नई दिल्ली,13 अप्रैल 2026। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में उन वोटरों को मतदान करने की इजजात देने से इनकार कर दिया है जिनके नाम स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के दौरान काट दिए गए हैं। ऐसे वोटरों के मामले अपीलीय ट्रिब्यूनलों के पास लंबित हैं। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि अगर हम ऐसे वोटरों को वोट डालने की इजाजत देंगे तो उन लोगों के वोटिंग अधिकार छीनने होंगे जिनके नाम एसआईआर लिस्ट में शामिल हैं। कोर्ट ने कहा कि वोटिंग से 10 दिन पहले, इस स्टेज पर चुनाव प्रक्रिया में कोई दखल नहीं देंगे। सीजेआई ने कहा कि अगर एसआईआर प्रक्रिया को लेकर ऐसे ही आपत्तियां आती रहीं, तो चुनाव कैसे होंगे। कलकत्ता हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 11 अप्रैल तक 34 लाख से अधिक अपीलें दायर की जा चुकी हैं जिनपर फैसला आना बाकी है।
कोर्ट बोला- जीत के अंतर से ज्यादा वोटर वोट नहीं डाल पाए तो दखल देंगे
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव परिणाम में तभी दखल दिया जाएगा, जब बड़ी संख्या में मतदाता बाहर किए गए हों और वह संख्या जीत के अंतर को प्रभावित करती हो। जस्टिस बागची ने आयोग से कहा- मान लीजिए कि जीत का अंतर 2′ है और 15′ मतदाता वोट नहीं डाल सके, तो हमें इस पर सोचना होगा। यह चिंता का मामला हो सकता है। यह मत समझिए कि बाहर किए गए मतदाताओं का सवाल हमारे दिमाग में नहीं है।
कोर्ट बोला- जांच अधिकारियों से 100′ सटीकता की उम्मीद नहीं कर सकते
जस्टिस बागची ने यह भी कहा कि एसआईआर प्रक्रिया में काम कर रहे न्यायिक अधिकारियों से भी जांच प्रक्रिया के दौरान कुछ गलतियां हुई होंगी। उन्होंने कहा- न्यायिक अधिकारियों से 100′ सटीकता की उम्मीद नहीं की जा सकती, क्योंकि वे बहुत प्रेशर में काम कर रहे हैं। जस्टिस बागची ने कहा कि जब कोई अधिकारी रोज 1000 से ज्यादा दस्तावेजों की जांच करता है और समयसीमा भी कड़ी होती है, तो 70′ सटीकता भी बेहतरीन मानी जाएगी। इसलिए एक मजबूत अपीलीय तंत्र जरूरी है।
बंगाल में 11.85′ नाम हटे, ज्यादातर बांग्लादेश बॉर्डर के पास
पश्चिम बंगाल में अक्टूबर 2025 में कुल वोटर 7.66 करोड़ थे। इनमें से अब तक 90.83 लाख नाम हटाए गए। लगभग 11.85′ वोटर कम हो गए। यानी अब राज्य में 6.76 करोड़ वोटर हैं।
चुनाव आयोग ने फाइनल आंकड़े जारी नहीं किए हैं। इसके अलावा जांच के तहत आए 60.06 लाख वोटरों में से 27.16 लाख के नाम हटाए गए। बांग्लादेश सीमा से लगे जिलों में भी बड़े स्तर पर नाम हटे। नॉर्थ 24 परगना में 5.91 लाख में से 3.25 लाख नाम हटे। वहीं, 8.28 लाख में से 2.39 लाख नाम हटे।
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