‘बच्चों को खेलने नहीं दिया जाता’…खिलाडि़यों और परिजनों का फूटा गुस्सा….
क्रिकेट संघ सचिव पर मनमानी के आरोप,मैच रद्द होने से भड़का विवाद…
अम्बिकापुर,17 मई 2026 (घटती-घटना)। गांधी स्टेडियम में क्रिकेट को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जूनियर खिलाडि़यों और उनके परिजनों ने सरगुजा क्रिकेट संघ के सचिव विनीत विशाल जायसवाल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। खिलाडि़यों का कहना है कि मैदान में बच्चों को खेलने नहीं दिया जा रहा,मैच रद्द कर दिए जाते हैं और क्रिकेट गतिविधियों पर कुछ लोगों का एकाधिकार बना हुआ है। विवाद उस समय और बढ़ गया जब अंडर-14 खिलाडि़यों को टूर्नामेंट के लिए बुलाए जाने के बाद मैदान पहुंचने पर मैच रद्द होने की जानकारी मिली। परिजनों का आरोप है कि बच्चों को पहले बुलाया गया, लेकिन बाद में खेलने से रोक दिया गया।
‘मैदान पहुंचते ही कहा गया — मैच नहीं होगा : क्रिकेट खिलाड़ी आशुतोष प्रजापति ने आरोप लगाया कि सुबह खिलाड़ी मैच खेलने गांधी स्टेडियम पहुंचे थे। कुछ देर बाद क्रिकेट संघ के सचिव पहुंचे और साफ शब्दों में कह दिया कि यहां कोई मैच नहीं होगा। खिलाड़ी का आरोप है कि मैदान में बच्चों को नियमित अभ्यास तक नहीं करने दिया जाता। स्टंप उपलब्ध नहीं कराए जाते, कई बार ग्राउंड में ताला लगा दिया जाता है और हर गतिविधि के लिए अनुमति लेने की स्थिति बना दी गई है। आशुतोष ने सवाल उठाते हुए कहा, ‘जब यह नगर निगम की संपत्ति है तो किसी एक संस्था का पूर्ण अधिकार कैसे हो सकता है? ‘
बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ : अंडर-14 खिलाड़ी के अभिभावक पीयूष त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि खिलाडि़यों और परिजनों को पहले से मैच रद्द होने की कोई सूचना नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि बच्चे सुबह से तैयारी कर मैदान पहुंचे थे, लेकिन वहां जाकर पता चला कि मैच नहीं होगा। परिजनों का कहना है कि लगातार ऐसे हालात बनने से बच्चों का मनोबल टूट रहा है और सरगुजा की क्रिकेट प्रतिभाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। पीयूष त्रिपाठी ने नाराजगी जताते हुए कहा, ‘क्रिकेट धूप, मिट्टी और पसीने का खेल है। अगर एसी में बैठकर क्रिकेट खेलना होता तो यह इंडोर गेम होता। बच्चे अपनी इच्छा और माता-पिता की सहमति से खेलने आते हैं, फिर उन्हें रोकना गलत है। ‘ उन्होंने आरोप लगाया कि रायपुर और भिलाई जैसे शहरों के खिलाडि़यों को ज्यादा अवसर मिलते हैं, जबकि सरगुजा के बच्चों को पर्याप्त मैच और एक्सपोजर नहीं दिया जाता।
अकादमियों की लड़ाई में पिस रहे खिलाड़ी : स्थानीय अभिभावकों ने आरोप लगाया कि शहर में कई क्रिकेट अकादमियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है और इसका सीधा नुकसान खिलाडि़यों को उठाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि व्यक्तिगत खींचतान और नियंत्रण की राजनीति के कारण बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
सचिव ने कहा — ‘20 टूर्नामेंट करा चुके हैं : आरोपों पर जवाब देते हुए विनीत विशाल जायसवाल ने सभी आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में 20 से अधिक लेदर बॉल टूर्नामेंट आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें जिला, संभाग और राज्य स्तर की प्रतियोगिताएं शामिल हैं। सचिव का कहना है कि मैदान अब सार्वजनिक गतिविधियों का केंद्र बनता जा रहा है। यहां टेनिस बॉल टूर्नामेंट और अन्य आयोजन होने लगे हैं, जिससे मैदान की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और राज्य स्तरीय मैच मिलने में दिक्कत आ रही है।
सरगुजा के खिलाड़ी रणजी तक पहुंचे…
सचिव ने यह भी दावा किया कि सरगुजा क्रिकेट संघ का प्रदर्शन बेहतर रहा है और यहां के खिलाड़ी उच्च स्तर तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि रणजी ट्रॉफी तक क्षेत्र के खिलाड़ी पहुंचे हैं और उपलब्ध संसाधनों के हिसाब से संघ लगातार काम कर रहा है।
अब सवालों के घेरे में पूरी खेल व्यवस्था
पूरा विवाद अब केवल एक मैच रद्द होने का मामला नहीं रह गया है। खिलाडि़यों और परिजनों का कहना है कि यदि जिला स्तर पर ही बच्चों को खेलने का अवसर नहीं मिलेगा तो क्षेत्र की प्रतिभाएं आगे कैसे बढ़ेंगी। स्थानीय खेल प्रेमियों का कहना है कि जिला प्रशासन,नगर निगम और क्रिकेट संघ को स्पष्ट नीति बनानी चाहिए, ताकि गांधी स्टेडियम जैसे सार्वजनिक मैदानों का उपयोग पारदर्शी तरीके से हो सके और खिलाडि़यों को बिना विवाद नियमित अभ्यास व मैच का अवसर मिल सके।
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