है, पिछले साल भारी बारिश में यह पुल टूट गया था। उसके बाद ग्रामीणों को 10 से 12 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय कर जिला और ब्लॉक मुख्यालय तक पहुंचना पड़ा, लेकिन एक साल बीतने के बाद भी पुल की स्थिति जस की तस बनी हुई है, अब फिर मानसून सिर पर है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस बार भी सड़क और पुल का काम पूरा नहीं हुआ, तो करीब 10 हजार की आबादी का संपर्क कट जाएगा, सबसे ज्यादा खतरा मरीजों, गर्भवती महिलाओं और स्कूली बच्चों को होगा, ग्रामीणों का कहना है कि अगर बारिश के दौरान रास्ता बंद हो गया और किसी मरीज की जान चली गई, तो उसकी जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?
जनता पूछ रहीः नेताओं की जिम्मेदारी सिर्फ नारियल फोड़ना है क्या?
अब ग्रामीण खुलकर सवाल पूछ रहे हैं।
पहला सवालः- जब इस सड़क का तीन-तीन बार भूमिपूजन हो चुका है, तो क्या जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी सिर्फ फोटो खिंचवाने और नारियल फोड़ने तक सीमित है?
दूसरा सवालः- क्या कुछ रसूखदार नेताओं के करीबियों के मकान बचाने के लिए 10 हजार ग्रामीणों की जिंदगी दांव पर लगाई जा रही है?
तीसरा सवालः- यदि बारिश में रास्ता बंद होने से किसी मरीज की मौत होती है, तो जिम्मेदार कौन होगा—पीडब्ल्यूडी विभाग, ठेकेदार या स्थानीय जनप्रतिनिधि?
चौथा सवालः- 57 किसानों की जमीन अधिग्रहित करने के बाद भी मुआवजा भुगतान में इतनी देरी क्यों?
पांचवां सवालः- आखिर राजू कुमार गुप्ता पर लगाम कौन लगाएगा और सड़क निर्माण दोबारा कब शुरू होगा?
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